बारिश के मौसम में अमरूद की बागवानी करने वाले किसानों के सामने हर साल एक जैसी मुसीबत खड़ी हो जाती है, ऊपर से पूरी तरह पका दिखने वाला फल अंदर से खोखला, चिपचिपा और सड़ा हुआ निकलता है. शाहजहांपुर के फसल सुरक्षा वैज्ञानिक डॉ. हादी हुसैन खान के मुताबिक इसके पीछे दो कीट जिम्मेदार हैं, फल मक्खी और फल बेधक, और बरसात शुरू होते ही इनका हमला तेज हो जाता है. समस्या यह है कि शुरुआत में यह नुकसान आसानी से पकड़ में नहीं आता, और जब तक किसान को पता चलता है, तब तक फसल का बड़ा हिस्सा खराब हो चुका होता है.
फल मक्खी कैसे अमरूद को अंदर से खोखला कर देती है
डॉ. हादी हुसैन बताते हैं कि फल मक्खी की मादा अमरूद के पिछले हिस्से की पतली परत को छेदकर उसके ठीक नीचे अंडे दे देती है. यह छेद इतना बारीक होता है कि बाहर से देखने पर आसानी से नजर नहीं आता. कुछ ही दिनों में इन अंडों से लार्वा निकल आते हैं और फल के गूदे को अंदर से खाना शुरू कर देते हैं. जैसे-जैसे लार्वा बढ़ते हैं, फल भीतर से पूरी तरह खोखला होता चला जाता है, जबकि बाहर से फल कुछ समय तक सामान्य ही दिखता रहता है. जब तक फल नरम पड़ना और बदबू देना शुरू करता है, तब तक अंदर का गूदा पूरी तरह बर्बाद हो चुका होता है. इस स्थिति में फल पूरी तरह लसलसा और सड़ा हुआ हो जाता है, जिससे उसकी बाजार कीमत एकदम धड़ाम से गिर जाती है.
गिरते भाव और रद्द होते निर्यात के ऑर्डर
यह नुकसान सिर्फ स्थानीय मंडी तक सीमित नहीं रहता. जब ऐसा संक्रमित अमरूद निर्यात की खेप में शामिल हो जाता है, तो अंतरराष्ट्रीय क्वारंटाइन नियमों के तहत पूरी कंसाइनमेंट को मौके पर ही रद्द कर दिया जाता है. जिस किसान का माल निर्यात के लिए चुना गया हो, उसके लिए यह झटका और भी बड़ा होता है, क्योंकि जांच में पकड़ी गई खेप को छांटकर दोबारा बेचना मुमकिन नहीं होता और पूरी खेप का नुकसान एक साथ उठाना पड़ता है. इस तरह फल मक्खी सिर्फ फसल ही नहीं, बल्कि किसान की सालभर की मेहनत और मुनाफे पर भी सीधी चोट करती है.
फल बेधक कीट फल में छेद कर बुरादा छोड़ देता है
फल मक्खी के अलावा डॉ. हादी हुसैन बरसात के मौसम में अमरूद के बागानों के लिए फल बेधक कीट को भी बड़ा खतरा बताते हैं. यह कीट सीधे फल के अंदर छेद कर देता है, और चूंकि यह छेद भी काफी छोटा होता है, इसलिए ज्यादातर किसानों को इसका पता फल के आसपास बिखरे लकड़ी के बुरादे जैसे पदार्थ से ही चलता है. फल मक्खी की तरह यह कीट भी फल की अंदरूनी और बाहरी दोनों गुणवत्ता को बुरी तरह बिगाड़ देता है, जिससे फल बिकने लायक नहीं रह जाता. अगर समय रहते इसका इलाज नहीं किया गया, तो यह कीट कुछ पौधों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरे बागान की फसल को अपनी चपेट में ले सकता है और मुनाफे का पूरा मौसम नुकसान में बदल सकता है.
ट्रैप और छिड़काव से कैसे बचेगी फसल
डॉ. हादी हुसैन के मुताबिक फल मक्खी पर काबू पाने के लिए किसानों को अपने बागानों में मिथाइल यूजेनॉल ट्रैप या ल्यूर वाले फेरोमोन ट्रैप लगाने चाहिए, जो फल में अंडे देने से पहले ही मक्खियों को अपनी ओर खींच लेते हैं. फल बेधक कीट के लिए वे प्रभावित हिस्सों में इमामेक्टिन बेंजोएट के छिड़काव की सलाह देते हैं, ताकि संक्रमण फैलने से पहले ही रुक जाए. उनका कहना है कि बरसात के शुरुआती दौर में ही इन दोनों उपायों को अपना लेने से नतीजा सबसे बेहतर मिलता है. इन दोनों वैज्ञानिक तरीकों को साथ अपनाने से दोनों कीटों पर काबू पाया जा सकता है, बरसात के मौसम में फसल सुरक्षित रह सकती है और किसानों का वह मुनाफा बच सकता है, जो सड़े हुए फल, रद्द होते निर्यात ऑर्डर और गिरते बाजार भाव की वजह से हर साल गंवाना पड़ता है.

















