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फिरोजाबाद की कांच की चूड़ियां: जान जोखिम में डालकर 1 घंटे में 320 कटिंग, हाथ आते हैं सिर्फ 50 रुपएव्यापार
17 जून 2026, 6:23 pm (43 दिन पहले)· 2

फिरोजाबाद की कांच की चूड़ियां: जान जोखिम में डालकर 1 घंटे में 320 कटिंग, हाथ आते हैं सिर्फ 50 रुपए

फिरोजाबाद के कारीगर ग्राइंडर पर कांच की चूड़ियां काटते हुए हर रोज जान का जोखिम उठाते हैं, लेकिन इस मेहनत के बदले उन्हें बेहद मामूली मजदूरी ही नसीब होती है।

उत्तर प्रदेश का फिरोजाबाद शहर कांच की चूड़ियों की चमक के लिए देशभर में पहचाना जाता है। यहां की गलियों से लेकर कारखानों तक चूड़ियों की खनक हर तरफ गूंजती रहती है, और लगभग हर घर किसी न किसी रूप में इस कारोबार से जुड़ा हुआ है। मगर जिस चमक को बाजार में सजा देखकर खरीदार मोहित होते हैं, उसके पीछे की मेहनत और जोखिम पर शायद ही किसी की नजर जाती है।

चमक के पीछे का जोखिम भरा काम

एक चूड़ी के बाजार तक पहुंचने से पहले कई हाथों से होकर गुजरती है। कारखाने में बनने के बाद सादा चूड़ियों को कटिंग के लिए लाया जाता है, और यही कटिंग का चरण सबसे खतरनाक माना जाता है। कटाई पूरी होने के बाद ही इन्हें सजाने और बाजार भेजने की बारी आती है। दिक्कत यह है कि इतने जोखिम भरे काम के बदले कारीगरों के हाथ बेहद कम कमाई आती है।

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ग्राइंडर पर चलती है नाजुक मेहनत

फिरोजाबाद के रसूलपुर इलाके में चूड़ियों की कटिंग करने वाले कारीगर मोहम्मद अशरफ ने TrendKia से बातचीत में बताया कि यह काम बेहद रिस्की है। सबसे पहले कारखाने से सादा चूड़ियां कटिंग के लिए मंगाई जाती हैं, फिर कारीगर उन्हें तराशने का काम शुरू करते हैं।

कांच की इन चूड़ियों को ग्राइंडर की मदद से काटकर नई-नई डिजाइनों में ढाला जाता है। कारीगर ग्राइंडर चलाते हुए हर चूड़ी पर अलग-अलग नक्काशी उकेरते हैं। इस दौरान कई बार नाजुक कांच टूट भी जाता है, फिर भी कारीगर जोखिम उठाकर लगातार यह काम करते रहते हैं। कटिंग पूरी हो जाने के बाद ही ये चूड़ियां बाजार में सजने के लायक बनती हैं। इसके बाद दूसरे कारीगर कटे हुए हिस्सों पर गोल्डन रंग की पॉलिश चढ़ाते हैं, जिससे इनकी चमक और भी निखर उठती है।

एक घंटे में 320 चूड़ियां

कारीगर ने बताया कि हर रोज चूड़ियों के गुच्छे इस अड्डे पर लाए जाते हैं और यहीं पर इनकी कटाई होती है। कारीगर पूरे दिन इसी काम में जुटे रहते हैं। रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि करीब एक घंटे में 320 चूड़ियां कटकर तैयार हो जाती हैं।

मेहनत ज्यादा, मजदूरी मामूली

इतनी बारीकी और खतरे वाले काम के बावजूद कारीगरों को सिर्फ ₹50 से लेकर डेढ़ सौ रुपए तक की मजदूरी मिल पाती है। अगर काम अच्छा चलता रहे तो एक कारीगर दिनभर में ज्यादा से ज्यादा ₹300 तक कमा पाता है, और इतनी कमाई में उसका घर-गृहस्थी चलाना भी मुश्किल हो जाता है।

सवाल-जवाब

फिरोजाबाद की कांच की चूड़ियों की कटिंग खतरनाक क्यों मानी जाती है?
क्योंकि कारीगर ग्राइंडर से नाजुक कांच की चूड़ियां काटते हैं, जो कई बार टूट जाती हैं और कारीगरों को जान का जोखिम उठाना पड़ता है।
एक घंटे में कितनी चूड़ियां कट कर तैयार होती हैं?
एक कुशल कारीगर करीब एक घंटे में 320 चूड़ियां काटकर तैयार कर लेता है।
इस काम के लिए कारीगरों को कितनी मजदूरी मिलती है?
कारीगरों को ₹50 से लेकर डेढ़ सौ रुपए तक मजदूरी मिलती है, और अच्छा काम चलने पर एक दिन में अधिकतम ₹300 तक की कमाई हो पाती है।
कटिंग के बाद चूड़ियों पर और क्या किया जाता है?
कटिंग के बाद दूसरे कारीगर कटे हुए हिस्सों पर गोल्डन रंग की पॉलिश लगाते हैं, जिससे चूड़ियों की चमक और बढ़ जाती है।
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