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व्यापारियों का 2 अक्टूबर को डिजिटल पेमेंट बहिष्कार का एलान, 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क के विरोध में सिर्फ नकद लेनदेन का फैसलाव्यापार
25 सित॰ 2026, 3:50 pm (55 मिनट पहले)· 0

व्यापारियों का 2 अक्टूबर को डिजिटल पेमेंट बहिष्कार का एलान, 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क के विरोध में सिर्फ नकद लेनदेन का फैसला

महाराष्ट्र के कारोबारी संगठन 2000 रुपये से अधिक के यूपीआई मर्चेंट भुगतान पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत शुल्क के खिलाफ 2 अक्टूबर को विरोध दर्ज कराएंगे। इस दौरान ग्राहक केवल नकद भुगतान कर सकेंगे क्योंकि कई दुकानों पर क्यूआर कोड ढकने की योजना है।

डिजिटल लेनदेन की बढ़ती लागत को लेकर देश के व्यापारिक हलकों में असंतोष की लहर तेज हो गई है। महाराष्ट्र के व्यापारी संगठनों ने आगामी 2 अक्टूबर को डिजिटल भुगतान के बहिष्कार का निर्णय लिया है। इस योजना के तहत कारोबारी उस दिन ऑनलाइन या क्यूआर कोड के माध्यम से भुगतान स्वीकार करने के बजाय केवल नकद लेन-देन को प्राथमिकता देंगे। यह पूरा कदम सरकार और वित्तीय नियामकों द्वारा 15 अक्टूबर से लागू किए जाने वाले नए मर्चेंट डिस्काउंट रेट अर्थात एमडीआर ढांचे के खिलाफ उठाया जा रहा है। महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर यानी एमएसीसीआईए के नेतृत्व में इस विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार की गई है, जिसका उद्देश्य छोटे और मझोले कारोबारियों पर पड़ने वाले अतिरिक्त वित्तीय बोझ को रेखांकित करना है।

प्रस्तावित एमडीआर व्यवस्था और व्यापारियों की मुख्य चिंता

इस पूरे विवाद के केंद्र में 2,000 रुपये से अधिक राशि वाले योग्य पर्सन-टू-मर्चेंट यानी पी2एम यूपीआई लेन-देन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत का मर्चेंट डिस्काउंट रेट है। एमडीआर वस्तुतः वह सेवा शुल्क होता है जो किसी डिजिटल भुगतान को प्रोसेस करने के बदले संबंधित व्यापारी द्वारा बैंक या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को चुकाया जाता है। अब तक यूपीआई भुगतान पूरी तरह लागत मुक्त होने के कारण व्यापक रूप से स्वीकार किए जाते रहे हैं। हालांकि नए ढांचे के तहत व्यापारियों को हर बड़े लेनदेन पर अपनी जेब से यह तय प्रतिशत देना होगा। व्यापारी प्रतिनिधियों का स्पष्ट कहना है कि खुदरा और थोक दोनों स्तरों पर काम करने वाले कई दुकानदार बेहद सीमित मुनाफे पर व्यापार करते हैं। ऐसे में अगर प्रति डिजिटल लेनदेन 0.4 प्रतिशत की कटौती होगी, तो उनकी शुद्ध आय में भारी गिरावट आएगी।

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व्यापारिक संगठनों ने उदाहरण देते हुए समझाया है कि यदि कोई ग्राहक दुकान से सामान खरीदकर 10,000 रुपये का पात्र यूपीआई भुगतान करता है, तो दुकानदार को उस पर सीधे 40 रुपये का एमडीआर शुल्क वहन करना पड़ेगा। प्रस्तावित नियमों के मुताबिक, 75,000 रुपये और उससे अधिक मूल्य के बड़े लेन-देन के लिए इस शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये निर्धारित की गई है। डिस्ट्रीब्यूटर्स, इलेक्ट्रॉनिक्स रिटेलर्स और किराना व्यापारियों का कहना है कि जब दिन भर में दर्जनों ऐसे बड़े लेन-देन होते हैं, तो महीने के अंत में यह रकम हजारों रुपये में बदल जाती है। कारोबारियों का तर्क है कि वे तकनीकी बदलावों के विरोधी नहीं हैं, बल्कि यह सवाल उठा रहे हैं कि डिजिटल लेन-देन के संचालन का पूरा खर्च केवल खुदरा विक्रेता पर क्यों थोपा जा रहा है।

