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लंदन की अदालत में बैंक ऑफ इंडिया की बड़ी जीत, नीरव मोदी से वसूले जाएंगे 100 करोड़ से ज्यादाव्यापार
24 जून 2026, 5:32 am (125 दिन पहले)· 3

लंदन की अदालत में बैंक ऑफ इंडिया की बड़ी जीत, नीरव मोदी से वसूले जाएंगे 100 करोड़ से ज्यादा

लंदन हाईकोर्ट ने भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के खिलाफ बैंक ऑफ इंडिया के पक्ष में फैसला सुनाया है, जिसमें माना गया कि उस पर बैंक का 10.7 मिलियन डॉलर यानी 100 करोड़ रुपये से कुछ ज्यादा बकाया है.

भारत से फरार चल रहे हीरा कारोबारी नीरव मोदी के लिए लंदन से एक और बुरी खबर आई है. लंदन हाईकोर्ट ने मंगलवार को बैंक ऑफ इंडिया के हक में फैसला सुनाते हुए नीरव मोदी के खिलाफ चल रहे 100 करोड़ रुपये के मुकदमे का निपटारा बैंक के पक्ष में कर दिया. अदालत ने साफ कहा कि इस सरकारी बैंक का नीरव मोदी पर 10.7 मिलियन डॉलर बकाया है, जो 100 करोड़ रुपये से थोड़ा ज्यादा बैठता है.

लंदन सर्किट कमर्शियल कोर्ट में यह फैसला जज साइमन टिंकलर ने सुनाया. अपने आदेश में जज ने लिखा कि नीरव मोदी ने बैंक को जो पर्सनल गारंटी दी थी, उसके तहत वह 4.1 मिलियन डॉलर यानी करीब 38.9 करोड़ रुपये की मूल राशि चुकाने के लिए जिम्मेदार है. इस रकम पर बैंक की तय शर्तों के हिसाब से ब्याज भी जोड़ा जाएगा. जज ने यह भी टिप्पणी की कि नीरव मोदी अदालत में ऐसा कोई तर्क नहीं रख सके जिससे यह साबित होता कि बैंक इस रकम का हकदार नहीं है.

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नीरव मोदी की दलीलें नहीं चलीं

सुनवाई के दौरान नीरव मोदी की ओर से कहा गया था कि यह गारंटी कानूनी तौर पर लागू करने लायक नहीं थी. उसका तर्क था कि बैंक की तरफ से उसे कभी कोई वैध मांग नहीं भेजी गई और लोन रद्द करने की कोई ठोस वजह भी सामने नहीं आई थी. हालांकि अदालत ने इन दलीलों को नहीं माना.

फिलहाल नीरव मोदी लंदन की जेल में बंद है और भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहा है. इस ताजा फैसले ने उसकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं.

कैसे शुरू हुआ पूरा मामला

इस विवाद की जड़ साल 2012 में है. बैंक ऑफ इंडिया ने जुलाई 2012 में दुबई स्थित फायरस्टार डायमंड FZE को कर्ज दिया था, जो नीरव मोदी की कंपनियों में से एक है. इसके बाद 3 अगस्त 2013 को नीरव मोदी ने इस कर्ज के लिए खुद की पर्सनल गारंटी दी थी.

2018 की शुरुआत में जैसे ही पंजाब नेशनल बैंक के साथ नीरव मोदी की कथित धोखाधड़ी का मामला सामने आया, बैंक ऑफ इंडिया ने अपना दिया हुआ कर्ज वापस मांगने का फैसला कर लिया. मार्च और अप्रैल 2018 में बैंक ने फायरस्टार और नीरव मोदी, दोनों को मांग पत्र भेजे, लेकिन इनका कोई जवाब नहीं आया.

इसके बाद बैंक ऑफ इंडिया ने 8 मार्च 2024 को 4.1 मिलियन डॉलर की मूल राशि और उस पर ब्याज के लिए समरी जजमेंट हासिल कर लिया. इतना ही नहीं, बैंक ने अक्टूबर 2025 में नीरव मोदी को एक और मांग पत्र भेजा था. अब लंदन हाईकोर्ट के इस फैसले से बैंक को बकाया रकम वसूलने का रास्ता और मजबूत हो गया है.

सवाल-जवाब

लंदन हाईकोर्ट ने किसके पक्ष में फैसला सुनाया?
अदालत ने बैंक ऑफ इंडिया के पक्ष में फैसला सुनाया और माना कि नीरव मोदी पर बैंक का बकाया है.
नीरव मोदी पर कुल कितनी रकम बकाया मानी गई?
अदालत ने माना कि नीरव मोदी पर बैंक का 10.7 मिलियन डॉलर बकाया है, जो 100 करोड़ रुपये से थोड़ा ज्यादा है.
पर्सनल गारंटी के तहत मूल राशि कितनी है?
जज के अनुसार नीरव मोदी पर्सनल गारंटी के तहत 4.1 मिलियन डॉलर यानी करीब 38.9 करोड़ रुपये की मूल राशि चुकाने के लिए जिम्मेदार है, जिस पर ब्याज भी जुड़ेगा.
यह फैसला किस जज ने सुनाया?
यह फैसला लंदन सर्किट कमर्शियल कोर्ट में जज साइमन टिंकलर ने मंगलवार को सुनाया.
बैंक ऑफ इंडिया ने कर्ज कब और किसे दिया था?
बैंक ऑफ इंडिया ने जुलाई 2012 में दुबई की फायरस्टार डायमंड FZE को कर्ज दिया था और नीरव मोदी ने 3 अगस्त 2013 को इसकी पर्सनल गारंटी दी थी.
अभी नीरव मोदी कहां है?
नीरव मोदी इस समय लंदन की जेल में बंद है और भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहा है.
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