ब्रिटेन की राजधानी लंदन में अमेरिकी दूतावास के बाहर शनिवार को आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने 139 लोगों को हिरासत में लिया। यह प्रदर्शन ब्रिटेन में प्रतिबंधित प्रत्यक्ष कार्रवाई संगठन फिलिस्तीन एक्शन के समर्थन में आयोजित किया गया था। सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, पकड़े गए अधिकांश लोगों पर एक गैरकानूनी और प्रतिबंधित संगठन के प्रति समर्थन प्रदर्शित करने का आरोप है। पुलिस दल दूतावास परिसर के बाहर तैनात रहा और अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मामले में और भी गिरफ्तारियां हो सकती हैं।
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई से ठीक पहले हुआ शक्ति प्रदर्शन
अमेरिकी दूतावास के बाहर यह प्रदर्शन 4 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली महत्वपूर्ण अपील से ठीक पहले आयोजित किया गया। इस कानूनी मामले में फिलिस्तीन एक्शन को दिए गए आतंकवादी संगठन के दर्जे को औपचारिक रूप से चुनौती दी गई है। समूह से जुड़े समर्थकों का कहना है कि सरकार द्वारा लगाया गया यह प्रतिबंध बेहद दमनकारी है और यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के बुनियादी अधिकार का खुला उल्लंघन करता है। उल्लेखनीय है कि इसी सिलसिले में अगस्त के महीने में अमेरिकी सरकार ने भी फिलिस्तीन एक्शन के खिलाफ वित्तीय और रणनीतिक प्रतिबंधों की घोषणा की थी।
दूतावास के बाहर जुटे प्रदर्शनकारियों में बड़ी संख्या में सेवानिवृत्त बुजुर्ग नागरिक मौजूद थे। वहां मौजूद कई लोगों के हाथों में तख्तियां थीं जिन पर लिखा था कि वे नरसंहार का विरोध करते हैं और फिलिस्तीन एक्शन का समर्थन करते हैं। विरोध के दौरान एक प्रदर्शनकारी दूतावास के नजदीक स्थित एक पेड़ पर चढ़ गया और एक प्लेकार्ड लहराया। उस तख्ती पर लिखा था कि ईश्वर हमारी मदद करे, फिलिस्तीन का समर्थन करने वाले शिक्षक, फिलिस्तीन एक्शन।
डिफेंड अवर ज्यूरीज़ का दावा और कड़े आतंकवाद विरोधी कानून
इस विरोध प्रदर्शन की रूपरेखा तैयार करने में सहयोग करने वाले नागरिक संगठन डिफेंड अवर ज्यूरीज़ ने बताया कि हाल के महीनों में कानूनी हिरासत के मामलों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस अधिकार समूह के अनुसार, जुलाई 2025 से अब तक 4,000 से अधिक लोगों को सुरक्षा बलों द्वारा हिरासत में लिया जा चुका है। संगठन ने सार्वजनिक बयान देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से खड़े होकर नरसंहार का विरोध करने और फिलिस्तीन एक्शन के समर्थन में मौन प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ आतंक विरोधी कानूनों के तहत 4,000 से अधिक लोगों को पकड़ना बेहद निराशाजनक स्थिति है।
ब्रिटिश सरकार ने पिछले वर्ष प्रत्यक्ष कार्रवाई करने वाले इस समूह को आतंकवादी संगठन घोषित करते हुए पूरी तरह गैरकानूनी करार दिया था। इस प्रतिबंध के लागू होने के बाद फिलिस्तीन एक्शन की सदस्यता लेना या किसी भी तरह से इसका समर्थन जताना एक गंभीर आपराधिक कृत्य माना जाता है। इस कानून के तहत दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति को 14 वर्ष तक की कैद की अधिकतम सजा हो सकती है। मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने दोहराया कि शनिवार को की गई धरपकड़ मुख्य रूप से प्रतिबंधित समूह को सार्वजनिक तौर पर समर्थन देने के आधार पर ही की गई है।
