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ईंधन की कीमतों पर सरकार का बड़ा संकेत: पेट्रोल-डीजल फिर महंगा होगा या मिलेगी राहत, सुरेश गोपी ने बताई पूरी बातव्यापार
14 जून 2026, 3:24 pm (46 दिन पहले)· 0

ईंधन की कीमतों पर सरकार का बड़ा संकेत: पेट्रोल-डीजल फिर महंगा होगा या मिलेगी राहत, सुरेश गोपी ने बताई पूरी बात

केंद्रीय राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में आगे कोई बदलाव कच्चे तेल की उपलब्धता और अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति की स्थिरता पर निर्भर करेगा, क्योंकि बीते एक महीने में दाम करीब 7.50 रुपए तक बढ़ चुके हैं।

देशभर के वाहन मालिकों के मन में इस समय एक ही सवाल घूम रहा है — क्या पेट्रोल और डीजल के दाम एक बार फिर बढ़ेंगे, या लगातार महंगे होते ईंधन से अब कुछ राहत मिलेगी? इसी सवाल पर अब केंद्र सरकार की ओर से रुख साफ हो गया है। केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने रविवार को कहा कि आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में किसी भी बदलाव का फैसला पूरी तरह इस बात पर टिका रहेगा कि कच्चे तेल की उपलब्धता कैसी रहती है और उसकी अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति कितनी स्थिर बनी रहती है।

मंत्री ने क्या-क्या कहा

केरल के त्रिशूर जिले में मीडिया से बातचीत में मंत्री ने भरोसा दिलाया कि पेट्रोलियम मंत्रालय हर पहलू पर बारीकी से नजर रखे हुए है। उनके मुताबिक सरकार इस वक्त वैश्विक ऊर्जा बाजार में आ रहे उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया के तनाव से बनी परिस्थिति का गहराई से अध्ययन कर रही है। जब पत्रकारों ने बार-बार यह पूछा कि क्या आगे दाम और बढ़ सकते हैं, तो उन्होंने कहा, “पहले कच्चे तेल की आपूर्ति की स्थिति देख लेते हैं. हमारे साथ संबंधित कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह पुरी हैं, स्थिति जैसी होगी वैसा देखा जाएगा.” इसी दौरान उन्होंने हल्के अंदाज में मीडिया से यह भी पूछ लिया कि क्या पत्रकार उनसे किसी निगरानी या सुपरवाइजरी मंत्रालय जैसी भूमिका निभाने की उम्मीद कर रहे हैं।

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पश्चिम एशिया का तनाव और तेल की किल्लत

मंत्री का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब आम उपभोक्ता पहले से ही पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) के बढ़े दामों से जूझ रहे हैं। बीते कुछ हफ्तों में इन तीनों की कीमतें तेजी से ऊपर गई हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की सप्लाई चेन में आई रुकावटों को माना जा रहा है। पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक टकराव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री व्यापार मार्गों पर सुरक्षा का खतरा बढ़ गया है। भारत जैसे देश के लिए, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात पर निर्भर है, इसका सीधा असर यह है कि कच्चे तेल की खरीद दिन-ब-दिन महंगी और मुश्किल होती जा रही है।

एक महीने में चार झटके

हाल के इतिहास पर गौर करें तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियों ने महज एक महीने के भीतर उपभोक्ताओं को चार बार झटका दिया है। इस सिलसिले की शुरुआत 15 मई को हुई, जब पेट्रोल और डीजल दोनों के दाम एक साथ 3 रुपए प्रति लीटर बढ़ा दिए गए। बाजार की अस्थिरता को देखते हुए इसके बाद 90 पैसे की एक और बढ़ोतरी कर दी गई।

महंगाई यहीं नहीं रुकी। 23 मई को पेट्रोल 0.87 रुपए और डीजल 0.91 रुपए प्रति लीटर महंगा हुआ। इसके ठीक दो दिन बाद, यानी 25 मई को कंपनियों ने आखिरी बड़ी समीक्षा करते हुए पेट्रोल के दाम 2.61 रुपए और डीजल के दाम 2.71 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ा दिए। इस तरह सिर्फ दस से पंद्रह दिनों में ही दोनों ईंधन करीब 7.50 रुपए तक महंगे हो चुके हैं। अब सबकी निगाहें इस पर टिकी हैं कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की आपूर्ति कब तक सामान्य हो पाती है।

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