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बहराइच की माया देवी का जैविक धान फॉर्मूला: 20 बीघा में 10-15 हजार लगाकर डेढ़ लाख की शुद्ध कमाईव्यापार
14 जून 2026, 6:11 pm (135 दिन पहले)· 10

बहराइच की माया देवी का जैविक धान फॉर्मूला: 20 बीघा में 10-15 हजार लगाकर डेढ़ लाख की शुद्ध कमाई

बहराइच के कटरा बहादुरगंज की महिला किसान माया देवी बिना यूरिया और DAP के, घर पर बनी गोबर की खाद और प्राकृतिक पौध रक्षकों से जैविक धान उगाकर मामूली लागत में लाखों का मुनाफा कमा रही हैं।

एक ओर खाद-बीज और दवाइयों के बढ़ते दाम किसानों की कमर तोड़ रहे हैं, वहीं बहराइच की एक महिला किसान ने इसका तोड़ खुद की मेहनत और जैविक तरीके में ढूंढ निकाला है। कटरा बहादुरगंज नाम के छोटे से गांव की रहने वाली माया देवी आज इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई हैं, क्योंकि उन्होंने यह साबित कर दिया है कि खेती घाटे का सौदा नहीं, बल्कि कमाई का मजबूत जरिया भी हो सकती है।

लागत न के बराबर, मुनाफा लाखों में

माया देवी का दावा है कि अगर धान की खेती पूरी तरह जैविक विधि से की जाए तो उस पर खर्च लगभग ना के बराबर आता है, जबकि कमाई का आंकड़ा सीधे लाखों में पहुंच जाता है। उनके पास कुल 20 बीघा खेत है और धान का सीजन शुरू होते ही वह इसी रकबे में फसल लगा देती हैं। पूरी खेती में उनका कुल खर्च सिर्फ 10 से 15 हजार रुपये के बीच बैठता है। इसके बावजूद सारी लागत निकालने के बाद उन्हें डेढ़ लाख रुपये तक का शुद्ध मुनाफा बड़ी आसानी से हो जाता है। यही वजह है कि वह पिछले कई वर्षों से लगातार बड़े पैमाने पर इसी तरीके से धान उगा रही हैं।

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न यूरिया, न DAP — घर की खाद ही असली ताकत

माया देवी बताती हैं कि धान उगाने वाले ज्यादातर किसान महंगी खाद और कीटनाशकों के खर्च से परेशान रहते हैं, लेकिन उनके सामने यह दिक्कत आती ही नहीं। अपनी कामयाबी की वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि वह अपने खेतों में बाहर से न तो यूरिया लाकर डालती हैं और न ही किसी तरह का केमिकल वाला पेस्टिसाइड इस्तेमाल करती हैं। इसकी जगह वह अपने घर पर ही गोबर की खाद और प्राकृतिक पौध रक्षक खुद तैयार कर लेती हैं। उनके मुताबिक इस देसी तरीके से न सिर्फ पौधों की बढ़त बेहतरीन होती है, बल्कि बाजार की महंगी दवाइयों पर होने वाला पूरा खर्च भी बच जाता है।

दूसरे किसानों के लिए नसीहत

सिर्फ धान ही नहीं, माया देवी मक्का और साग-सब्जी की खेती में भी महारत रखती हैं और अपने बेहतर कृषि कार्यों के लिए उन्हें कई बार सम्मानित किया जा चुका है। उनका मानना है कि अगर बाकी किसान भाई भी इसी जैविक विधि को अपना लें तो वे न केवल खेती की लागत को काफी हद तक घटा सकते हैं, बल्कि अपने मुनाफे को कई गुना तक बढ़ा सकते हैं।

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