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आजमगढ़ मॉडल से 75 दिनों में करें फूलगोभी की उन्नत खेती, एक ही सीजन में होगी लाखों की बंपर कमाईव्यापार
28 अग॰ 2026, 9:19 am (1 घंटे पहले)· 2

आजमगढ़ मॉडल से 75 दिनों में करें फूलगोभी की उन्नत खेती, एक ही सीजन में होगी लाखों की बंपर कमाई

वैज्ञानिक तरीकों और उन्नत किस्मों जैसे पूसा दीपावली और पूसा कार्तिक का उपयोग करके किसान मात्र 70 से 75 दिनों में फूलगोभी की बंपर पैदावार हासिल कर सकते हैं। सही मिट्टी, बीज उपचार और रोपाई के नियमों का पालन कर एक ही सीजन में लाखों का मुनाफा कमाया जा सकता है।

भारतीय कृषि परिदृश्य में अब एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। देश भर में किसान पारंपरिक खाद्यान्न फसलों से आगे बढ़कर ऐसी नकदी फसलों को तरजीह दे रहे हैं, जिनमें कम समय, सीमित लागत और न्यूनतम श्रम के बावजूद बंपर उत्पादन प्राप्त किया जा सके। इस आधुनिक परिवर्तन की मुख्य वजह खेती में वैज्ञानिक तौर-तरीकों का बढ़ता प्रयोग है। सब्जी की व्यावसायिक खेती करने वाले कृषकों के लिए फूलगोभी की उन्नत तकनीक से खेती करना एक बेहद लाभकारी विकल्प बनकर उभरा है। वैज्ञानिक विधि से तैयार की गई हाइब्रिड किस्मों के जरिए किसान महज एक ही सीजन में लाखों रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं।

उन्नत हाइब्रिड किस्में और 75 दिनों में बंपर मुनाफा

फूलगोभी की खेती का सबसे बड़ा आकर्षण इसका कम समय में तैयार होना है। कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित आधुनिक किस्मों की सही समय पर रोपाई करके किसान महज 70 से 75 दिनों के भीतर अपनी पूरी फसल को बाजार में बेच सकते हैं। इतने कम समय में लागत वसूल होने के साथ ही बेहतर मुनाफा भी हासिल हो जाता है। इसके लिए सही बीज का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

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बाजार में पूसा दीपावली और पूसा कार्तिक जैसी उच्च पैदावार देने वाली हाइब्रिड किस्में उपलब्ध हैं। इन उन्नत बीजों की खासियत यह है कि इनसे मिलने वाले फूलगोभी के गट्टे काफी ठोस, बड़े और वजनदार होते हैं। यही कारण है कि स्थानीय सब्जी मंडियों और बड़े शहरों के बाजारों में इन किस्मों की मांग हमेशा बहुत ज्यादा बनी रहती है। जब उत्पाद ठोस और आकर्षक होता है, तो किसानों को मंडियों में इसके बेहतर दाम भी मिलते हैं।

खेत की तैयारी, बलुई दोमट मिट्टी और जल निकासी

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले में सब्जी की व्यावसायिक खेती से जुड़े किसान मनोहर सिंह का मानना है कि केवल अच्छे बीज ही नहीं, बल्कि फसल के अनुकूल वातावरण तैयार करना भी बेहद जरूरी है। उनका कहना है कि खेत की तैयारी के समय किसानों को भूमि में जल निकासी का पुख्ता प्रबंध करना चाहिए, ताकि जलजमाव के कारण पौधे खराब न हों।

फूलगोभी की फसल के लिए बलुई दोमट मिट्टी को सबसे उपयुक्त और आदर्श माना गया है। खेत की मिट्टी का पीएच मान हमेशा 5.5 से 6.6 के मध्य होना चाहिए। यदि मिट्टी अत्यधिक अम्लीय या क्षारीय है, तो पौधों का विकास प्रभावित हो सकता है। रोपाई से पहले खेत की जुताई करके मिट्टी को पूरी तरह भुरभुरा बना लेना चाहिए।

