देश की प्रमुख जीवन बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम ने चालू वित्तवर्ष 2026-27 की अप्रैल से जून तिमाही के दौरान मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज किया है। प्रीमियम आय में बढ़ोतरी और परिचालन सुधारों के चलते कंपनी का शुद्ध लाभ पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले 23 फीसदी बढ़ा है।
मुनाफे और कुल आय में दर्ज की गई बढ़त
शेयर बाजार को दी गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, चालू वित्तवर्ष की पहली तिमाही में कंपनी का कुल शुद्ध लाभ 13,492 करोड़ रुपये दर्ज किया गया। इससे पिछले वित्तवर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में यह आंकड़ा 10,987 करोड़ रुपये था। इस अवधि में कंपनी की कुल कमाई भी बढ़कर 2,37,848 करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले इसी तीन महीने की अवधि में 2,22,864 करोड़ रुपये दर्ज की गई थी।
विभिन्न प्रीमियम श्रेणियों से हुई कमाई का विवरण
जून तिमाही में कंपनी के पहले साल के प्रीमियम संग्रह में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई। नए व्यापार से मिलने वाला पहला प्रीमियम बढ़कर 9,217 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले वित्तवर्ष की समान तिमाही में 7,525 करोड़ रुपये था। रिन्यूअल यानी पॉलिसी का दोबारा भुगतान करने वाले प्रीमियम से होने वाली कमाई 59,885 करोड़ रुपये से बढ़कर 61,833 करोड़ रुपये दर्ज की गई। वहीं सिंगल प्रीमियम के जरिए कंपनी ने 56,369 करोड़ रुपये जुटाए, जो एक साल पहले 51,923 करोड़ रुपये था। इन सभी श्रेणियों को मिलाकर कंपनी की शुद्ध प्रीमियम आय 1,19,200 करोड़ रुपये से बढ़कर 1,27,250 करोड़ रुपये हो गई।
कुल खर्च और क्लेम निपटारे की स्थिति
कारोबार विस्तार के साथ कंपनी के कुल खर्चों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। पहली तिमाही में एलआईसी का कुल खर्च बढ़कर 2,25,573 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 2,11,928 करोड़ रुपये था। परिचालन के मोर्चे पर कंपनी ने बीमा दावों के निपटारे में तेजी दिखाई है। पहली तिमाही में क्लेम सेटलमेंट अनुपात सुधरकर 2.42 गुना पहुंच गया, जो बीते वित्तवर्ष की इसी अवधि में 2.17 गुना दर्ज हुआ था। यह सुधार दर्शाता है कि कंपनी खारिज किए गए दावों की तुलना में दोगुनी से अधिक दर पर ग्राहकों के क्लेम का सेटलमेंट कर रही है।
शेयर बाजार में प्रदर्शन और हिस्सेदारी बिक्री का असर
मजबूत तिमाही नतीजों के बावजूद शेयर बाजार में निवेशकों का रुख सुस्त दिखाई दिया। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर कंपनी के शेयर 1.4 फीसदी टूटकर 387.50 रुपये पर बंद हुए। बाजार में जारी इस दबाव के पीछे सरकार द्वारा हाल ही में ऑफर फॉर सेल के माध्यम से की गई 7 फीसदी हिस्सेदारी बिक्री को वजह माना जा रहा है। सरकार ने इस हिस्सेदारी बिक्री के जरिए 32,000 करोड़ रुपये जुटाए थे, जिससे अल्पकालिक स्तर पर निवेशकों की भावनाएं प्रभावित हुई हैं।



















