अपना आशियाना खरीदना हर आम इंसान का सपना होता है और इस मुकाम को हासिल करने के लिए लोग अपनी जिंदगीभर की कमाई और बचत का बड़ा हिस्सा दांव पर लगा देते हैं। ऐसे में बिल्डर के चमचमाते सैंपल फ्लैट, खूबसूरत इंटीरियर और सोशल मीडिया पर दिखने वाली आकर्षक रील्स से प्रभावित होकर जल्दबाजी में फैसला लेना आपके लिए भारी आर्थिक नुकसान का सौदा बन सकता है। अक्सर सैंपल फ्लैट में जो सुविधाएं और फिनिशिंग दिखाई जाती हैं, वे वास्तविक फ्लैट से काफी अलग होती हैं। इसलिए घर खरीदने का मन बनाने से पहले कानूनी दस्तावेजों से लेकर पेमेंट शेड्यूल तक की हर बारीक बात की पुख्ता जानकारी होना बेहद जरूरी है।
रियल एस्टेट एक्सपर्ट संजय कुमार ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि ग्रेटर नोएडा में किसी भी नए फ्लैट या प्रोजेक्ट में निवेश करने से पहले खरीदारों को छह बेहद महत्वपूर्ण बिंदुओं की गहराई से जांच करनी चाहिए। इन बातों का ध्यान रखने से आपकी जीवनभर की कमाई सुरक्षित रहेगी और भविष्य में आने वाली तमाम कानूनी और मानसिक परेशानियों से भी बचाव हो सकेगा।
प्रोजेक्ट की जमीन के लिए अथॉरिटी की मंजूरी जांचें
फ्लैट बुक करने से पहले यह सबसे पहले पता करना जरूरी है कि जिस जमीन पर यह पूरा प्रोजेक्ट खड़ा किया जा रहा है, उसे संबंधित विकास प्राधिकरण से सभी कानूनी और जरूरी स्वीकृतियां मिली हैं या नहीं। केवल बिल्डर के मौखिक दावों, विज्ञापनों या ब्रोशर पर आंख मूंदकर भरोसा करने की गलती बिल्कुल न करें। जमीन और निर्माण से जुड़े सभी स्वीकृत दस्तावेजों की खुद जांच करें। अगर जरूरी लगे तो संबंधित अथॉरिटी के दफ्तर जाकर सीधे जानकारी हासिल करें ताकि यह पक्का हो सके कि निर्माण नियमों के दायरे में हो रहा है।
उत्तर प्रदेश RERA रजिस्ट्रेशन की स्थिति देखें
किसी भी प्रॉपर्टी में पैसा लगाने से पहले यह तस्दीक करना अनिवार्य है कि संबंधित प्रोजेक्ट उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी यूपी रेरा के पास रजिस्टर्ड है या नहीं। खरीदारों को चाहिए कि वे प्रोजेक्ट का रेरा नंबर मांगें और उसकी आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर वहां दर्ज डेटा की पड़ताल करें। वेबसाइट पर आपको प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति, उसकी निर्धारित समयसीमा और अन्य जरूरी विवरण मिल जाएंगे। केवल बिल्डर के मुंह से रजिस्ट्रेशन का दावा सुनने के बजाय सरकारी पोर्टल पर दस्तावेजों का सत्यापन करना हमेशा समझदारी का कदम होता है।
सैंपल फ्लैट और असली फ्लैट की गुणवत्ता की तुलना करें
बिल्डर ग्राहकों को लुभाने के लिए सैंपल फ्लैट में महंगे इंटीरियर, हाई-एंड फिटिंग और प्रीमियम सामग्री का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन आपको यह स्पष्ट रूप से पूछना चाहिए कि आपको मिलने वाले वास्तविक फ्लैट में भी वही क्वालिटी और सामान मिलेगा या नहीं। टाइल्स, दरवाजे, खिड़कियां, सैनिटरी फिटिंग, बिजली के उपकरण और अन्य सुविधाओं की सूची लिखित रूप में लें। ब्रोशर या सैंपल फ्लैट में नजर आने वाली हर चमकती चीज को अपने फ्लैट की गारंटी मान लेना सरासर भूल होगी।
कब्जे मिलने की तारीख और समयसीमा स्पष्ट जानें
घर खरीदते समय यह बात बिल्कुल साफ होनी चाहिए कि बिल्डर आपको फ्लैट का पजेशन यानी कब्जा कब तक सौंप देगा। केवल मौखिक आश्वासनों पर भरोसा करके न बैठें। एग्रीमेंट में पजेशन की पक्की तारीख और उससे जुड़ी सभी शर्तों को ध्यान से पढ़ें। यदि आप वर्तमान में किराए के मकान में रह रहे हैं या होम लोन की ईएमआई भरने की योजना बना रहे हैं, तो प्रोजेक्ट में होने वाली हर एक देरी आपके पूरे वित्तीय बजट को बिगाड़ सकती है। इसलिए समयसीमा से जुड़े सभी पहलुओं को शुरुआत में ही समझ लेना चाहिए।
भुगतान के चरणों और पेमेंट शेड्यूल को समझें
फ्लैट की कुल कीमत जानने के साथ-साथ यह भी समझना जरूरी है कि आपको पैसा किस प्रकार और किन चरणों में चुकाना होगा। बिल्डर से बुकिंग अमाउंट, डाउन पेमेंट, कंस्ट्रक्शन के अलग-अलग चरणों पर होने वाले भुगतान और शेष किस्तों की पूरी जानकारी लें। इसके साथ ही यह नियम भी स्पष्ट करें कि यदि भुगतान में किसी प्रकार की देरी होती है तो उस पर कौन-कौन से चार्ज या शर्तें लागू होंगी। अपनी आर्थिक क्षमता और बजट का आकलन करने के बाद ही बुकिंग की तरफ कदम बढ़ाएं।
छिपे हुए शुल्कों और अतिरिक्त खर्चों की जानकारी लें
कई बार फ्लैट की शुरुआती कीमत सुनने में बहुत आकर्षक लगती है, लेकिन बाद में अलग से कई तरह के चार्ज जुड़ जाने पर कुल बजट काफी बढ़ जाता है। इसलिए खरीदार को क्लब हाउस, कार पार्किंग, मेंटेनेंस चार्ज, बिजली और पानी के कनेक्शन के शुल्क, और अन्य लागू टैक्स की जानकारी पहले ही मांग लेनी चाहिए। बिल्डर से सभी संभावित खर्चों का एक लिखित ब्रेकअप लें ताकि बाद में अचानक से आपके ऊपर अतिरिक्त पैसे चुकाने का दबाव न बने और आप मानसिक तनाव से बचे रहें।


