नर्सरी प्रबंधन, सड़ी गोबर खाद और फफूंदनाशक उपचार

खेत में मुख्य रोपाई से पहले सही तरीके से नर्सरी तैयार करना इस पूरी प्रक्रिया की प्राथमिक और अति आवश्यक कड़ी है। नर्सरी की क्यारियों में बीज बोने से ठीक पहले मिट्टी को भुरभुरा बनाकर उसमें सड़ी हुई गोबर की जैविक खाद को समान रूप से छिड़कना चाहिए। सड़ी गोबर खाद पौधों के शुरुआती विकास को मजबूती प्रदान करती है।

इसके साथ ही, बीजों को बोने से पूर्व उनका फफूंदनाशक दवाओं से उपचारित करना अनिवार्य है। किसान इसके लिए कार्बेंडाजिम या किसी अन्य प्रामाणिक फफूंदनाशक का उपयोग कर सकते हैं। अधिक नमी की स्थिति में पौधों में फफूंद लगने का खतरा काफी बढ़ जाता है। कार्बेंडाजिम से उपचारित किए गए बीजों में रोपाई के बाद भी फफूंद जनित रोगों का असर न्यूनतम हो जाता है, जिससे फसल पूरी तरह सुरक्षित रहती है और किसानों की मेहनत तथा लागत व्यर्थ नहीं जाती।

रोपाई की सटीक दूरी, शाम का समय और तत्काल सिंचाई

नर्सरी से पौध तैयार होने के बाद जब उसे मुख्य खेत में लगाया जाता है, तब दूरी के नियमों का कड़ाई से पालन होना चाहिए। रोपाई करते समय कतार से कतार की दूरी लगभग 45 से 60 सेंटीमीटर रखी जानी चाहिए, जबकि पौधे से पौधे के बीच की दूरी लगभग 45 सेंटीमीटर होनी चाहिए। यह दूरी पौधों को पर्याप्त हवा, धूप और फैलने का स्थान देती है।

पौधों को खेत में लगाने के समय पर ध्यान देना भी बहुत महत्वपूर्ण है। किसानों को रोपाई का कार्य हमेशा शाम के समय ही करना चाहिए। दिन की तेज धूप और गर्मी में रोपे गए पौधे मुरझा सकते हैं, जबकि शाम के ठंडे वातावरण में पौधे आसानी से सेट हो जाते हैं। रोपाई पूरी होते ही खेत में हल्की सिंचाई कर देनी चाहिए। यह हल्की सिंचाई पौधों की जड़ों को जमीन के साथ मजबूती से पकड़ बनाने में तत्काल सहायता करती है।

सवाल-जवाब

फूलगोभी की फसल कितने दिनों में बिक्री के लिए तैयार हो जाती है?
कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित उन्नत किस्मों की रोपाई के बाद फूलगोभी 70 से 75 दिनों के भीतर कटाई और बिक्री के लिए तैयार हो जाती है।
फूलगोभी की बेहतर पैदावार के लिए कौन सी उन्नत किस्में सबसे अच्छी मानी जाती हैं?
पूसा दीपावली और पूसा कार्तिक जैसी हाइब्रिड किस्में काफी लोकप्रिय हैं, क्योंकि इनके फूल ठोस, बड़े और वजनदार होते हैं जिनकी मंडी में भारी मांग रहती है।
फूलगोभी की खेती के लिए किस प्रकार की मिट्टी और पीएच (pH) मान उपयुक्त है?
फूलगोभी की खेती के लिए बलुई दोमट मिट्टी सबसे उत्तम मानी जाती है और मिट्टी का पीएच मान 5.5 से 6.6 के बीच होना चाहिए।
बीजों को फफूंद से बचाने के लिए किस दवा का इस्तेमाल करना चाहिए?
बुवाई से पहले बीजों को कार्बेंडाजिम या अन्य फफूंदनाशक दवाओं से उपचारित करना चाहिए ताकि नमी के कारण लगने वाले रोगों से बचाव हो सके।
रोपाई करते समय पौधों और कतारों के बीच कितनी दूरी रखनी चाहिए?
रोपाई के समय कतार से कतार की दूरी 45 से 60 सेंटीमीटर और पौधे से पौधे के बीच की दूरी लगभग 45 सेंटीमीटर रखनी चाहिए।
फूलगोभी के पौधों की रोपाई किस समय करना सबसे फायदेमंद होता है?
पौधों की रोपाई हमेशा शाम के समय करनी चाहिए और रोपाई के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करनी चाहिए ताकि जड़ें जमीन में मजबूत पकड़ बना सकें।
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