वाशिंगटन ने अफ्रीका के साथ अपने दीर्घकालिक व्यापार तंत्र में बड़ा फेरबदल करते हुए दक्षिण अफ्रीका और रवांडा को शुल्क मुक्त व्यापार समझौते से अलग करने का कदम उठाया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय की ओर से जारी एक आधिकारिक घोषणा के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप दोनों देशों को अफ्रीकी विकास और अवसर अधिनियम (AGOA) की पात्रता सूची से बाहर करेंगे। यह व्यवस्था 1 जनवरी 2027 से लागू होगी, जिसके बाद दोनों देशों के चुनिंदा निर्यातों को अमेरिकी बाजार में मिलने वाली बिना सीमा शुल्क वाली पहुंच समाप्त हो जाएगी।
पात्रता शर्तों और राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जेमिसन ग्रीर ने पुष्टि की कि इस निर्णय के संबंध में डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी कांग्रेस के साथ-साथ दोनों देशों की सरकारों को भी औपचारिक सूचना भेज दी है। ग्रीर के अनुसार, पात्रता से जुड़ी अनिवार्य शर्तों को पूरा न करने, व्यापार में बाधाएं खड़ी करने और अमेरिकी विदेश नीति से जुड़े हितों के टकराव के कारण यह कदम उठाया गया है। अमेरिकी पक्ष ने आरोप लगाया कि संबंधित देशों की नीतियां अमेरिकी व्यापार और निवेश को कमजोर बनाती हैं। इसके अलावा ऐसी गतिविधियों का भी उल्लेख किया गया जो अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा हितों के लिए खतरा पैदा करती हैं।
हालांकि जारी किए गए आधिकारिक बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि किन विशिष्ट व्यापारिक बाधाओं या सुरक्षा चिंताओं के आधार पर यह फैसला हुआ है। जेमिसन ग्रीर ने कहा कि कारणों में व्यापारिक रुकावटें और सुरक्षा संबंधी मामले शामिल हैं, लेकिन दायरा केवल यहीं तक सीमित नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी प्रशासन अपने अफ्रीकी साझेदारों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने पर काम कर रहा है कि वे पात्रता के मानदंडों को पूरा करने के लिए आवश्यक कदम उठाएं, क्योंकि नियमों के तहत सुधार करने वाले देशों के लिए कार्यक्रम में वापसी का रास्ता खुला रहता है।
अगोआ की पृष्ठभूमि और द्विपक्षीय तनाव
अफ्रीकी विकास और अवसर अधिनियम की शुरुआत वर्ष 2000 में बिल क्लिंटन के राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान हुई थी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य अफ्रीकी महाद्वीप के देशों को अमेरिकी बाजार में विशिष्ट उत्पादों के लिए शुल्क मुक्त व्यापार पहुंच प्रदान करके आर्थिक प्रोत्साहन देना है। वर्तमान में 30 से अधिक अफ्रीकी देश इस व्यवस्था के दायरे में शामिल हैं और वे इसे अपनी अर्थव्यवस्था तथा निर्यात के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानते हैं। इस तंत्र में बने रहने के लिए हर वर्ष पात्रता की समीक्षा की जाती है, जिसमें बाजार आधारित आर्थिक सुधार, कानून का शासन और अमेरिकी निवेश व व्यापार के रास्ते में आने वाली बाधाओं को दूर करने जैसी शर्तें शामिल हैं।
दक्षिण अफ्रीका के संदर्भ में यह निर्णय दोनों देशों के बीच पहले से चले आ रहे कूटनीतिक तनाव को और गहरा करता है। पिछले सप्ताह अमेरिका ने अटलांटा में आयोजित ग्रुप ऑफ 20 (G20) के विदेश मंत्रियों के सम्मेलन से दक्षिण अफ्रीका को अलग रखा था। डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के दौरान दोनों देशों के संबंधों में उल्लेखनीय गिरावट देखी गई है। अमेरिकी प्रशासन ने दक्षिण अफ्रीका की अश्वेत नेतृत्व वाली सरकार पर श्वेत विरोधी नीतियां अपनाने के आरोप लगाए हैं।
