सिनेमा जगत के दो दिग्गज कलाकारों नसीरुद्दीन शाह और पीयूष मिश्रा के बीच वैचारिक असहमति और बयानों की तकरार एक बार फिर तेज हो गई है। हाल ही में मुंबई के ऐतिहासिक मैदान शिवाजी पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी द्वारा एक बड़ा राजनीतिक प्रदर्शन आयोजित किया गया था। इस विरोध प्रदर्शन में नसीरुद्दीन शाह भी शामिल हुए और अपना सीधा समर्थन दर्ज कराया। उनकी इस मौजूदगी के तुरंत बाद अभिनेता और लेखक पीयूष मिश्रा ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत वीडियो जारी कर उन पर तीखा प्रहार किया। पीयूष मिश्रा ने सवाल उठाया कि जब नसीरुद्दीन शाह चुनिंदा राजनीतिक घटनाक्रमों पर खुलकर मैदान में उतरते हैं, तो उन्हें देश के वास्तविक नायकों, संकट में फंसे छात्रों और जमीनी मुद्दों पर भी उसी तत्परता से अपनी राय रखनी चाहिए।
विमान संकट में 180 जिंदगियां बचाने वाले स्मित मच्छार का जिक्र
पीयूष मिश्रा ने अपने वीडियो संदेश में हालिया विमान घटना का प्रमुखता से उल्लेख किया। उन्होंने फ्लाईदुबई की फ्लाइट 1073 का हवाला देते हुए बताया कि किस तरह आसमान में एक बहुत बड़ा और भयावह हादसा होते-होते टल गया। इस गंभीर आपात स्थिति के दौरान स्मित मच्छार ने असाधारण सूझबूझ और बहादुरी का परिचय दिया। उनकी इसी साहसिक भूमिका के चलते उस विमान में सवार लगभग 180 यात्रियों की जान सुरक्षित बच सकी।
पीयूष मिश्रा ने नसीरुद्दीन शाह को सीधे संबोधित करते हुए कहा कि इतने बड़े संकट से लोगों को उबारने वाले स्मित मच्छार जैसे जांबाज को सार्वजनिक रूप से बधाई और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने पूछा कि जो शख्स हर सामाजिक और राजनीतिक मसले पर अपनी आवाज बुलंद करता है, वह इतने बड़े बहादुरी के कारनामे और जीवन रक्षा के मौके पर पूरी तरह खामोश क्यों रह जाता है। पीयूष ने नसीरुद्दीन शाह से अपील की कि वह सामने आकर स्मित मच्छार की जांबाजी की खुलकर तारीफ करें।
लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के छात्र विवाद और तीखा व्यंग्य
अपने वक्तव्य में पीयूष मिश्रा ने लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी में हाल के दिनों में उभरे छात्र आंदोलन और वहां के तनावपूर्ण माहौल का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि उस शिक्षण संस्थान में हुए प्रदर्शन के दौरान हालात काफी बिगड़ गए थे, जहां छात्रों और पुलिस प्रशासन के बीच सीधी झड़पें देखने को मिली थीं।
इस पूरे मामले को उठाते हुए पीयूष मिश्रा ने नसीरुद्दीन शाह के एक पुराने बयान को याद दिलाया, जिसमें वरिष्ठ अभिनेता ने कहा था कि वह युवा छात्रों से अभिनय के गुर सीखते हैं। इसी बात पर कटाक्ष करते हुए पीयूष ने पूछा कि क्या अब सड़कों पर विरोध कर रहे छात्र उनके अभिनय के नए शिक्षक बन चुके हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि नसीरुद्दीन शाह को अपने उस पुराने बयान की लाज रखते हुए वहां संकट और तनाव का सामना कर रहे छात्रों के प्रति भी सच्ची संवेदना और एकजुटता जाहिर करनी चाहिए।
झारखंड की जमीनी जरूरतें और पाकिस्तानी शायरा की नज्म
पीयूष मिश्रा ने बातचीत के सिलसिले में झारखंड से जुड़ा एक पुराना प्रसंग भी दोबारा उठाया। उन्होंने याद दिलाया कि एक वक्त जब उन्होंने झारखंड के जरूरतमंद और परेशानहाल लोगों के लिए नसीरुद्दीन शाह से वास्तविक मदद की गुहार लगाई थी, तब उन्हें मदद के रूप में राहत सामग्री के बजाय एक पाकिस्तानी शायरा की नज्म भेजी गई थी।
पीयूष ने तंज कसते हुए कहा कि अभाव और भूख से जूझते लोगों को कविताओं या शेरो-शायरी की नहीं, बल्कि आटा, दाल, रोटी, गुड़, लिट्टी और चोखे जैसे बुनियादी खान-पान की दरकार थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल बौद्धिक विमर्श से किसी की भूख नहीं मिटाई जा सकती।
सीजेपी प्रदर्शन और मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा
यह पूरा विवाद उस समय गरमाया जब मुंबई के शिवाजी पार्क में सीजेपी ने देश के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर एक विरोध सभा आयोजित की थी। इस आयोजन में नसीरुद्दीन शाह के साथ-साथ संगीतकार विशाल ददलानी और मनोरंजन जगत के अन्य चेहरे भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने पहुंचे थे। इससे पहले जब दिल्ली में सीजेपी का प्रदर्शन हुआ था, तब भी नसीरुद्दीन शाह ने उसका समर्थन किया था, जिसे लेकर कंगना रनौत ने उन पर कड़ा पलटवार करते हुए उन्हें लोमड़ी करार दिया था और कहा था कि देश में रहकर पड़ोसी की पैरवी नहीं की जा सकती।
वीडियो के अंत में पीयूष मिश्रा ने साफ संदेश देते हुए कहा कि नसीरुद्दीन शाह जब भी किसी मंच से कोई राजनीतिक बयान देंगे, तो उन्हें पीयूष मिश्रा की ओर से इसी तरह स्पष्ट जवाब मिलता रहेगा। खुद को उनका बच्चा बताते हुए पीयूष ने इंकलाब जिंदाबाद के नारे के साथ अपनी बात समाप्त की।



















