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मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रूट पर 320 किमी की गति में भी नहीं महसूस होगा झटका, पटरियों में इस्तेमाल होगी स्विंग-नोज तकनीकव्यापार
24 सित॰ 2026, 1:39 pm (2 घंटे पहले)· 0

मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रूट पर 320 किमी की गति में भी नहीं महसूस होगा झटका, पटरियों में इस्तेमाल होगी स्विंग-नोज तकनीक

मुंबई और अहमदाबाद के बीच प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर पर 320 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने वाली बुलेट ट्रेन में पटरी बदलते वक्त यात्रियों को झटका नहीं लगेगा। इसके लिए ट्रैक पर मूवेबल क्रॉसिंग और कैंटेड टर्नआउट तकनीक लागू की जा रही है।

देश के महत्वाकांक्षी हाई-स्पीड रेल प्रोजेक्ट का काम आगे बढ़ रहा है और यात्रियों के सफर को आरामदायक बनाने के लिए कई अत्याधुनिक इंजीनियरिंग उपाय किए जा रहे हैं। मुंबई-अहमदाबाद रूट पर चलने वाली पहली बुलेट ट्रेन की डिजाइन गति 320 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है। इतनी भीषण रफ्तार के बावजूद जब गाड़ी एक ट्रैक से दूसरे ट्रैक पर शिफ्ट होगी, तब डिब्बों के भीतर यात्रियों को किसी भी तरह का तेज झटका या असंतुलन महसूस नहीं होगा। पटरियों की डिजाइन और बनावट को इस तरह तैयार किया जा रहा है जिससे ट्रेन के पहियों को लगातार समतल सतह मिलती रहे।

पारंपरिक पटरियों का गैप और हाई-स्पीड की चुनौती

साधारण रेलवे पटरियों पर जब दो लाइनें आपस में क्रॉस करती हैं, तो उनके जोड़ पर एक बारीक खुला गैप मौजूद होता है। कम गति वाली गाड़ियों के पहिए जब इस जोड़ से गुजरते हैं, तो हल्का झटका और घड़घड़ाहट होती है, जिसे सामान्य गति में आसानी से झेल लिया जाता है। 320 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने वाली बुलेट ट्रेन के मामले में यह खुला गैप संरचनात्मक सुरक्षा और यात्री सुविधा के लिहाज से बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। इसी तकनीकी अड़चन को समाप्त करने के लिए पूरे मार्ग पर आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों को अपनाया जा रहा है।

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मूवेबल क्रॉसिंग से तैयार होगी निरंतर रेल सतह

पटरियों के जोड़ों पर आने वाले व्यवधान को रोकने के लिए मूवेबल क्रॉसिंग तकनीक लगाई जा रही है, जिसे तकनीकी भाषा में स्विंग-नोज क्रॉसिंग भी कहा जाता है। आम क्रॉसिंग में पहियों के कटने वाले स्थान पर खुला हिस्सा रहता है, जबकि इस आधुनिक व्यवस्था में पॉइंट मशीन की मदद से रेल के नोज वाले हिस्से को तुरंत सटीक सीध में सरका दिया जाता है। इस बदलाव से क्रॉसिंग के ऊपर पटरियों की एक बिल्कुल निर्बाध और निरंतर सतह तैयार हो जाती है। जब ट्रेन के पहिए वहां से निकलते हैं, तो वे किसी खुले जोड़ से टकराने के बजाय सीधी रेल पर बिना रुके फिसलते हैं, जिससे कंपन और ट्रैक पर पड़ने वाला यांत्रिक दबाव दोनों काफी घट जाते हैं।

