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गोंडा के रामू निषाद ने तोरई की खेती से पलटी किस्मत, लाखों का मुनाफा कमाकर बने दूसरों के लिए मिसालव्यापार
27 जुल॰ 2026, 4:31 pm (19 दिन पहले)· 0

गोंडा के रामू निषाद ने तोरई की खेती से पलटी किस्मत, लाखों का मुनाफा कमाकर बने दूसरों के लिए मिसाल

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के प्रगतिशील किसान रामू निषाद ने मचान विधि से तोरई की खेती करके अपनी आर्थिक स्थिति बदल ली है। तीसरी कक्षा तक पढ़े रामू अब हर साल लाखों रुपये कमाकर इलाके के अन्य किसानों को भी प्रेरित कर रहे हैं।

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के एक किसान ने अपनी कड़ी मेहनत और लगन से यह साबित कर दिया है कि बुलंदियों को छूने के लिए डिग्रियों की नहीं बल्कि पक्के इरादों की जरूरत होती है। गोंडा के रहने वाले प्रगतिशील किसान रामू निषाद ने तोरई की खेती के जरिए अपनी किस्मत को पूरी तरह बदल डाला है। आज वह पारंपरिक खेती से हटकर आधुनिक तरीकों को अपनाकर हर साल लाखों रुपये का मुनाफा कमा रहे हैं और क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए एक मजबूत प्रेरणास्त्रोत बन चुके हैं।

पढ़ाई छोड़कर खेती को बनाया अपने जीवन का मुख्य आधार

रामू निषाद की यह कामयाबी उन लोगों के लिए एक बड़ा सबक है जो कम पढ़े-लिखे होने को अपनी असफलता का कारण मान लेते हैं। रामू ने अपनी शुरुआती बातचीत में साझा किया कि उन्होंने अपनी पढ़ाई केवल तीसरी कक्षा तक ही पूरी की थी। इसके बाद उनका मन शिक्षा में नहीं लगा, जिसके चलते उन्होंने स्कूल जाना छोड़ दिया और खेती-किसानी को ही अपने जीवन की राह चुन लिया। शुरुआत के दिनों में वह भी बाकी किसानों की तरह पारंपरिक फसलों की ही बुवाई करते थे, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद उन पुरानी फसलों से उन्हें कोई खास मुनाफा नहीं मिल पाता था। तंगहाली और कम आमदनी से परेशान होकर उन्होंने लीक से हटकर कुछ अलग और नया करने का कड़ा फैसला किया, जिसके बाद उन्होंने तोरई की खेती की तरफ रुख किया।

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मचान विधि और आधुनिक तकनीकों का किया अनोखा प्रयोग

इस समय रामू निषाद करीब एक से डेढ़ बीघा जमीन पर आधुनिक मचान विधि का इस्तेमाल करके तोरई की शानदार फसल उगा रहे हैं। खेत में मजबूत मचान तैयार करने के बाद उन्होंने बाजार से बेहतरीन गुणवत्ता वाले बीज लाकर उनकी रोपाई की। फसल की देखरेख के दौरान उन्होंने समय पर सिंचाई करने, सही मात्रा में खाद और जरूरी दवाओं का छिड़काव करने पर पूरा जोर दिया, जिसका नतीजा यह निकला कि उनकी तोरई की फसल बेहद कम समय में बेहतरीन तरीके से तैयार हो गई। बाजार में उनकी उगाई गई तोरई की मांग हमेशा बनी रहती है, जिसकी वजह से उन्हें अपनी उपज का भाव भी काफी अच्छा मिल जाता है।

लागत से कई गुना ज्यादा हो रही है छप्परफाड़ कमाई

अपनी इस अनोखी खेती के बारे में जानकारी देते हुए रामू ने बताया कि उन्होंने तोरई के साथ-साथ खेत में बोड़ा भी लगाया हुआ है। इस पूरी फसल को तैयार करने में एक से डेढ़ बीघा जमीन पर कुल मिलाकर लगभग 10 से 12 हजार रुपये की लागत आई है। वहीं अगर मुनाफे और आमदनी की बात की जाए तो वह अब तक लाखों रुपये की कमाई कर चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि खेतों में तोरई की हार्वेस्टिंग का काम अभी भी लगातार जारी है, जिसे देखते हुए आने वाले दिनों में और भी ज्यादा बेहतरीन इनकम होने की पूरी उम्मीद बनी हुई है।

आसपास के किसानों के लिए बने सफलता का नया पैमाना

रामू निषाद का साफ तौर पर यह मानना है कि यदि देश का किसान भाई पारंपरिक तौर-तरीकों को छोड़कर नई तकनीकों को अपनाए और स्थानीय बाजार की मांग को समझते हुए सही फसलों का चयन करे, तो वह बहुत कम जमीन से भी बंपर कमाई कर सकता है। उनकी इस शानदार सफलता को अपनी आंखों से देखने के बाद अब गोंडा के आसपास के कई अन्य किसानों ने भी तोरई और अन्य मौसमी सब्जियों की खेती की तरफ अपने कदम बढ़ाने शुरू कर दिए हैं। उनकी यह प्रेरणादायक कहानी हर उस इंसान को यह संदेश देती है कि सच्ची मेहनत, सटीक योजना और आधुनिक कृषि तौर-तरीकों को अपनाकर खेती जैसे क्षेत्र में भी बड़ी से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है।

सवाल-जवाब

रामू निषाद कौन हैं और वह कहां के रहने वाले हैं?
रामू निषाद उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के एक प्रगतिशील किसान हैं।
रामू निषाद मुख्य रूप से किस फसल की खेती कर रहे हैं?
वह वर्तमान में मचान विधि के जरिए मुख्य रूप से तोरई की खेती कर रहे हैं, जिसके साथ उन्होंने बोड़ा भी लगाया है।
रामू निषाद ने कितनी जमीन पर तोरई की खेती की है?
वह करीब एक से डेढ़ बीघा जमीन पर तोरई की खेती कर रहे हैं।
तोरई की फसल तैयार करने में कुल कितनी लागत आई है?
एक से डेढ़ बीघा जमीन में तोरई की फसल उगाने में लगभग 10 से 12 हजार रुपये की लागत आई है।
रामू निषाद की तोरई की खेती से अब तक कितनी कमाई हुई है?
वह इस खेती से अब तक लाखों रुपये की कमाई कर चुके हैं और हार्वेस्टिंग अभी भी जारी है।
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