नागौर की जिस खुशबूदार पान मैथी ने अपनी विशिष्ट पहचान भारत के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भी कायम की है, उसकी व्यावसायिक दिशा अब पूरी तरह बदलने वाली है। यह बहुमूल्य उपज अब केवल खेतों तक सीमित एक साधारण कृषि उत्पाद नहीं रहेगी, बल्कि इसे अपना एक बेहद सुगठित और खास बाजार मिलने जा रहा है। राज्य सरकार ने एक बड़ा कदम उठाते हुए मूंडवा के गौण मंडी यार्ड को पान मैथी की 'विशिष्ट मंडी' घोषित कर दिया है। इस बाजार को पूरी तरह आधुनिक और सुविधा संपन्न बनाने के लिए 32 बीघा जमीन के हस्तांतरण को भी हरी झंडी दे दी गई है। सरकार के इस अहम फैसले से नागौर में पान मैथी की खेती, उसके व्यापार के तरीके और इस फसल की समग्र ब्रांड वैल्यू को एक नया आयाम मिलेगा।
किसानों की पुरानी परेशानी का अंत
लंबे समय से इस खास उपज को पैदा करने वाले किसानों को कई तरह की बुनियादी और आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। उपज की भारी मांग होने के बावजूद, किसानों के पास अपनी फसल को सही कीमत पर बेचने के लिए कोई एक उपयुक्त जगह नहीं थी। किसानों को अपना माल अलग-अलग सामान्य मंडियों में ले जाना पड़ता था, जिसके कारण उन्हें न तो अपनी मेहनत का उचित मूल्य मिल पाता था और न ही वे बड़े खरीदारों तक सीधे पहुंच पाते थे। अब विशिष्ट मंडी का दर्जा मिलने के बाद, मूंडवा पान मैथी के सबसे बड़े और प्रमुख व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित होगा। एक ही स्थान पर आधुनिक सुविधाओं से लैस खरीद-बिक्री की व्यवस्था होने से किसानों का शोषण रुकेगा और उन्हें एक पारदर्शी बाजार मिलेगा।
नई जमीन पर बनेंगी आधुनिक सुविधाएं
मंडी के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए जो 32 बीघा जमीन दी जा रही है, वह पहले एग्रो फूड पार्क के लिए आवंटित की गई थी। अब इस क्षेत्र को राजस्व रिकॉर्ड में सीधे मंडी के नाम पर दर्ज किया जाएगा। इस अतिरिक्त और विशाल भूमि के मिलने से मंडी परिसर का पूरा नक्शा बदल जाएगा। यहां फसल को सुरक्षित रखने के लिए बड़े गोदाम, पारदर्शी बोली के लिए आधुनिक नीलामी प्लेटफॉर्म और वाहनों के लिए व्यवस्थित पार्किंग का निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा, दूर-दराज से आने वाले किसानों के ठहरने और उनकी सुविधा के लिए विशेष इंतजाम होंगे। क्षेत्र के किसानों का स्पष्ट कहना है कि नागौर की पान मैथी अपनी बेजोड़ गुणवत्ता की वजह से पूरे देश में एक अलग रुतबा रखती है, लेकिन अब तक इसके स्तर का कोई बाजार उपलब्ध नहीं था। नए फैसले के बाद किसानों में यह उम्मीद जागी है कि अब उनकी बेशकीमती उपज को हमेशा सही और बड़ा दाम मिलेगा।
ब्रांडिंग और अंतरराष्ट्रीय बाजार के खुलेंगे रास्ते
इस नई मंडी का लाभ केवल फसल बिकने तक सीमित नहीं होगा। कृषि विशेषज्ञ विनोद चौधरी ने स्पष्ट किया है कि जब भी किसी विशेष फसल के लिए कोई अलग मंडी स्थापित होती है, तो उस उत्पाद की गुणवत्ता बनाए रखने, उसकी ब्रांडिंग करने और बाजार के विस्तार में भारी मदद मिलती है। मूंडवा में इस विशिष्ट बाजार के शुरू होने से पान मैथी की सही ग्रेडिंग और सुरक्षित पैकेजिंग का काम आसान हो जाएगा। इससे किसान सीधे देश के बड़े और थोक व्यापारियों से जुड़ सकेंगे। इसका सीधा असर यह होगा कि किसानों को फसल के ज्यादा दाम मिलेंगे और नागौर की पान मैथी का राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचना काफी सरल हो जाएगा।
स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई रफ्तार
विशेषज्ञ चौधरी के मुताबिक, सरकार का यह फैसला सिर्फ एक मंडी के विस्तार का मामला नहीं है, बल्कि यह पूरे नागौर जिले की कृषि पर आधारित अर्थव्यवस्था को एक मजबूत आधार देगा। जैसे-जैसे इस नई मंडी में पान मैथी का व्यापार बढ़ेगा, वैसे-वैसे परिवहन, माल का भंडारण, पैकेजिंग और कृषि उद्योग से जुड़े दूसरे कई व्यवसायों में भी जबर्दस्त तेजी आएगी। विशिष्ट मंडी के संचालन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे, जिससे पूरे इलाके की आर्थिक गतिविधियों में एक बड़ा उछाल देखने को मिलेगा।
आगे का रास्ता और किसानों की उम्मीदें
फिलहाल नागौर के किसानों की पूरी नजर इस बात पर टिकी है कि जमीन हस्तांतरण की कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद, मंडी के निर्माण और विकास का काम जमीन पर कितनी तेजी से शुरू होता है। यदि इस विशिष्ट मंडी को सभी आधुनिक सुविधाओं के साथ तय समय सीमा के भीतर विकसित कर लिया जाता है, तो नागौर की पान मैथी को पूरे देश में एक बेहद मजबूत और विश्वसनीय कृषि ब्रांड के रूप में स्थापित होने से कोई नहीं रोक सकेगा। विशेषज्ञों और किसानों दोनों का मानना है कि आने वाले कुछ ही वर्षों में यह फैसला हजारों किसानों की आमदनी को बढ़ाने और नागौर क्षेत्र की एक नई व्यावसायिक पहचान बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।


















