फिल्म जगत में उस वक्त हड़कंप मच गया जब संजय लीला भंसाली की आगामी फिल्म लव एंड वॉर के सेट पर काम के दौरान एक कर्मचारी की जान चली गई। शूटिंग के दौरान करंट लगने से हुई इस दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु के बाद फिल्म उद्योग में सुरक्षा के मानकों और काम के घंटों को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए निर्माण कंपनी के सामने पीड़ित परिवार के लिए वित्तीय सहायता बढ़ाने की मांग रखी है।
FWICE ने मुआवजे में वृद्धि और शिक्षा के खर्च की रखी मांग
इस घटना पर एफडब्ल्यूआईसीई के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने जानकारी दी कि मृतक तकनीशियन चंद्रधारी सिंह यादव के परिजनों को संजय लीला भंसाली की ओर से 40 लाख रुपए की शुरुआती आर्थिक सहायता प्रदान की गई है। हालांकि, संगठन का मानना है कि परिवार की वास्तविक जरूरतों को देखते हुए यह पर्याप्त नहीं है। 42 वर्षीय चंद्रधारी सिंह यादव अपने घर के एकमात्र कमाऊ सदस्य थे, और अब उनके पीछे उनकी पत्नी व दो नाबालिग बच्चे हैं। संगठन की ओर से संजय लीला भंसाली से आग्रह किया गया है कि मुआवजे की कुल राशि को बढ़ाकर 50 लाख रुपए किया जाए, साथ ही बच्चों की पूरी पढ़ाई का खर्चा भी प्रोडक्शन हाउस को उठाना चाहिए।
यशराज प्रोडक्शंस का सहयोग
बीएन तिवारी ने स्पष्ट किया कि वर्तमान में संजय लीला भंसाली की ओर से इस नई मांग पर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि यदि स्थिति वैसी ही बनी रहती है, तो यशराज प्रोडक्शंस ने स्वयं आगे आकर पीड़ित परिवार की सहायता करने की पेशकश की है। चंद्रधारी सिंह यादव का पिछला कार्य अनुभव यशराज प्रोडक्शंस के साथ रहा था, जिसके चलते वे इस कठिन समय में परिवार की मदद के लिए तत्पर हैं। संगठन का मानना है कि फिल्म इंडस्ट्री के हर सदस्य को इस दुखद घड़ी में प्रभावित परिवार के साथ एकजुटता दिखानी चाहिए।
कामकाजी माहौल और सुरक्षा पर सवाल
एफडब्ल्यूआईसीई ने केवल एक घटना तक सीमित न रहकर पूरी फिल्म इंडस्ट्री की कार्य संस्कृति पर सवालिया निशान खड़े किए हैं। बीएन तिवारी का कहना है कि यह लड़ाई किसी एक निर्माता के विरुद्ध नहीं, बल्कि एक व्यवस्थित बदलाव के लिए है। अधिकांश सेटों पर तय नियमों को दरकिनार कर कर्मचारियों से आवश्यकता से अधिक समय तक काम करवाया जाता है। नियमों के मुताबिक आठ घंटे की ड्यूटी के बाद अधिकतम चार घंटे का ही अतिरिक्त काम लिया जा सकता है, जिसके लिए अलग से भुगतान होना अनिवार्य है। हकीकत में कई जगहों पर कर्मचारियों को 16-16 घंटे तक लगातार काम करना पड़ता है, और अक्सर उन्हें उचित ओवरटाइम भी नहीं मिल पाता है।
सेट पर सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों की अनिवार्यता
संगठन के प्रमुख ने जानकारी दी कि प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के साथ हुई उच्च-स्तरीय बैठक में सेट पर स्वास्थ्य और सुरक्षा नियमों को और अधिक कड़ा करने के निर्देश दिए गए हैं। संगठन का स्पष्ट संदेश है कि उनका ध्येय शूटिंग को बाधित करना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी कर्मचारी अपनी सुरक्षा को ताक पर रखकर काम न करे। हर व्यक्ति की एक शारीरिक क्षमता होती है, और सेट पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न घटे।













