बिहार के भोजपुर जिले के बबुरा गांव के रहने वाले युवा किसान राहुल सिंह ने यह साबित कर दिखाया है कि यदि सोच में नयापन हो और कड़ी मेहनत करने का पक्का इरादा हो, तो कृषि और पशुपालन के क्षेत्र को भी एक बड़े और मुनाफे वाले कारोबार में बदला जा सकता है। वर्तमान में वे प्रतिदिन लगभग 200 लीटर दूध की बिक्री कर रहे हैं और डेयरी के इस पुश्तैनी या स्थापित व्यवसाय के साथ-साथ अब बटन मशरूम की खेती को अपनाकर अपनी आमदनी को एक नई ऊंचाई प्रदान कर रहे हैं। उनकी यह अनूठी पहल न केवल उनके अपने जीवन में बदलाव ला रही है, बल्कि आसपास के तमाम ग्रामीण इलाकों के किसानों और युवाओं के लिए भी एक बेहतरीन मिसाल बनती जा रही है।
डेयरी व्यवसाय के साथ मशरूम खेती की शुरुआत
राहुल सिंह का डेयरी का कारोबार पहले से ही सुचारू रूप से चल रहा था, लेकिन वे अपनी आय के स्रोतों को और अधिक मजबूत करना चाहते थे ताकि किसी भी प्रकार की वित्तीय अनिश्चितता से बचा जा सके। इसी उद्देश्य के साथ उन्होंने कृषि में विविधता लाते हुए बटन मशरूम की खेती करने का एक ठोस फैसला किया। आधुनिक तकनीक और पूरी तरह से वैज्ञानिक तौर-तरीकों का पालन करते हुए उन्होंने शुरुआत में लगभग 400 बैग की मदद से मशरूम का उत्पादन करना आरंभ किया। कम जगह की आवश्यकता, कम समय में तैयार होने वाली फसल और उचित प्रबंधन के दम पर उन्हें इस नए प्रयोग में शानदार उत्पादन हासिल हो रहा है, जिससे उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ गया है।
मुनाफा और सरकारी सब्सिडी के साथ विस्तार की योजना
राहुल के अनुभवों के अनुसार, बटन मशरूम की खेती में लगभग 50 प्रतिशत तक का शुद्ध मुनाफा प्राप्त हो जाता है। स्थानीय और आसपास के बाजारों में इस प्रकार के मशरूम की मांग हमेशा बनी रहती है, जिसकी वजह से उत्पादित माल को बेचने में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं होती और फसल आसानी से खप जाती है। इसी शानदार मुनाफे को देखते हुए अब उन्होंने इस व्यवसाय को और अधिक बड़े स्तर पर संचालित करने की रूपरेखा तैयार कर ली है। सरकारी सब्सिडी योजनाओं का पूरा लाभ उठाते हुए राहुल बहुत जल्द अपने इस कृषि उद्यम को विस्तार देंगे और करीब 4,000 बैग के साथ बड़े पैमाने पर मशरूम का व्यावसायिक उत्पादन शुरू करेंगे।
पारंपरिक खेती से हटकर नए कृषि उद्यमों की ओर रुझान
इस युवा किसान का यह स्पष्ट मानना है कि खेती को केवल पुराने और पारंपरिक तौर-तरीकों तक ही सीमित रखकर नहीं रखा जा सकता, बल्कि आज के समय की मांग है कि आधुनिक तकनीकों और नए व्यावसायिक विकल्पों को खुले मन से अपनाया जाए। उनका डेयरी और मशरूम उत्पादन का यह मिलाजुला मॉडल ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि करने का एक बेहद सशक्त माध्यम साबित हो सकता है। वे यह भी चाहते हैं कि गांवों के अधिक से अधिक युवा रोजगार की तलाश में बड़े शहरों की तरफ भटकने के बजाय कृषि आधारित व्यवसायों और उद्यमों की दिशा में आगे कदम बढ़ाएं ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था मजबूत हो सके।
सफल कृषि-उद्यमी के रूप में उभरती पहचान
आज के समय में राहुल सिंह केवल एक साधारण डेयरी संचालक के रूप में ही नहीं जाने जाते, बल्कि वे एक सफल किसान-उद्यमी के रूप में अपनी एक विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहे हैं। उनकी यह प्रेरणादायक सफलता यह कड़ा संदेश देती है कि यदि सही कार्ययोजना, अटूट मेहनत और आधुनिक सोच का साथ हो, तो महानगरों में जाने के बजाय अपने गांव में ही रहकर भी बेहतरीन आजीविका कमाई जा सकती है। भोजपुर के बबुरा गांव से सामने आई यह कहानी उन तमाम युवाओं के लिए एक मजबूत प्रेरणा का स्रोत है जो कृषि और पशुपालन के सेक्टर में अपना भविष्य संवारने के इच्छुक हैं।



















