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अमेठी में पैगा ड्रेन की सफाई न होने से डूबी फसलें, किसानों पर टूटा मुसीबतों का पहाड़व्यापार
24 अग॰ 2026, 2:15 pm (2 घंटे पहले)· 1

अमेठी में पैगा ड्रेन की सफाई न होने से डूबी फसलें, किसानों पर टूटा मुसीबतों का पहाड़

अमेठी के अत्तानगर गांव में पैगा ड्रेन की सफाई न होने के कारण भारी जलजमाव हो गया है, जिससे किसानों की सैकड़ों बीघा फसलें बर्बाद हो रही हैं। प्रशासन की लापरवाही से नाराज किसानों ने अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों पर अनदेखी का गंभीर आरोप लगाया है।

देश का पेट भरने वाले अन्नदाता को अक्सर संकट के समय अकेला छोड़ दिया जाता है। अमेठी जिले के एक सुदूर गांव की कहानी भी कुछ ऐसी ही बयां होती है, जहां किसानों की सालभर की मेहनत और उम्मीदें पानी में डूब जाती हैं। खेतों में लहलहाती फसलें किसी प्राकृतिक आपदा की वजह से नहीं, बल्कि एक नाले की अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही के चलते बर्बाद हो रही हैं। किसानों की यह दास्तान सिस्टम की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान लगाती है, जहां बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।

यह पूरा मामला अमेठी जिले के गौरीगंज तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अत्तानगर गांव का है। यहां पैगा ड्रेन की बदहाली ने किसानों की नींद उड़ा दी है। हालात यह हैं कि खेतों में भारी जलजमाव के कारण फसलें पूरी तरह पानी में डूबी हुई नजर आती हैं। स्थानीय किसान लगातार प्रशासनिक अधिकारियों और नुमाइंदों के सामने गुहार लगाते रहते हैं कि बरसात या जलभराव के मौसम से पहले इस ड्रेन की ठीक से सफाई करा दी जाए, लेकिन धरातल पर स्थिति जस की तस बनी रहती है। कागजों पर सफाई के दावे तो बड़े-बड़े किए जाते हैं, लेकिन जब ड्रेन उफनती है तो उसका सारा पानी किसानों के खेतों में भर जाता है, जिससे उनकी कड़ी मेहनत पलभर में चौपट हो जाती है।

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समस्या समाधान के बजाय सिर्फ कागजों तक सीमित कागजी कार्रवाई

जमीनी हकीकत जानने के लिए जब इस इलाके का जायजा लिया गया तो किसानों का गुस्सा खुलकर सामने आया। अन्नदाताओं ने अपना दर्द बयां करते हुए बताया कि अधिकारी और जनप्रतिनिधि केवल वादे करते हैं, लेकिन मुसीबत के वक्त कोई भी झांकने तक नहीं आता। किसान हिमांशु सिंह ने अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि हर साल उनकी फसलें पानी में डूब जाती हैं, लेकिन न तो कोई अधिकारी सुध लेने आता है और न ही कोई नेता। किसानों की आंखों के सामने उनकी मेहनत बर्बाद हो जाती है। हर बार इस ड्रेन की सफाई के नाम पर लाखों रुपये का बजट आवंटित होता होगा, लेकिन कभी भी जमीनी स्तर पर साफ-सफाई का काम नहीं होता। फसल को बचाने के लिए किसानों को अपनी जेब से अतिरिक्त पैसा खर्च करना पड़ता है, लेकिन लागत के मुकाबले उतनी आमदनी नहीं हो पाती। हर साल इस लापरवाही की वजह से सैकड़ों बीघा फसल बर्बाद हो जाती है।

किसानों का छलका दर्द, नेताओं और अधिकारियों पर लगाए गंभीर आरोप

अत्तानगर गांव के एक अन्य किसान हिटलर कुमार ने बताया कि उनकी खुद की तीन से चार बीघे फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। खेतों में पानी भर जाने की वजह से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन किसी भी बड़े अधिकारी या नेता को किसानों के इस नुकसान से कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने अफसोस जताया कि देश का पेट भरने वाले किसानों की फिक्र करने वाला कोई नहीं बचा है। अगर समय-समय पर इस ड्रेन की कायदे से सफाई कराई जाती, तो जलजमाव की ऐसी गंभीर समस्या कभी पैदा ही न होती और किसानों को इस तरह की तबाही का सामना न करना पड़ता।

जल निकासी के पुख्ता इंतजाम न होने से हर साल भुगतना पड़ रहा है खामियाजा

किसान शारदा प्रसाद ने ड्रेन की बदहाली पर बात करते हुए कहा कि इस नाले की लंबे समय से कोई सुध नहीं ली गई है। उन्होंने मांग की कि ड्रेन की कम से कम 30 मीटर तक कायदे से खुदाई और चौड़ाई कराई जानी चाहिए, तभी जाकर किसानों की फसलें सुरक्षित बच पाएंगी और पानी की सुचारू निकासी हो सकेगी। समय पर सफाई न होने का खामियाजा हमेशा क्षेत्र के किसानों को ही भुगतना पड़ता है। प्रशासनिक सुस्ती का यह आलम है कि आज तक कोई भी जिम्मेदार अधिकारी किसानों का दर्द बांटने या हालात का जायजा लेने के लिए मौके पर नहीं पहुंचा है।

सवाल-जवाब

अमेठी के किस गांव में फसलें बर्बाद हुई हैं?
अमेठी जिले के गौरीगंज तहसील क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अत्तानगर गांव में फसलें बर्बाद हुई हैं।
फसलें किस वजह से बर्बाद हो रही हैं?
पैगा ड्रेन की समय पर सफाई न होने के कारण हुए भारी जलजमाव की वजह से फसलें बर्बाद हो रही हैं।
इस समस्या से स्थानीय किसानों पर क्या असर पड़ा है?
हर साल सैकड़ों बीघा फसल डूबने से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है और उन्हें अपनी फसल बचाने के लिए अतिरिक्त खर्च करना पड़ता है।
किसानों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बारे में क्या शिकायत की है?
किसानों का आरोप है कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद कोई भी अधिकारी या नेता उनकी सुध लेने और जमीनी हालात देखने नहीं आता है।
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