स्कॉटलैंड के एडिनबर्ग में भी दिखा असर
लंदन के साथ-साथ स्कॉटलैंड के एडिनबर्ग शहर में भी अमेरिकी वाणिज्य दूतावास के बाहर इसी तरह का एक शांतिपूर्ण मौन प्रदर्शन आयोजित किया गया था। एडिनबर्ग में एकत्र हुए लोगों ने भी ठीक उसी तरह के बैनर और प्लेकार्ड प्रदर्शित किए जैसे लंदन के अमेरिकी दूतावास के सामने देखे गए थे। हालांकि, एडिनबर्ग के आयोजन स्थल से किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी दर्ज नहीं की गई।
गिरफ्तारी न होने के बावजूद पुलिस स्कॉटलैंड ने कहा कि प्रतिबंधित संगठन के प्रति समर्थन जताने वाले संदिग्धों की पहचान करने के लिए गहन जांच जारी है। स्कॉटलैंड पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि प्रदर्शन से जुड़ी दृश्य सामग्री और साक्ष्यों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है। पुलिस प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि साक्ष्यों की समीक्षा पूरी होने के बाद कानूनी दायरे में उचित कदम उठाए जाएंगे। पुलिस की यह जांच खासतौर पर उन लोगों पर केंद्रित है जो प्रदर्शन के दौरान विशेष टी-शर्ट और बैनर लिए देखे गए थे, हालांकि जांच के घेरे में कितने लोग हैं इसकी सटीक संख्या उजागर नहीं की गई।
फिलिस्तीन एक्शन की पृष्ठभूमि और पिछले सैन्य टकराव
फिलिस्तीन एक्शन की स्थापना वर्ष 2020 में हुई थी, जिसका घोषित उद्देश्य इजरायल के लिए ब्रिटेन के सैन्य समर्थन को पूरी तरह बंद कराना है। संगठन का आरोप है कि इजरायल फिलिस्तीनी नागरिकों के खिलाफ नरसंहार कर रहा है, जबकि इजरायल इस तरह के सभी आरोपों का कड़ा खंडन करता रहा है। फिलिस्तीन एक्शन का यह भी तर्क है कि वह इजरायली सैन्य औद्योगिक तंत्र को सहायता पहुंचाने वाले कॉर्पोरेट तंत्र को बाधित करके इस कथित नरसंहार को रोकना चाहता है।
अपने इस एजेंडे को लेकर समूह ने पिछले कुछ वर्षों में कई हाई-प्रोफाइल प्रत्यक्ष कार्रवाइयों को अंजाम दिया है। वर्ष 2024 में समूह के कार्यकर्ता इजरायली हथियार निर्माता एलबिट सिस्टम्स यूके के एक कारखाने में जबरन घुस गए थे। पुलिस की जांच रिपोर्ट के अनुसार, उस दौरान कार्यकर्ताओं ने स्लेजहैमर और लोहे की छड़ों (क्रोबार) का इस्तेमाल करके कारखाने के भारी उपकरणों को तोड़ दिया था। इसके बाद जून 2025 में कार्यकर्ताओं ने रॉयल एयर फोर्स के एक सैन्य अड्डे में प्रवेश किया और वहां खड़े दो टैंकर विमानों को भारी नुकसान पहुंचाया।
जून 2025 की उस घटना में कार्यकर्ताओं ने विमानों के इंजनों के भीतर लाल रंग का पेंट स्प्रे कर दिया था और लोहे की छड़ों से तोड़फोड़ मचाई थी। इन प्रत्यक्ष कार्रवाइयों के बाद से ही समूह सरकारी जांच एजेंसियों की कड़ी निगरानी में आ गया था। अब ब्रिटेन की सुप्रीम कोर्ट में 4 नवंबर को होने वाली सुनवाई इस बात की कानूनी समीक्षा करेगी कि फिलिस्तीन एक्शन पर लगाया गया आतंकी संगठन का ठप्पा कानूनी रूप से वैध है या नहीं।





















