आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दौड़ में बड़े पैमाने पर बनाए जा रहे डेटा सेंटरों को लेकर बढ़ती जन आपत्तियों के बीच अमेज़न ने अपनी रणनीति में अहम बदलाव किया है। कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मैट गारमन ने शुक्रवार को एक ब्लॉग पोस्ट में डेटा सेंटरों को लेकर उठाए जा रहे नए कदमों की जानकारी दी। कंपनी अब डेटा सेंटर परियोजनाओं के लिए नॉन-डिस्क्लोज़र एग्रीमेंट्स यानी एनडीए के उपयोग को पूरी तरह बंद कर रही है। इसके साथ ही, अमेज़न ने अगले पांच वर्षों के दौरान उन क्षेत्रों में 1 अरब डॉलर की भारी भरकम राशि निवेश करने का संकल्प लिया है जहां उसकी ये बुनियादी ढांचा इकाइयां मौजूद हैं। यह पैसा स्थानीय फ्री कम्युनिटी कॉलेज कार्यक्रमों, कार्यबल प्रशिक्षण पहलों और स्कूलों, घरों व सामुदायिक भवनों में ऊर्जा दक्षता बढ़ाने के उपायों पर खर्च किया जाएगा।
एआई रेस और डेटा सेंटरों पर रोक का संकट
मैट गारमन ने इस बात को स्वीकार किया कि पूरे देश में डेटा सेंटरों के खिलाफ उठ रहा तीखा विरोध एआई विस्तार की गति को धीमा कर रहा है। उन्होंने अपने बयान में आगाह करते हुए लिखा कि इस समय देश भर में डेटा सेंटरों पर 100 से अधिक रोक संबंधी प्रस्तावों यानी मोराटोरियम पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर ये सख्त पाबंदियां लागू हो जाती हैं, तो अमेरिका एआई की इस वैश्विक रेस में पिछड़ सकता है, जिसका खामियाजा आने वाली कई पीढ़ियों को भुगतना पड़ेगा। गारमन के अनुसार, देश के तौर पर अमेरिका ऐसी प्रतिकूल स्थिति में पहुंचने का जोखिम बिल्कुल नहीं उठा सकता।
गोपनीयता के समझौते और स्थानीय स्तर पर बढ़ता आक्रोश
हाल के समय में विशालकाय डेटा सेंटरों के निर्माण को लेकर नॉन-डिस्क्लोज़र एग्रीमेंट्स विवाद की मुख्य वजह बन चुके हैं। सामान्य प्रक्रिया के तहत जब कोई तकनीकी कंपनी किसी इलाके में प्रोजेक्ट लगाना चाहती है, तो स्थानीय अधिकारियों से एनडीए पर हस्ताक्षर करा लिए जाते हैं। इन समझौतों की वजह से स्थानीय प्रतिनिधि आम जनता के साथ आवश्यक जानकारियां साझा करने में असमर्थ हो जाते हैं। इन जानकारियों में यह तक शामिल होता है कि प्रस्तावित प्रोजेक्ट कितनी बिजली और पानी की खपत करेगा। कई मामलों में तो एनडीए स्थानीय अधिकारियों को यह बताने से भी रोकते हैं कि निर्माण के पीछे वास्तव में कौन सी टेक कंपनी काम कर रही है। लुइसियाना में हाइपरियन नाम के एक अत्यंत विशाल डेटा सेंटर की योजना को तैयार करने में भी सरकारी स्तरों पर ऐसे ही गुप्त दस्तावेजों ने मुख्य भूमिका निभाई थी।
राज्यों और संसद में कानूनी सख्ती
इस तरह की गोपनीय कागजी कार्यप्रणालियों पर लगाम कसने के लिए हाल के दिनों में स्थानीय स्तर पर नियमों में तेजी से बदलाव आया है। पेंसिल्वेनिया के गवर्नर जोश शापिरो, मैसाचुसेट्स की गवर्नर मॉरा हीली और डेलावेयर के गवर्नर मैट मेयर ने हालिया कार्यकारी आदेशों के जरिए डेटा सेंटर एनडीए पर कड़ा रुख अपनाया है। इसके अलावा न्यूयॉर्क, न्यू जर्सी, इंडियाना और ओहायो सहित कई राज्यों ने इस गुप्त प्रथा पर प्रतिबंध लगाने वाले कानूनों पर विचार किया है।
