1980 के दशक की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'तोहफा' का सदाबहार गाना 'प्यार का तोहफा' आज भी सिनेप्रेमियों के दिलों में अपनी खास जगह रखता है। हाल ही में एक डांस रियलिटी शो 'इंडियाज बेस्ट डांसर सीजन 5' के मंच पर इस प्रतिष्ठित ट्रैक की सुनहरी यादें एक बार फिर ताजा हो गईं। शो में दिग्गज अभिनेत्री जया प्रदा और मीनाक्षी शेषाद्रि बतौर विशेष अतिथि शामिल हुई थीं। मंच पर प्रतियोगी ऋतुराज और कोरियोग्राफर वैष्णवी ने जब इस गाने पर शानदार डांस प्रस्तुति दी, तो जया प्रदा काफी प्रभावित हुईं और उन्होंने इस गाने से जुड़े कई दिलचस्प किस्से साझा किए।
साड़ियों का ऐसा क्रेज कि बाजारों में खत्म हो गया था स्टॉक
जया प्रदा ने खुलासा किया कि साल 1984 में रिलीज हुए इस गाने की लोकप्रियता का असर सीधे तौर पर कपड़ा बाजारों पर देखने को मिला था। उस दौर में पर्दे पर उनके द्वारा पहनी गई साड़ियों का ऐसा जबर्दस्त क्रेज चला कि देशभर की साड़ियों की दुकानों पर भीड़ उमड़ पड़ी। अभिनेत्री ने याद करते हुए बताया, "गाना आते ही 'जया प्रदा साड़ी' का ट्रेंड चल पड़ा था और थिएटर्स में गाना बजते ही साड़ियों की मांग इतनी बढ़ गई कि दुकानों में स्टॉक ही खत्म हो जाता था।" उन्होंने यह भी साझा किया कि लोग उन्हें देखते ही 'तोहफा, तोहफा' चिल्लाने लगते थे, जिससे वह सोच में पड़ जाती थीं कि इतने सारे तोहफे कहां से लाए जाएं।
साउथ के निर्देशकों की विजुअल स्टाइल और बॉलीवुड में नया मोड़
शो में मौजूद अभिनेत्री मीनाक्षी शेषाद्रि ने भी उस दौर के सिनेमा और संगीत की भव्यता पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारतीय फिल्म निर्माताओं, विशेष रूप से मशहूर निर्देशक के. राघवेंद्र राव ने हिंदी सिनेमा को एक नया विजुअल नजरिया दिया। मीनाक्षी के अनुसार, 'प्यार का तोहफा' में पहनी गई खूबसूरत साड़ियां और उनका रंगों का चयन दक्षिण भारतीय निर्देशकों की रचनात्मक सोच और सौंदर्यबोध का बेहतरीन उदाहरण था। उन्होंने माना कि इन निर्देशकों ने बॉलीवुड में प्रस्तुतीकरण की एक नई और आकर्षक शैली की शुरुआत की, जिसने गानों के चित्रण का तरीका हमेशा के लिए बदल दिया।
बप्पी लहरी की धुन और किशोर-आशा की सुरीली आवाज
के. राघवेंद्र राव द्वारा निर्देशित फिल्म 'तोहफा' में जितेंद्र, जया प्रदा और श्रीदेवी की प्रसिद्ध त्रिकोणीय जोड़ी नजर आई थी। इस फिल्म का गाना 'प्यार का तोहफा तेरा बना है जीवन मेरा' अपने समय का सबसे बड़ा म्यूजिकल हिट साबित हुआ। संगीत निर्देशक बप्पी लहरी ने इसमें अपनी विशिष्ट ऊर्जावान धुन दी थी, जबकि महान गायक किशोर कुमार और आशा भोसले की युगल आवाज ने इसे अमर बना दिया। इस गाने के बोल और थिरकने पर मजबूर कर देने वाला संगीत उस दशक में हर उम्र के दर्शकों की जुबान पर चढ़ गया था, और आज चार दशक बीत जाने के बाद भी इसकी लोकप्रियता कायम है।



















