वाशिंग पाउडर के मात्र 20 ग्राम वजन ने हिन्दुस्तान यूनिलीवर जैसी बड़ी कंपनी को उपभोक्ता अदालत में ₹50,000 का हर्जाना भरने पर मजबूर कर दिया है। अदालत ने एक ग्राहक के पक्ष में फैसला सुनाया है, जिसने यह साबित कर दिया कि उसने ₹10 में सर्फ एक्सल ईजी वॉश का जो पैकेट खरीदा था, उसका असल वजन छपे हुए वजन से काफी कम था। यह मामला अनुचित व्यापारिक व्यवहार के खिलाफ ग्राहकों के अधिकारों की एक बड़ी जीत है।
ऐसे सामने आई वजन की कमी
इस पूरे मामले की शुरुआत सितंबर 2020 में उत्तराखंड के नैनीताल जिले में स्थित रामनगर से हुई थी। स्थानीय निवासी ज्ञान चंद गर्ग ने एक दुकानदार से ₹10 वाले सर्फ एक्सल ईजी वॉश के कई पाउच खरीदे थे। घर जाने के बाद उन्होंने एक बिल्कुल सीलबंद पैकेट को तौलने का फैसला किया।
पैकेट के ऊपर साफ अक्षरों में 90 ग्राम वजन लिखा हुआ था। हालांकि, जब उसे तौला गया तो उसके अंदर केवल 70 ग्राम पाउडर ही मौजूद था, यानी सीधे तौर पर 20 ग्राम की कमी थी। इस धोखाधड़ी का पता चलने के बाद, गर्ग ने निर्माता कंपनी और सप्लाई चेन में शामिल सभी पक्षों को कानूनी नोटिस भेज दिया। जब उन्हें अपनी शिकायत का कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो उन्होंने जिला उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया और औपचारिक शिकायत दर्ज करा दी।
कंपनी ने बचाव में दिए ये तर्क
कानूनी कार्यवाही के दौरान हिन्दुस्तान यूनिलीवर ने अपना बचाव करते हुए कई तरह की दलीलें पेश कीं। कंपनी ने कहा कि शिकायतकर्ता यह प्रमाणित करने में पूरी तरह से विफल रहा है कि वह उत्पाद असली था। उन्होंने तर्क दिया कि उस विशिष्ट क्षेत्र में नकली सामान भी भारी मात्रा में बेचा जाता है। कंपनी के अनुसार, उत्पाद की सत्यता जांचने के लिए बैच नंबर और पैकेजिंग की पूरी जानकारी होना अनिवार्य था।
निर्माता कंपनी ने यह भी दावा किया कि वजन और पैकिंग से जुड़े किसी भी विवाद की सुनवाई उपभोक्ता आयोग के बजाय विशेष रूप से लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट के तहत की जानी चाहिए। इसके अलावा, कंपनी ने इस बात पर जोर दिया कि ग्राहक ने किसी मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला से उत्पाद की जांच नहीं करवाई है। उन्होंने यह संभावना भी जताई कि भंडारण की स्थिति के कारण डिटर्जेंट के वजन में बदलाव देखने को मिल सकता है।
अदालत कक्ष में हुई पैकेट की जांच
इन तमाम दावों के बीच, सुनवाई के दौरान हिन्दुस्तान यूनिलीवर ने खुद ही उस पैकेट की जांच करवाने की मांग रखी। इसी वजह से दिसंबर 2022 में शिकायतकर्ता उस सीलबंद पाउच को सीधा जिला उपभोक्ता आयोग के सामने ले आए।
वहां मौजूद सभी पक्षों के वकीलों के सामने एक इलेक्ट्रॉनिक किचन मशीन से उस पैकेट का वजन किया गया। मशीन पर वजन बिल्कुल 70 ग्राम ही निकला। इस प्रक्रिया की सबसे अहम बात यह रही कि उस समय हिन्दुस्तान यूनिलीवर के वकीलों ने न तो वजन करने की मशीन और तरीके पर कोई आपत्ति जताई, और न ही उस नतीजे पर कोई सवाल खड़ा किया। इस वजह से कंपनी बाद में भी इस जांच को अलग से चुनौती देने की स्थिति में नहीं रही।
राज्य आयोग ने भी बरकरार रखा फैसला
जिला आयोग के बाद यह मामला राज्य उपभोक्ता आयोग की चौखट तक भी पहुंचा। उच्च प्राधिकरण ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह पूरी तरह साबित हो चुका है कि ग्राहक को जानबूझकर कम वजन वाला उत्पाद बेचा गया था। आयोग ने इसे सीधे तौर पर उपभोक्ता के साथ अनुचित व्यापारिक व्यवहार का मामला माना और कहा कि जिला आयोग द्वारा लिया गया फैसला बिल्कुल सही था।
राज्य आयोग ने अधिकार क्षेत्र को लेकर भी स्थिति साफ कर दी। उन्होंने कहा कि उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत मिलने वाले अधिकार बिल्कुल अलग और स्वतंत्र हैं। महज़ इस आधार पर कि कोई मामला उत्पाद के वजन से जुड़ा है, उपभोक्ता आयोग को उसकी सुनवाई करने से रोका नहीं जा सकता है।
ग्राहक को मिलने वाली अंतिम रकम
अपील की प्रक्रिया के दौरान आर्थिक दंड की राशि में थोड़ा संशोधन किया गया। जिला आयोग ने अपने शुरुआती फैसले में ग्राहक को ₹50,000 का मुआवजा और ₹10,000 मुकदमे के खर्च के तौर पर देने का आदेश दिया था। इसके साथ ही हिन्दुस्तान यूनिलीवर पर अलग से ₹50,000 का जुर्माना भी लगाया गया था और ग्राहक को केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) जाने की सलाह भी दी गई थी।
हालांकि, राज्य आयोग ने इस आदेश में कुछ बदलाव किए। आयोग ने मुकदमे के खर्च के ₹10,000 बरकरार रखे, लेकिन मुआवजे की रकम को घटाकर ₹40,000 कर दिया। इसके अलावा, कंपनी पर अलग से लगाए गए ₹50,000 के जुर्माने को पूरी तरह से हटा दिया गया और CCPA वाले निर्देश को भी रद्द कर दिया गया। इन सब बदलावों के बाद, अब कंपनी को उस ग्राहक को कुल मिलाकर ₹50,000 का अंतिम भुगतान करना होगा।



