राष्ट्रीय स्तर पर भी दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के सांसदों के एक समूह ने अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में नो सीक्रेट्स फॉर डेटा सेंटर्स एक्ट पेश किया। इस विधेयक के प्रायोजकों में शामिल प्रतिनिधि जेमी रस्किन (डी-एमडी) ने अमेज़न, गूगल, मेटा और ओरेकल को पत्र लिखकर डेटा सेंटर एनडीए के इस्तेमाल पर जवाब तलब किया था। इसके बाद यह स्पष्ट किया गया कि अमेज़न अब एनडीए का सहारा नहीं ले रहा है, जबकि अन्य प्रमुख कंपनियों ने इस विषय पर अपनी प्रतिक्रिया नहीं दी।
विवादों के केंद्र में अमेज़न की पिछली परियोजनाएं
अमेज़न स्वयं भी एनडीए को लेकर कई बड़े विवादों में घिर चुका है। एरिज़ोना के टक्सन में एक सार्वजनिक रिकॉर्ड अनुरोध के जरिए पिछले साल यह उजागर हुआ था कि विवादित डेटा सेंटर का अंतिम किरायेदार अमेज़न था। वहां काउंटी अधिकारियों पर एनडीए के कारण वास्तविक कंपनी की पहचान छिपाने की बाध्यता थी, हालांकि अमेज़न अब उस प्रोजेक्ट से बाहर निकल चुका है। वहीं इंडियाना के साउथ बेंड में, जहां कंपनी ने 13 अरब डॉलर से अधिक का विशाल डेटा सेंटर परिसर तैयार करने का निवेश किया है, कुछ निर्वाचित अधिकारियों ने दावा किया था कि एनडीए की शर्तों के चलते स्थानीय सरकारी कर्मचारी जनता के सवालों का जवाब देने में लाचार रहे।
डेटा सेंटर निर्माण और वित्तपोषण की जटिल संरचना के कारण मुख्य कंपनियां कई बार सरकारी अधिकारियों से सीधे संपर्क नहीं करतीं। टेक्सास के व्हार्टन काउंटी में एक वरिष्ठ अधिकारी ने अमेज़न के साथ नहीं, बल्कि उसके ठेकेदार विज़नफर्स्ट एडवाइजर्स के साथ एनडीए पर दस्तखत किए थे, जिसके चलते वह अमेज़न प्रोजेक्ट का ब्यौरा सार्वजनिक नहीं कर सके थे। हालांकि ठेकेदारों पर भी यह नई नीति लागू होगी या नहीं, इस पर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
गलत सूचनाओं के आरोप और वैश्विक प्रतिस्पर्धा
मैट गारमन ने अपने आलेख में डेटा सेंटरों के पानी व बिजली उपयोग, डीज़ल जनरेटरों के इस्तेमाल और स्थानीय समुदायों पर पड़ने वाले असर को लेकर फैली बातों को भ्रामक सूचनाएं और सरासर झूठ करार दिया। उन्होंने लिखा कि यह बुनियादी ढांचा भू-राजनीतिक दृष्टि से इतना संवेदनशील और महत्वपूर्ण है कि कई देश जानबूझकर अमेरिका में डेटा सेंटरों को लेकर गलत सूचनाएं फैला रहे हैं ताकि देश के तकनीकी विकास की गति को धीमा किया जा सके। व्हाइट हाउस और तकनीकी उद्योग के कई नेता भी यह तर्क देते रहे हैं कि चीन डेटा सेंटरों के खिलाफ असंतोष और भ्रामक जानकारियों को बढ़ावा दे रहा है, हालांकि कई विशेषज्ञों का मानना है कि इस दावे को जरूरत से ज्यादा बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है और इसके पुख्ता प्रमाण बेहद सीमित हैं।

















