धनतेरस का पर्व देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद मंगलमय साबित हुआ। जहां एक तरफ अमेरिका, चीन और जापान के शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई, वहीं भारतीय बाजार में जबरदस्त रौनक देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी में रिकॉर्ड तेजी आई और महज एक ही दिन के भीतर निवेशकों की संपत्ति में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
अमेरिकी तकनीकी शेयरों में गिरावट और भारतीय आईटी का उभार
अमेरिका की दिग्गज AI कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट आई और वे औंधे मुंह नीचे आ गिरे। इसके विपरीत, भारतीय आईटी कंपनियों के शेयरों में शानदार तेजी देखने को मिली। विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजारों में जमकर पूंजी निवेश किया। इसके साथ ही भारतीय रुपये में मजबूती आई और एक डॉलर की कीमत अब 94 रुपये पर आ गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी आई है।
एलन मस्क को झटका और वैश्विक बाजार की स्थिति
दुनिया के सबसे अमीर शख्स Elon Musk की कुल संपत्ति में एक ही झटके में 40 अरब डॉलर की भारी कमी दर्ज की गई। यह गिरावट यह दर्शाने के लिए पर्याप्त है कि Donald Trump का समर्थन करने वाले कारोबारियों और निवेशकों का स्टॉक मार्केट में क्या हश्र हुआ। अमेरिकी एआई कंपनियों का क्रैश होना यह साफ करता है कि वहां शेयर बाजार की स्थिति कितनी खस्ताहाल हो चुकी है। हालांकि, यूरोप में इतना नुकसान नहीं हुआ और वहां का स्टॉक मार्केट थोड़ा संभला। शेयर बाजार के जानकारों का मानना है कि अब अमेरिका में मनमाने तरीके से टैरिफ थोपने का दौर समाप्त हो चुका है, जो यूरोपीय देशों के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
भारतीय अर्थव्यवस्था और ट्रेड डील पर असर
भारतीय शेयर बाजार में इस उथल-पुथल का सबसे बड़ा फायदा साफ तौर पर दिखाई दिया, क्योंकि अब अमेरिका के साथ होने वाली ट्रेड डील में भारत की स्थिति काफी मजबूत यानी upper hand रहेगी। Donald Trump द्वारा टैरिफ को लेकर लटकाई गई तलवार अब हट जाएगी। कच्चे तेल के सस्ते होने और डॉलर में आई गिरावट का सीधा मतलब यही है कि किस्मत के सितारे पूरी तरह भारतीय बाजार के पक्ष में खड़े हैं। Donald Trump की हार भारत के शेयर बाजार में निवेश करने वाले लोगों के लिए बहुत बड़ी खुशखबरी लेकर आई है। इस बार दिवाली पर बाजार में जिस तरह की तेजी देखने को मिलेगी, उसकी गूंज काफी दूर तक सुनाई देगी।
बिहार के मनेर में पुलिस एनकाउंटर पर सियासत
दूसरी ओर, बिहार पुलिस ने मनेर इलाके में एक मुठभेड़ के दौरान तीन कुख्यात अपराधियों जे पी यादव, बबलू यादव और राजा शर्मा को ढेर कर दिया। ये तीनों आरोपी हत्या के कई मामलों में लंबे समय से वांटेड चल रहे थे। लेकिन इस एनकाउंटर के तुरंत बाद बिहार की राजनीति में उबाल आ गया और जमकर राजनीतिक हंगामा हुआ। हालात यहां तक पहुंच गए कि पुलिस के साथ बदसलूकी जैसी घटनाएं भी सामने आईं।
मीसा भारती के आरोप और पुलिस की कार्रवाई
RJD प्रमुख लालू यादव की बेटी Misa Bharti ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी की सरकार राज्य में यादव समुदाय के लोगों के साथ दुश्मनों जैसा बर्ताव कर रही है। उनका आरोप था कि आम नागरिकों को अपराधी करार देकर फर्जी मुठभेड़ों में मौत के घाट उतारा जा रहा है। आमतौर पर पुलिसिया एनकाउंटरों को लेकर यह धारणा रहती है कि पुलिस पहले गिरफ्तार करती है और तफ्तीश के दौरान गाड़ी पलटने या हमले की बात कहकर अपराधियों को मार गिराती है, जिससे शक के दायरे खड़े होते हैं।
अपराधियों की जाति और पुलिस की भूमिका
लेकिन मनेर वाले मामले में स्थिति अलग थी, क्योंकि ये अपराधी किसी गाड़ी में नहीं बल्कि छिपे हुए थे। उन्होंने खुद पुलिस बल पर गोलियां चलाईं और जवाबी कार्रवाई में मारे गए। पुलिस के पास इन तीनों के पक्के आपराधिक रिकॉर्ड और दस्तावेज भी पूरी तरह मौजूद हैं। इसके बावजूद इस संवेदनशील मामले में राजनीति और जाति का मुद्दा खींच लाया गया। सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस को किसी छिपे हुए अपराधी को दबोचने से पहले उसकी जाति पूछनी चाहिए थी? क्या गोली चलाने से पहले अपराधियों से उनका पहचान पत्र मांगा जाना चाहिए था? अपराधियों के पक्ष में इस तरह की सोच रखना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति को दर्शाता है।


















