मूलांक 1 अंक राशिफल 3 अगस्त 2026: 1, 10, 19 और 28 को जन्मे लोगों के लिए करियर, धन और रिश्तों की सटीक भविष्यवाणीओपेक+ के सितंबर में 188,000 बैरल रोज़ाना ज्यादा उत्पादन के फैसले से कच्चे तेल के दाम धड़ामईरान पर सैन्य कार्रवाई टालने के डोनाल्ड ट्रंप के फैसले से बढ़ा रिस्क सेंटिमेंट, ऑस्ट्रेलियन डॉलर 0.7050 के करीब पहुंचाश्रेया कालरा के एक फैसले ने बदला गेम, हर्षद चोपड़ा बने फाइनलिस्ट और शिवांगी जोशी का सफर हुआ खत्ममैथिलीशरण गुप्त की जयंती पर राजनाथ सिंह ने अर्पित की श्रद्धांजलि, राष्ट्रकवि के सांस्कृतिक नवजागरण को किया याद12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण: भारत में अदृश्य रहने पर भी 4 राशियों के लिए बेहद संवेदनशील, जानें ज्योतिषीय उपायसमाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने 'पिक्चर चालू करो रे' पोस्ट से राजनीतिक हलचल बढ़ाई, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहसपाकिस्तान के ब्रॉड पीक पर हिमस्खलन, रिकॉर्डधारी पर्वतारोही निर्मल पुर्जा समेत चार के शव बरामदरुचिका सिंह विवाद पर बोले अरविंद केजरीवाल, एफआईआर और माफी के बाद दी प्रतिक्रियाआज का राशिफल: मंगल और बुध का संयोग, 12 राशियों के लिए जानें स्वास्थ्य, व्यापार और प्रेम का हाल
केंद्रीय बैंकों का सोने की ओर झुकाव, डॉलर से दूरी की रफ्तार बढ़ी: नई रिपोर्ट में बड़ा संकेतव्यापार
17 जून 2026, 10:48 pm (46 दिन पहले)· 2

केंद्रीय बैंकों का सोने की ओर झुकाव, डॉलर से दूरी की रफ्तार बढ़ी: नई रिपोर्ट में बड़ा संकेत

World Gold Council की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपने भंडार में सोना बढ़ाते जा रहे हैं और अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता घटा रहे हैं। सर्वे में शामिल 84% अधिकारियों का मानना है कि सोने की हिस्सेदारी आगे और बढ़ेगी।

दुनिया के केंद्रीय बैंक धीरे धीरे अमेरिकी डॉलर से अपना नाता ढीला कर रहे हैं और इसकी जगह सोने को अपने भंडार में जगह दे रहे हैं। World Gold Council (WGC) की सबसे नई रिपोर्ट इसी रुझान की ओर इशारा करती है, जिसके मुताबिक बैंक आने वाले समय में इस कीमती धातु को और जमा करते रहेंगे और अपने निवेश को विविध बनाएंगे। यह बदलाव साफ बताता है कि सोना अब डॉलर के एक भरोसेमंद विकल्प के तौर पर उभर रहा है।

2022 से शुरू हुई खरीदारी ने दिया मोटा मुनाफ़ा

कई विकासशील देशों के लिए यह दांव बेहद फ़ायदेमंद साबित हुआ है। सोना जमा करने की यह होड़ 2022 में शुरू हुई थी और तब से अब तक इन देशों ने अरबों का मुनाफ़ा कमाया है। Spot XAU/USD इंडेक्स उस समय से लगभग 140% चढ़ चुका है, यानी पाँच साल में इन देशों का निवेश लगभग दोगुना हो गया।

ये भी पढ़ें

दूसरी ओर, सिर्फ़ डॉलर पर टिके रहने की अपनी कीमत है। इससे राष्ट्रीय कर्ज़ और महंगाई दोनों बढ़ने का जोखिम जुड़ा रहता है। ऐसे में कई देश मानते हैं कि अपने भंडार को डॉलर से हटाकर दूसरी संपत्तियों में लगाना ही अपनी अर्थव्यवस्था को अमेरिका के फ़ैसलों की मार से बचाने का इकलौता रास्ता है।

सर्वे में 84% अधिकारी बोले, बढ़ेगी सोने की हिस्सेदारी

WGC ने अपने सर्वे में 76 बैंकों के अधिकारियों को शामिल किया। इनमें से 84% अधिकारियों ने माना कि सोने की खरीदारी आगे भी बढ़ती रहेगी। वहीं 74% का मानना था कि केंद्रीय बैंकों के भंडार में अमेरिकी डॉलर की हिस्सेदारी घटेगी। इन आंकड़ों से साफ है कि डॉलर के मुक़ाबले सोने को तरजीह दी जा रही है और डॉलर से दूरी का सिलसिला तेज़ हो रहा है।

डॉलर ही नहीं, फेडरल रिज़र्व की आज़ादी पर भी चिंता

उभरती अर्थव्यवस्थाओं की चिंता सिर्फ़ कर्ज़ की स्थिरता तक सीमित नहीं है। इन देशों को Federal Reserve की स्वतंत्रता को लेकर भी फ़िक्र है। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump, Federal Reserve को राजनीति के घेरे में खींच रहे हैं और उसकी स्वतंत्र पहचान पर सवाल खड़े हो रहे हैं। Trump खुद डॉलर से दूरी बनाने के विरोधी रहे हैं और उन्होंने उन देशों को गंभीर नतीजे भुगतने की चेतावनी दी है जो अमेरिकी डॉलर को छोड़ने की सोचते हैं।

“ये सारे कारक केंद्रीय बैंकरों के मन में हो सकते हैं जब वे आगे के लिए अपनी आरक्षित संपत्तियों के स्वरूप के बारे में सोचते हैं,” World Gold Council में central banks के ग्लोबल हेड और Asia-Pacific के प्रमुख Shaokai Fan ने TrendKia को बताया।

2029 के बाद और तेज़ हो सकती है यह प्रक्रिया

जानकारों का अनुमान है कि जनवरी 2029 में Trump का कार्यकाल ख़त्म होने के बाद डॉलर से दूरी की यह प्रक्रिया पूरी रफ़्तार पकड़ सकती है। ऐसे में जिन देशों ने सोने में निवेश किया है, उन्हें अगले तीन साल में इसका और बड़ा लाभ मिल सकता है।

सवाल-जवाब

सर्वे में कितने बैंकों के अधिकारी शामिल थे और कितनों ने सोने की खरीद बढ़ने की बात कही?
WGC के सर्वे में 76 बैंकों के अधिकारी शामिल थे, जिनमें से 84% ने माना कि सोने की खरीदारी आगे भी बढ़ती रहेगी।
सोने जमा करने की यह होड़ कब शुरू हुई और तब से कितना फ़ायदा हुआ?
यह सिलसिला 2022 में शुरू हुआ और तब से Spot XAU/USD इंडेक्स लगभग 140% चढ़ चुका है, यानी पाँच साल में निवेश लगभग दोगुना हो गया।
देश डॉलर से दूरी क्यों बना रहे हैं?
डॉलर पर टिके रहने से राष्ट्रीय कर्ज़ और महंगाई बढ़ने का जोखिम है, साथ ही देशों को Federal Reserve की स्वतंत्रता और अमेरिका के फ़ैसलों को लेकर भी चिंता है।
यह प्रक्रिया कब और तेज़ हो सकती है?
जानकारों का अनुमान है कि जनवरी 2029 में Trump का कार्यकाल ख़त्म होने के बाद डॉलर से दूरी की यह प्रक्रिया पूरी रफ़्तार पकड़ सकती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR