राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (दिल्ली-एनसीआर) के प्रॉपर्टी मार्केट में इस समय बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इस पूरे क्षेत्र में नोएडा और ग्रेटर नोएडा आवासीय संपत्तियों की मांग के मामले में सबसे आगे निकल रहे हैं। बीते कुछ वर्षों के दौरान निर्मित मेट्रो नेटवर्क, एक्सप्रेसवे के नए कनेक्टिविटी जाल, डेटा सेंटर निवेश, आईटी और आईटीईएस कंपनियों का व्यापक विस्तार तथा जेवर में बन रहा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा ऐसे प्रमुख कारण हैं, जिन्होंने निवेशकों के भरोसे को मजबूती दी है। अब लोग केवल बनी-बनाई या पुरानी तैयार परियोजनाओं तक सीमित रहने के बजाय उन नए सेक्टरों और एक्सप्रेसवे गलियारों की ओर रुख कर रहे हैं, जहां आने वाले समय में बुनियादी ढांचे का भारी विकास तय माना जा रहा है।
दिल्ली-एनसीआर का नया रियल एस्टेट हॉटस्पॉट: जेएलएल रिपोर्ट के आंकड़े
रियल एस्टेट क्षेत्र की सलाहकार संस्था जेएलएल (JLL) द्वारा जारी 'Delhi Residential Market Dynamics Q1 2026' अध्ययन रिपोर्ट के आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं। वर्ष 2026 की पहली तिमाही के दौरान दिल्ली-एनसीआर में बिकी कुल आवासीय इकाइयों में से 38 प्रतिशत अकेले नोएडा की झोली में गई हैं। सिर्फ बिक्री ही नहीं, बल्कि डेवलपर्स द्वारा बाजार में उतारे गए नए आवासीय प्रोजेक्ट्स (न्यू लॉन्चेस) के मामले में भी नोएडा का योगदान 33 प्रतिशत दर्ज किया गया है। जेएलएल की इस रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि बिल्डर्स और खरीदार दोनों ही नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास के इलाकों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
निवेश का बदलता ट्रेंड: सेंट्रल नोएडा से नए एक्सप्रेसवे कॉरिडोर तक
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, रियल एस्टेट निवेशकों की रणनीतियों में स्पष्ट बदलाव आया है। कुछ वर्ष पहले तक निवेश की मुख्य पसंद नोएडा का सेक्टर-18 या सेंट्रल नोएडा के स्थापित रिहायशी इलाके हुआ करते थे। हालांकि, आज के खरीदार अगले 5 से 10 वर्षों के विकास रोडमैप को देखकर फैसले ले रहे हैं। यही कारण है कि जिन क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से आकार ले रहा है, वहां मांग में उछाल है।
नोएडा के जिन 6 प्रमुख सेक्टरों में इस समय सबसे ज्यादा चहल-पहल देखी जा रही है, उनमें सेक्टर-150, सेक्टर-146, सेक्टर-152, सेक्टर-168, सेक्टर-143बी तथा नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे से सटी परियोजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा, ग्रेटर नोएडा क्षेत्र की बात करें तो ग्रेटर नोएडा वेस्ट (जिसे नोएडा एक्सटेंशन के नाम से भी जाना जाता है), टेकजोन-4, सेक्टर-10, सेक्टर-12, सेक्टर-16बी और यमुना एक्सप्रेसवे का पूरा इलाका निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है।
डेटा सेंटर और आईटी हब से मिल रही बहुआयामी आर्थिक ताकत
नोएडा और ग्रेटर नोएडा की सबसे बड़ी मजबूती यह है कि ये शहर अब केवल रिहायशी ठिकाने नहीं रहे, बल्कि एक मजबूत बहुआयामी अर्थव्यवस्था के केंद्र बन चुके हैं। एक तरफ जहां वैश्विक आईटी और कॉरपोरेट घराने अपने ऑफिस का दायरा बढ़ा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ डेटा सेंटर, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में अरबों रुपये का निवेश हो रहा है। बहुराष्ट्रीय कंपनियों के आने से लाखों नए रोजगार सृजित हो रहे हैं, जिससे स्थानीय आवासीय बाजार को स्थायी और मजबूत मांग मिल रही है। प्रसिद्ध सलाहकार संस्था सीबीआरई (CBRE) का आकलन है कि भारत में डेटा सेंटर की क्षमता में होने वाली तेज बढ़ोतरी में दिल्ली-एनसीआर एक अग्रणी बाजार बना रहेगा, जिसका प्रत्यक्ष लाभ नोएडा को मिलेगा।
