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रांची कृषि मेले में सजी अनोखी ऑर्गेनिक शहद की स्टॉल, पंच तुलसी और जामुन जैसे स्वादों ने बटोरी सुर्खियांव्यापार
19 जून 2026, 7:48 pm (45 दिन पहले)· 2

रांची कृषि मेले में सजी अनोखी ऑर्गेनिक शहद की स्टॉल, पंच तुलसी और जामुन जैसे स्वादों ने बटोरी सुर्खियां

रांची में तीन दिवसीय कृषि व्यापार मेले में एक स्टॉल पर सात तरह की विशेष ऑर्गेनिक शहद उपलब्ध है, जिसमें जामुन, सहजन और पंच तुलसी जैसे अनूठे स्वाद शामिल हैं, जो अपनी पौष्टिकता और औषधीय गुणों के कारण लोगों को आकर्षित कर रहे हैं।

झारखंड की राजधानी रांची में मोराबादी मैदान में चल रहे तीन दिवसीय कृषि व्यापार मेले में किसानों के अनोखे उत्पाद आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं. इसी कड़ी में, रांची के बुढ़मू प्रखंड के एक शहद स्टॉल ने लोगों का विशेष ध्यान खींचा है. इस स्टॉल पर सामान्य शहद के अलावा सात तरह की खास ऑर्गेनिक शहद पेश की जा रही है, जो अपने बेमिसाल स्वाद, पौष्टिकता और औषधीय फायदों के कारण खूब चर्चा में है.

सात तरह की विशेष ऑर्गेनिक शहद उपलब्ध

स्टॉल के संचालक राधाकांत गिरी ने TrendKia को बताया कि आजकल बाजार में ज्यादातर एक या दो तरह की शहद ही मिलती है. लेकिन उनके स्टॉल पर खास किस्म की शहद की एक विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध है. इसमें जामुन शहद, सहजन (मोरिंगा) शहद, लीची शहद, करंज शहद, पंच तुलसी शहद, रॉक शहद और स्थानीय देशी शहद शामिल हैं. इन विशेष शहद की कीमतें 400 रुपये से लेकर 600 रुपये प्रति किलो तक हैं. खास बात यह है कि देशी मधुमक्खियों द्वारा तैयार की गई शुद्ध शहद 1600 रुपये प्रति किलो के भाव से बिक रही है.

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प्राकृतिक विधि से शहद का उत्पादन

राधाकांत गिरी ने शहद उत्पादन की प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया. उन्होंने कहा कि मधुमक्खी पालन से साल भर शहद उत्पादन संभव नहीं है, यह मुख्य रूप से छह महीने तक ही चलता है. विशेष प्रकार की शहद बनाने के लिए, जिस पौधे या पेड़ के फूल से वह शहद तैयार करनी है, उसके फूल खिलने के समय मधुमक्खी के बक्से उसी क्षेत्र के पास लगाए जाते हैं. मधुमक्खियां इन फूलों से रस इकट्ठा करती हैं और पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से शहद का निर्माण करती हैं.

सहजन और जामुन जैसे फूलों से विशेष शहद

गिरी के अनुसार, सहजन (मोरिंगा) को 'सुपरफूड' माना जाता है, क्योंकि इसमें भरपूर मात्रा में कैल्शियम, आयरन, एंटीऑक्सीडेंट और अन्य आवश्यक पोषक तत्व होते हैं. सहजन के फूलों के मौसम में, मधुमक्खी बक्से उनके आसपास रखे जाते हैं, जिससे सहजन के फूलों के गुणों वाली विशेष शहद तैयार होती है. इसी तरह, जामुन और लीची के फूलों के मौसम में, उनके बागों के पास बक्से स्थापित किए जाते हैं, ताकि उन फलों के फूलों से विशिष्ट गुणों वाली शहद बन सके.

शुद्धता और गुणवत्ता का भरोसा

शहद तैयार होने के बाद, इसे किसी भी तरह की रासायनिक प्रक्रिया से गुजारे बिना, पूरी तरह प्राकृतिक ढंग से साफ किया जाता है. इसके बाद, स्वच्छ पैकेजिंग में उपभोक्ताओं तक पहुंचाया जाता है. राधाकांत गिरी का कहना है कि इसी शुद्धता और प्राकृतिक प्रक्रिया के कारण इन विशेष शहद की मांग लगातार बढ़ रही है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि शुद्ध शहद की कोई निश्चित 'एक्सपायरी डेट' नहीं होती. हालांकि, इसके उपयोग और भंडारण में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए. शहद में पानी या नमी बिल्कुल नहीं जानी चाहिए. सही तरीके से भंडारित की गई शहद अपनी गुणवत्ता को लंबे समय तक बनाए रखती है.

सवाल-जवाब

रांची कृषि मेले में किस खास चीज़ का स्टॉल लोगों को आकर्षित कर रहा है?
रांची के बुढ़मू प्रखंड के एक स्टॉल पर सात तरह की विशेष ऑर्गेनिक शहद लोगों को आकर्षित कर रही है, जिसमें जामुन, सहजन, लीची, करंज, पंच तुलसी, रॉक और देशी शहद शामिल हैं.
इन विशेष ऑर्गेनिक शहद की कीमतें क्या हैं?
इन शहद की कीमतें 400 रुपये से 600 रुपये प्रति किलो तक हैं, जबकि देशी मधुमक्खियों द्वारा तैयार विशेष शहद 1600 रुपये प्रति किलो की दर से बेची जा रही है.
शहद उत्पादन की प्रक्रिया कैसे काम करती है?
विशेष शहद बनाने के लिए, मधुमक्खी के बक्से उस पौधे या पेड़ के फूल आने के समय के आसपास लगाए जाते हैं, जिससे मधुमक्खियां प्राकृतिक रूप से रस इकट्ठा कर शहद बनाती हैं.
क्या शुद्ध शहद की कोई एक्सपायरी डेट होती है?
स्टॉल संचालक के अनुसार, शुद्ध शहद की कोई निश्चित एक्सपायरी डेट नहीं होती है, बशर्ते उसे सही तरीके से संग्रहित किया जाए और उसमें नमी न जाए.
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