मऊ जिले में कृषि से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन और उद्यान विभाग द्वारा विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। यदि किसान भाई मधुमक्खी पालन का व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, तो इसके लिए विभाग की तरफ से बंपर सब्सिडी प्रदान की जा रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों की आय में इजाफा करना और खेती के साथ-साथ अतिरिक्त आमदनी के स्रोत तैयार करना है।
कम खर्च में लंबे समय तक कमाई का जरिया
जिला उद्यान अधिकारी राम सिंह के अनुसार, मधुमक्खी पालन एक ऐसा कारोबार है जिसमें केवल एक बार शुरुआती निवेश करने की आवश्यकता होती है। इसके बाद इसकी दैनिक संचालन या ऑपरेटिंग लागत बेहद कम होती है, जिसमें केवल माइग्रेटिंग ट्रक का खर्च ही शामिल होता है। एक बार पूंजी लगाने के बाद किसान कई वर्षों तक लगातार मुनाफा कमा सकते हैं।
फसल उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी
मधुमक्खी पालन की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें मधुमक्खियों को अलग से किसी विशेष आहार की जरूरत नहीं पड़ती है। वे आसपास के खेतों की फसलों और फूलों का रस चूसकर अपना पेट भरती हैं। जब मधुमक्खियां फूलों पर मंडराती हैं, तो खेतों में परागण या फर्टिलाइजेशन की प्रक्रिया बहुत तेज हो जाती है। इसके परिणामस्वरूप उस क्षेत्र की फसलों के उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि हो जाती है और बीजों की गुणवत्ता भी बेहतर होती है।
लागत का आधा हिस्सा सरकार देगी अनुदान के रूप में
इस योजना के तहत यदि कोई किसान 50 बक्सों के साथ मधुमक्खी पालन शुरू करना चाहता है, तो कुल खर्च लगभग 2 लाख 56 हजार रुपए आएगा। सरकार की इस नीति के तहत उद्यान विभाग कुल लागत का 50 प्रतिशत यानी 1 लाख 28 हजार रुपए बतौर सब्सिडी सीधे प्रदान करेगा। इस लाभ को पाने के लिए किसानों को चयनित संस्थाओं के माध्यम से निर्धारित प्रक्रिया से गुजरना होगा।
जरूरी दस्तावेज और ऑनलाइन पंजीकरण की प्रक्रिया
योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को अपने कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज तैयार रखने होंगे। इनमें आधार कार्ड, खेत की खतौनी, बैंक पासबुक और पासपोर्ट साइज फोटो शामिल हैं। इन सभी दस्तावेजों के साथ किसानों को उद्यान विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य है। पोर्टल पर पंजीकरण होने के बाद विभाग के अधिकारियों द्वारा दस्तावेजों और स्थल की जांच की जाती है, जिसके बाद सब्सिडी की राशि जारी की जाती है।
प्रशिक्षण को दी जाएगी विशेष प्राथमिकता
उद्यान विभाग उन आवेदकों को सबसे पहले प्राथमिकता देगा जिन्होंने पहले से मधुमक्खी पालन का प्रशिक्षण प्राप्त किया हुआ है। जिन किसानों के पास इसका कोई पूर्व अनुभव या ट्रेनिंग नहीं है, उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि विभाग की तरफ से उन्हें उचित प्रशिक्षण भी उपलब्ध कराया जाएगा। शहद की मांग बाजार में हमेशा बनी रहने के कारण यह किसानों के लिए आय का एक बेहतरीन और निरंतर माध्यम साबित हो सकता है।



