काले कपड़े से ढकेंगे क्यूआर स्कैनर, केवल नकदी स्वीकार करने की रणनीति

विरोध को प्रतीकात्मक और प्रभावी बनाने के लिए व्यापारिक संघों ने जमीनी स्तर पर व्यापक तैयारी की है। प्रदर्शन के तहत भाग लेने वाले दुकानदार अपनी दुकानों पर लगे यूपीआई क्यूआर कोड स्कैनर और साउंड बॉक्स को काले कपड़े से ढककर रखेंगे। ग्राहकों से अनुरोध किया जाएगा कि वे अपनी खरीदारी के बदले केवल नकद मुद्रा में भुगतान करें। एमएसीसीआईए के अध्यक्ष रवींद्र मंगावे ने बताया कि यह अभियान केवल महाराष्ट्र की सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि देश भर के अन्य प्रमुख राज्यों के व्यापारी संगठन भी इस आंदोलन का समर्थन करने के लिए आगे आ रहे हैं। संगठन अपनी मांगों और समस्याओं को लेकर महाराष्ट्र सरकार के समक्ष भी एक औपचारिक ज्ञापन प्रस्तुत करने की तैयारी में है ताकि शासन स्तर पर केंद्र से बातचीत की जा सके।

यह निर्णय उस समय आया है जब मध्य प्रदेश में भी इसी तरह का विरोध दर्ज किया जा चुका है। मध्य प्रदेश में 23 सितंबर को व्यापारियों ने इसी मुद्दे को लेकर एक सांकेतिक अभियान चलाया था। उस दौरान इंदौर, भोपाल, जबलपुर और ग्वालियर जैसे प्रमुख व्यावसायिक शहरों में दुकानदारों ने अपने डिजिटल क्यूआर कोड ढक दिए थे और आने वाले ग्राहकों से नकदी में भुगतान करने का आग्रह किया था। हालांकि उस दिन सभी दुकानों पर यह विरोध एक जैसा नहीं रहा था और भोपाल समेत कई इलाकों में अनेक व्यापारियों ने सामान्य रूप से डिजिटल भुगतान स्वीकार करना जारी रखा था। इंदौर में कई व्यापारिक संघों ने सक्रिय भागीदारी निभाई थी, जिससे बाजार में इस नीतिगत बदलाव पर व्यापक चर्चा शुरू हुई थी।

ग्राहकों पर असर और नियमों की वास्तविक स्थिति

आम ग्राहकों के मन में इस नए शुल्क और विरोध को लेकर कई तरह के भ्रम पैदा हो रहे हैं। इस बात को समझना बेहद महत्वपूर्ण है कि प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत का शुल्क पूरी तरह से मर्चेंट पक्ष पर लागू होता है, जिसका अर्थ है कि सामान्य खरीदार को यूपीआई का उपयोग करने के लिए अपनी जेब से कोई अतिरिक्त पैसा नहीं देना होगा। यदि आप किसी स्टोर पर 3,000 रुपये का सामान खरीदते हैं, तो आपके बैंक खाते से केवल 3,000 रुपये ही कटेंगे। सरकार ने भी यह स्पष्ट कर दिया है कि इस नए ढांचे के तहत बैंकों या पेमेंट कंपनियों को यह अनुमति कतई नहीं है कि वे एमडीआर का भार सीधे ग्राहकों के बिल में जोड़ सकें। इसके अलावा, एक सामान्य नागरिक द्वारा किसी दूसरे नागरिक को किए जाने वाले पर्सन-टू-पर्सन यानी पी2पी भुगतान इस पूरी व्यवस्था से बाहर हैं और उन पर कोई शुल्क लागू नहीं होता।

नए दिशा-निर्देशों में छोटे दुकानदारों और आम जनता के रोजमर्रा के छोटे खर्चों को राहत देने के प्रावधान भी शामिल हैं। 2,000 रुपये तक के किसी भी यूपीआई भुगतान पर शून्य प्रतिशत शुल्क रहेगा, यानी 2,000 रुपये तक की राशि पर 0.4 प्रतिशत का एमडीआर लागू नहीं होगा। विशिष्ट पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले छोटे व्यापारियों को भी इस नए शुल्क से छूट दी जानी तय की गई है। इसके साथ ही कुछ चुनिंदा क्षेत्रों के लिए अलग दरें और विशेष छूट का प्रावधान रखा गया है। इसलिए 2 अक्टूबर को पूरे देश में डिजिटल नेटवर्क बंद होने की बात गलत है। यह एक स्वैच्छिक आंदोलन है, जिसका प्रभाव केवल उन्हीं दुकानों और प्रतिष्ठानों में दिखाई देगा जो इस विरोध में शामिल हो रहे हैं।

खरीदारी के लिए निकलते समय बरतें जरूरी सावधानी

त्योहारी सीजन और सप्ताहांत को देखते हुए 2 अक्टूबर को बाजार निकलने वाले आम नागरिकों को अपनी जेब में पर्याप्त नकदी रखने की सलाह दी जा रही है। चूंकि यह आंदोलन स्थानीय व्यापार संघों द्वारा आयोजित किया जा रहा है, इसलिए किसी इलाके में मेडिकल स्टोर, बड़े मॉल या सुपरमार्केट सामान्य रूप से डिजिटल भुगतान स्वीकार कर सकते हैं, जबकि पारंपरिक बाजारों की स्वतंत्र दुकानें आपसे नकद मांग सकती हैं। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म, ई-कॉमर्स वेबसाइट्स, पेट्रोल पंप और बड़े रिटेल चेन आउटलेट्स पर यूपीआई सेवाएं बिना किसी रुकावट के सामान्य रूप से काम करती रहेंगी। उपभोक्ताओं को यह मानकर परेशान होने की आवश्यकता नहीं है कि देश भर का यूपीआई बुनियादी ढांचा ठप हो जाएगा, बल्कि यह कुछ बाजारों में व्यापारियों द्वारा उठाया गया एक सीमित और प्रतीकात्मक कदम है।

सवाल-जवाब

क्या 2 अक्टूबर को पूरे देश में यूपीआई सेवाएं बंद रहेंगी?
नहीं, यह कोई तकनीकी शटडाउन नहीं है बल्कि व्यापारियों का एक स्वैच्छिक विरोध है। यूपीआई सामान्य रूप से काम करता रहेगा, लेकिन प्रदर्शन में शामिल दुकानें इसे स्वीकार करने से मना कर सकती हैं।
प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क किस राशि के लेनदेन पर लागू होगा?
यह शुल्क केवल 2,000 रुपये से अधिक मूल्य के पात्र पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) यूपीआई भुगतान पर लागू करने का प्रस्ताव है।
क्या किसी दुकान पर डिजिटल पेमेंट करने पर ग्राहक को अतिरिक्त 0.4 प्रतिशत देना होगा?
नहीं, यह शुल्क केवल व्यापारियों पर लागू होता है और बैंकों या सेवा प्रदाताओं को इसे ग्राहकों पर डालने की अनुमति नहीं है।
इस नए एमडीआर नियम के तहत अधिकतम कितना शुल्क काटा जा सकता है?
नियमों के अनुसार 75,000 रुपये और उससे अधिक के पात्र लेन-देन पर अधिकतम एमडीआर शुल्क 300 रुपये तक सीमित रखा गया है।
महाराष्ट्र में इस विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कौन सा संगठन कर रहा है?
इस विरोध का नेतृत्व महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (एमएसीसीआईए) कर रहा है, जिसके अध्यक्ष रवींद्र मंगावे हैं।
क्या 2,000 रुपये से कम के रोजमर्रा के यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क लगेगा?
नहीं, 2,000 रुपये तक के लेन-देन को इस प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत एमडीआर शुल्क के दायरे से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
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