नेपाल में हाल में आई प्राकृतिक आपदा के कारण भारत के साथ होने वाले द्विपक्षीय व्यापार पर गहरा असर पड़ा है। पड़ोसी देश में सड़कों और परिवहन बुनियादी ढांचे को पहुंचे नुकसान के कारण सीमावर्ती इलाकों में मालवाहक वाहनों की आवाजाही पूरी तरह थम गई है। भारत-नेपाल सीमा पर स्थित प्रमुख सोनौली बॉर्डर पर माल से भरे सैकड़ों ट्रकों की कतार 16 किलोमीटर से भी अधिक दूरी तक फैल चुकी है। इस मार्ग के बाधित होने से व्यापारी, मालवाहक चालकों के साथ-साथ स्थानीय प्रशासन की चिंताएं बढ़ गई हैं, क्योंकि यही रास्ता दोनों देशों के बीच अरबों रुपये के वार्षिक कारोबार का मुख्य जरिया है।
सीमावर्ती नौतनवा क्षेत्र तक फैला लंबा जाम
नेपाल के भीतर काठमांडू सहित विभिन्न शहरों को जोड़ने वाले प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग बाढ़ और भूस्खलन की वजह से जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इस वजह से भारत से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति लेकर जाने वाले ट्रक नेपाल की सीमा में दाखिल नहीं हो पा रहे हैं। सोनौली सीमा पर बने इस भारी गतिरोध के कारण ट्रकों की लंबी कतार नौतनवा क्षेत्र तक पहुंच गई है, जिससे राष्ट्रीय राजमार्ग पर सामान्य यातायात का संचालन भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए सीमा क्षेत्र में तैनात सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस बल लगातार मौके पर मुस्तैद हैं। वे राष्ट्रीय राजमार्ग पर यातायात को नियंत्रित करने और अव्यवस्था को रोकने के लिए कड़ी मशक्कत कर रहे हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि यदि नेपाल की तरफ क्षतिग्रस्त सड़कों की मरम्मत का काम जल्द पूरा नहीं हुआ और आवाजाही बहाल नहीं की गई, तो आपूर्ति शृंखला पर इसका असर और गंभीर हो जाएगा। इससे दोनों देशों के बीच दैनिक उपयोग की वस्तुओं की भारी कमी और सामान पहुंचने में अनिश्चितकालीन देरी का सामना करना पड़ सकता है।
सोनौली मार्ग से होता है 6 से 7 हजार करोड़ का व्यापार
भारत और नेपाल के बीच होने वाले आर्थिक लेनदेन में सोनौली बॉर्डर बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। आंकड़ों के अनुसार, इस रास्ते से महज 2 महीने की अवधि में ही भारत और नेपाल के बीच लगभग 1,600 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार दर्ज किया गया है। यदि वार्षिक आधार पर देखा जाए, तो अकेले इस सोनौली सीमा मार्ग से ही हर साल करीब 6 से 7 हजार करोड़ रुपये का माल इधर से उधर भेजा जाता है।
कुल मिलाकर, भारत और नेपाल के बीच सालाना द्विपक्षीय व्यापार का आकार लगभग 9 से 10 अरब डॉलर के बीच रहता है। सोनौली मार्ग से नेपाल जाने वाले प्रमुख सामानों में मुख्य रूप से ईंधन, खाद्यान्न और अनाज, वाहन और उनके ऑटो पार्ट्स, विभिन्न प्रकार की मशीनरी, लोहे और स्टील के उत्पाद, जीवनरक्षक दवाएं, इलेक्ट्रिकल उपकरण और दैनिक उपभोग की अन्य आवश्यक वस्तुएं शामिल हैं। बाढ़ के कारण परिवहन ठप होने से इन सभी महत्वपूर्ण सामग्रियों की आपूर्ति पर सीधा असर पड़ा है।
काठमांडू में फंसे लोगों का दर्द और कुशीनगर में तटबंध पर निगरानी
नेपाल में आई इस भीषण बाढ़ ने वहां रोजगार की तलाश में गए उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के निवासियों के जीवन को भी प्रभावित किया है। सोनौली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले जगन्नाथपुर गांव के निवासी राज कुमार गौतम पिछले 1 साल से नेपाल की राजधानी काठमांडू में फर्नीचर का काम कर रहे थे। बाढ़ के भयावह हालात के बीच वे किसी तरह अपनी जान बचाकर वापस अपने गांव लौट रहे हैं।
राज कुमार गौतम ने फोन के जरिए अपने परिवार से संपर्क कर वहां के विकराल हालातों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि नेपाल में बाढ़ की वजह से कई परिवार पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं और चारों तरफ घबराहट का माहौल है। लोग अपनी जान बचाने के लिए सुरक्षित ठिकानों की ओर भाग रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, पड़ोसी जिले कुशीनगर में प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। अधिकारियों ने नरवाजोत से लेकर अहिरौली तक फैले 17.5 किलोमीटर लंबे तटबंध पर सुरक्षा और निगरानी बढ़ा दी है, ताकि बाढ़ के किसी भी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके।



