नीतिगत विवाद और भूमि सुधार कानून पर मतभेद
दक्षिण अफ्रीका की घरेलू नीतियों को लेकर भी वाशिंगटन ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। अमेरिकी पक्ष ने दक्षिण अफ्रीका की सरकार पर अल्पसंख्यक श्वेत किसानों के खिलाफ व्यापक हिंसा को बढ़ावा देने का आरोप लगाया, जिसे दक्षिण अफ्रीका ने पूरी तरह खारिज करते हुए खुद को श्वेत विरोधी होने से इनकार किया है। इसके अलावा ईरान के साथ दक्षिण अफ्रीका के राजनयिक संबंधों और इजराइल को लेकर उसके रुख पर भी सवाल उठाए गए हैं। अमेरिका का कहना है कि अश्वेत समुदाय के स्वामित्व को बढ़ावा देने वाले सकारात्मक कार्रवाई नियम अमेरिकी कंपनियों के निवेश को सीमित करते हैं।
अमेरिका ने दक्षिण अफ्रीकी प्रशासन पर दबाव बनाया कि वह किसानों के खिलाफ होने वाले अपराधों को प्राथमिकता वाले अपराधों की श्रेणी में रखे और अमेरिकी कंपनियों को प्रभावित करने वाले सकारात्मक कार्रवाई नियमों में संशोधन करे। इसके साथ ही वाशिंगटन ने उस विवादित भूमि कानून को वापस लेने की भी मांग की, जो कुछ विशेष मामलों में बिना मुआवजे के निजी भूमि के अधिग्रहण की अनुमति देता है।
दक्षिण अफ्रीका में अमेरिकी राजदूत एल ब्रेंट बोजेल III ने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि यह निर्णय दोनों पक्षों के बीच नीतिगत मतभेदों का परिणाम है। एल ब्रेंट बोजेल III के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका द्वारा अनुरोधित सुधारों को लागू न करने के कारण यह निलंबन हुआ है। उन्होंने लिखा, "यह एक ऐसा नतीजा था जिसका अंदेशा पहले से था और जिसे टाला जा सकता था, लेकिन दक्षिण अफ्रीका की सरकार ने अमेरिकी सरकार द्वारा उठाई गई वास्तविक चिंताओं को अस्वीकार कर दिया।"
रवांडा पर प्रतिबंध और पूर्व में हटाए गए देश
दक्षिण अफ्रीका के विदेश मंत्री रोनाल्ड लामोला ने पिछले महीने स्पष्ट किया था कि उनका देश इस व्यापार कार्यक्रम को लेकर सबसे खराब स्थिति का सामना करने की तैयारी कर रहा है। रोनाल्ड लामोला ने जोर देकर कहा था कि दक्षिण अफ्रीका अमेरिकी मांगों के सामने अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करेगा। दक्षिण अफ्रीकी अधिकारियों ने पहले ही संकेत दे दिए थे कि इस सूची से बाहर किए जाने का कदम संभावित था।
दूसरी ओर, रवांडा को बाहर करने का फैसला पूर्वी कांगो में चल रहे संघर्ष से जुड़े हालिया घटनाक्रमों के बाद आया है। पिछले सप्ताह अमेरिका ने रवांडा के रक्षा मंत्रालय पर कड़े प्रतिबंध लगाए थे। वाशिंगटन ने इन प्रतिबंधों को खनिज संपन्न पूर्वी कांगो में सरकारी सुरक्षा बलों के खिलाफ लड़ रहे M23 विद्रोही गुट को मिलने वाले समर्थन से जोड़ा था।
कार्यक्रम के इतिहास में यह पहला अवसर नहीं है जब किसी देश को बाहर किया गया हो। इससे पहले जो बाइडन के कार्यकाल के दौरान लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं और मानवाधिकार संबंधी चिंताओं के आधार पर कई देशों को बाहर किया गया था। तख्तापलट के बाद बुर्किना फासो, गैबॉन और नाइजर की सदस्यता समाप्त कर दी गई थी, जबकि सख्त समलैंगिकता विरोधी कानून लागू करने पर युगांडा को इस लाभ से वंचित किया गया था। यदि 1 जनवरी 2027 से पहले स्थितियां नहीं बदलती हैं, तो दक्षिण अफ्रीका और रवांडा दोनों को अमेरिकी बाजार में मिलने वाली यह रियायती व्यापारिक सुविधा गंवानी पड़ेगी।