लक्जरी हाउसिंग में उछाल और यमुना एक्सप्रेसवे का भविष्य
हालिया महीनों में नोएडा के प्रीमियम और लक्जरी रियल एस्टेट सेगमेंट में भी अप्रत्याशित तेजी देखी गई है। उच्च आय वाले खरीदार और दूरदर्शी निवेशक बेहतर संभावित रिटर्न को देखते हुए हाई-एंड और अल्ट्रा-लग्जरी प्रोजेक्ट्स की ओर आकर्षित हो रहे हैं। इसे ध्यान में रखते हुए डेवलपर्स भी नए प्रीमियम प्रोजेक्ट्स बाजार में ला रहे हैं।
दूसरी ओर, यमुना एक्सप्रेसवे बेल्ट दीर्घकालिक निवेश का नया केंद्र बन चुकी है। इस क्षेत्र में बन रहा जेवर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, प्रस्तावित फिल्म सिटी, मल्टी-मॉडल लॉजिस्टिक्स हब, औद्योगिक पार्क और विश्वस्तरीय सड़क नेटवर्क मिलकर इसे बेहद आकर्षक बनाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे-जैसे ये इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाएं धरातल पर पूरी होंगी, आसपास के रिहायशी और व्यावसायिक रियल एस्टेट की कीमतें तेजी से बढ़ेंगी।
यूपी रेरा आंकड़े और उद्योग विशेषज्ञों की राय
उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट विनियामक प्राधिकरण (UP RERA) के आधिकारिक आंकड़ों का हवाला देने वाली रिपोर्ट के मुताबिक, पूरे उत्तर प्रदेश में होने वाले कुल रियल एस्टेट निवेश का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा अकेले नोएडा और गाजियाबाद क्षेत्र में केंद्रित है। यह आंकड़ा इस बात का ठोस प्रमाण है कि निवेशकों का भरोसा इन शहरों पर कितना गहरा है।
बाजार की स्थिति पर टिप्पणी करते हुए एसकेए ग्रुप के डायरेक्टर संजय शर्मा ने कहा कि निवेशकों का दृष्टिकोण अब पूरी तरह व्यावहारिक हो चुका है, वे वर्तमान मूल्य से ज्यादा आने वाले 5 से 10 वर्षों के इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को महत्व दे रहे हैं। एक्सप्रेसवे, मेट्रो नेटवर्क, डेटा सेंटर और जेवर एयरपोर्ट जैसी बड़ी परियोजनाओं ने निवेशकों में जबरदस्त विश्वास पैदा किया है, जिससे सेक्टर-150 और ग्रेटर नोएडा वेस्ट जैसे इलाकों में लगातार निवेश बढ़ रहा है।
काउंटी ग्रुप के डायरेक्टर अमित मोदी के अनुसार, आधुनिक खरीदार केवल एक मकान नहीं खरीदता, बल्कि वह पूरे सामाजिक और आर्थिक इकोसिस्टम को आंकता है। बेहतर कनेक्टिविटी, रोजगार के साधन और गुणवत्तापूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर नोएडा और ग्रेटर नोएडा की सबसे बड़ी ताकत हैं, जिसके कारण देशभर से लोग प्रीमियम और व्यावसायिक संपत्तियों में निवेश कर रहे हैं।
इसी क्रम में मिगसन ग्रुप के एमडी यश मिगलानी ने बताया कि नोएडा और ग्रेटर नोएडा अब किफायती मकानों के विकल्प मात्र नहीं रह गए हैं, बल्कि एक परिपक्व और स्थिर रियल एस्टेट बाजार के रूप में स्थापित हो चुके हैं, जहां वास्तविक खरीदारों और निवेशकों दोनों की ओर से मजबूत मांग बनी हुई है।
वहीं एचपी ग्लोबल इंफ्रा की सीएमडी गुरमीत ए कौर का मानना है कि सेक्टर-150, नोएडा एक्सटेंशन, ग्रेटर नोएडा वेस्ट और यमुना एक्सप्रेसवे जैसे क्षेत्रों में मध्यम वर्ग के बजट में भी गुणवत्तापूर्ण आवास उपलब्ध हैं। उन्होंने खरीदारों को सलाह दी कि वे हमेशा वैध परियोजनाओं, प्रतिष्ठित बिल्डर्स और भविष्य की कनेक्टिविटी को ध्यान में रखकर ही अपने पैसे का निवेश करें ताकि लंबे समय में बेहतर वैल्यू प्राप्त हो सके।



