कैंटेड टर्नआउट से नियंत्रित रहेगा साइड खिंचाव

ट्रेन के एक ट्रैक से दूसरे ट्रैक पर मुड़ने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने के लिए कैंटेड टर्नआउट का इस्तेमाल किया जा रहा है। आमतौर पर मोड़ पर ट्रेन के मुड़ते ही यात्रियों को बाहर की ओर एक तेज साइड फोर्स महसूस होता है। कैंटेड टर्नआउट प्रणाली में मुड़ने वाली पटरी को एक विशेष तिरछा झुकाव दिया जाता है, जिसमें बाहरी रेल का तल भीतरी रेल की तुलना में थोड़ा ऊंचा रखा जाता है। यह ज्यामितीय ढलान मोड़ पर पैदा होने वाले साइड खिंचाव को पूरी तरह संतुलित कर देता है, जिससे बोगी के अंदर बैठे यात्रियों को न तो कोई झटका लगता है और न ही शरीर पर असामान्य दबाव बनता है।

डिजिटल निगरानी और सिग्नलिंग का सुरक्षा घेरा

पटरियों के इस पूरे हाई-स्पीड नेटवर्क की हर पल निगरानी के लिए बहुस्तरीय स्वचालित तंत्र तैनात किए जा रहे हैं। इसके तहत आधुनिक पॉइंट मशीन, सुरक्षा इंटरलॉकिंग और स्वचालित रेल पहचान प्रणाली को आपस में जोड़ा गया है। यह डिजिटल नेटवर्क ट्रेन के पहुंचने से पहले ही यह स्कैन करके पुष्टि कर लेगा कि ट्रैक, जोड़ और क्रॉसिंग सही स्थिति में लॉक हो चुके हैं।

508 किलोमीटर लंबा कॉरिडोर और अंडरसी सुरंग

मुंबई और अहमदाबाद के बीच तैयार हो रहा यह हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर कुल 508 किलोमीटर लंबा है। इस मार्ग पर कुल 12 स्टेशन बनाए जाने प्रस्तावित हैं। परियोजना की एक प्रमुख विशेषता मुंबई के करीब बनने वाला लगभग 21 किलोमीटर का भूमिगत खंड है, जिसके तहत ठाणे क्रीक के गहरे पानी के नीचे देश की पहली अंडरसी रेल टनल का निर्माण भी शामिल है।

सवाल-जवाब

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन की डिजाइन स्पीड कितनी है?
इस बुलेट ट्रेन की डिजाइन स्पीड 320 किलोमीटर प्रति घंटा रखी गई है।
तेज रफ्तार में ट्रैक बदलते समय झटका क्यों नहीं लगेगा?
पटरियों पर मूवेबल क्रॉसिंग और कैंटेड टर्नआउट तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे पटरियों का गैप खत्म हो जाता है और ट्रैक को संतुलित झुकाव मिलता है।
मूवेबल या स्विंग-नोज क्रॉसिंग कैसे काम करती है?
इसमें पॉइंट मशीन की मदद से रेल के नोज वाले हिस्से को सरकाकर गैप को बंद कर दिया जाता है, जिससे पहियों को लगातार समतल सतह मिलती है।
कैंटेड टर्नआउट का क्या फायदा है?
इसमें ट्रैक की बाहरी रेल को अंदर वाली रेल से थोड़ा ऊंचा रखा जाता है, जिससे मोड़ पर लगने वाला साइड खिंचाव संतुलित हो जाता है और यात्री झटके से बचते हैं।
मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की कुल लंबाई कितनी है?
यह हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर लगभग 508 किलोमीटर लंबा है।
इस पूरे कॉरिडोर में कितने स्टेशन प्रस्तावित हैं?
इस परियोजना के तहत मुंबई से अहमदाबाद के बीच कुल 12 स्टेशन प्रस्तावित किए गए हैं।
क्या इस रूट पर कोई अंडरसी टनल भी बन रही है?
हां, मुंबई के पास ठाणे क्रीक के नीचे लगभग 21 किलोमीटर लंबे भूमिगत हिस्से में भारत की पहली अंडरसी रेल टनल बनाई जा रही है।
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