अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में आने वाले वर्षों के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है। दिग्गज निवेश बैंकिंग फर्म गोल्डमैन सैक्स के ताजा विश्लेषण से संकेत मिलते हैं कि वर्ष 2027 तक कच्चे तेल की दरें लुढ़ककर 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच सकती हैं। दुनिया भर में कच्चे तेल की आपूर्ति व्यवस्था में हो रहे निरंतर सुधार और मांग में आ रही सुस्ती के चलते बाजार धीरे-धीरे अधिशेष यानी सरप्लस की स्थिति में प्रवेश कर रहा है। हालांकि, पश्चिम एशिया में अमेरिका, इज़रायल और ईरान के बीच गहराते रणनीतिक टकराव की वजह से अल्पावधि में कीमतें सामान्य से अधिक समय तक ऊंचे पायदान पर टिकी रह सकती हैं।
दिसंबर 2026 और 2027 के लिए मूल्य अनुमान में बदलाव
गोल्डमैन सैक्स के वैश्विक कमोडिटी रिसर्च के सह-प्रमुख और तेल बाजार विश्लेषण प्रमुख डान स्ट्रुवेन की तैयार की गई एक विस्तृत रिपोर्ट में आगामी वर्षों के मूल्य परिदृश्य को स्पष्ट किया गया है। फर्म के नए अनुमान के अनुसार, बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वर्ष 2026 के दिसंबर महीने में लगभग 90 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर सकता है। इससे पहले कंपनी ने दिसंबर 2026 के लिए 85 डॉलर प्रति बैरल का स्तर छूने की संभावना जताई थी, जिसे अब पांच डॉलर बढ़ा दिया गया है। इसके बाद, आपूर्ति की स्थिति और अधिक सामान्य होने के साथ ही वर्ष 2027 के दौरान ब्रेंट क्रूड की सालाना औसत कीमत गिरकर 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास सिमट जाने की उम्मीद जताई गई है।
सप्लाई की किल्लत में आई भारी गिरावट
वैश्विक ऊर्जा संतुलन के आंकड़ों पर गौर करें तो आपूर्ति की भारी कमी काफी हद तक दूर हो चुकी है। मिडिल ईस्ट के प्रमुख उत्पादक क्षेत्रों से तेल निर्यात में आई तेजी, फारस की खाड़ी के बाहरी इलाकों में उत्पादन में हुई बढ़ोतरी और खपत की कमजोर रफ्तार ने मिलकर आपूर्ति के घाटे को लगभग समाप्त कर दिया है। आंकड़ों के मुताबिक, मार्च के महीने में दुनिया भर में तेल की आपूर्ति का घाटा 7.2 मिलियन बैरल प्रतिदिन के चिंताजनक स्तर पर पहुंच गया था। इसके विपरीत, सितंबर के महीने में बाजार लगभग पूरी तरह संतुलित नजर आया, जहां वैश्विक मांग दैनिक उत्पादन से मात्र 0.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन ही अधिक दर्ज की गई। यह स्पष्ट करता है कि उत्पादन और वितरण तंत्र में कितनी तेज गति से सुधार हुआ है।
2026 की अंतिम तिमाही में सरप्लस बनेगा वैश्विक तेल बाजार
विश्लेषकों का स्पष्ट अनुमान है कि साल 2026 की चौथी तिमाही तक अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में आपूर्ति मांग से अधिक हो जाएगी। यह सरप्लस की स्थिति वर्ष 2027 के पूरे दौर में लगातार बनी रह सकती है, जिसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों को नीचे धकेलने के रूप में सामने आएगा। फारस की खाड़ी से होने वाले कच्चे तेल के कुल निर्यात की बात करें तो सितंबर महीने के अंत तक यह सुधरकर वर्ष 2025 के औसत स्तर के करीब पहुंच गया है। तेल निर्यातक देशों और व्यापारिक कंपनियों ने मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव और संघर्ष भरे माहौल के बीच अपने परिवहन तंत्र और लॉजिस्टिक्स क्षमता का तेजी से विस्तार किया है, जिससे तेल की सुरक्षित डिलीवरी सुनिश्चित हुई है।
हाजिर बाजार में मजबूत कीमतें और भंडारण की कमी
दीर्घकालिक नरमी के अनुमानों के बावजूद, मौजूदा समय में आपूर्ति जोखिमों के चलते कच्चे तेल की कीमतें काफी ऊंचे स्तरों पर टिकी हुई हैं। तत्काल डिलीवरी वाले फिजिकल ब्रेंट क्रूड के सौदे 130 डॉलर प्रति बैरल के आंकड़े को पार कर चुके हैं। इसी तरह बेंचमार्क ब्रेंट फ्यूचर्स भी हालिया दौर में 100 डॉलर प्रति बैरल के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक स्तर से ऊपर कारोबार करते देखे गए हैं। इस बाजार स्थिति पर टिप्पणी करते हुए डान स्ट्रुवेन ने कहा, "फिजिकल कीमतें ऊंची बनी हुई हैं क्योंकि तनाव बढ़ने से डिलीवरी पर खतरा है, जबकि ग्लोबल लेवल पर इन्वेंट्री रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब है, जिससे स्टॉक फिर से भरने की मजबूत मांग पैदा हो रही है।"
पच्चीस डॉलर का रिस्क प्रीमियम और मांग में गिरावट
रिपोर्ट में इस बात को रेखांकित किया गया है कि वर्तमान में कच्चे तेल की कीमतों के भीतर तकरीबन 25 डॉलर प्रति बैरल का अतिरिक्त रिस्क प्रीमियम जुड़ा हुआ है। यह अतिरिक्त मूल्य इस डर को दर्शाता है कि यदि पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव और भड़कता है, तो महत्वपूर्ण जलमार्गों से आपूर्ति ठप हो सकती है और भंडार और ज्यादा खाली हो सकते हैं। मांग के मोर्चे पर विश्लेषण करने पर सुस्ती के स्पष्ट संकेत मिले हैं। वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कुल खपत में सालाना आधार पर 3.3 मिलियन बैरल प्रतिदिन की तेज गिरावट आई है। मांग में इस कमजोरी का सबसे बड़ा प्रभाव चीन, पश्चिम एशियाई देशों और विकसित एशियाई अर्थव्यवस्थाओं में देखा गया है।
गोल्डमैन सैक्स का मानना है कि जैसे-जैसे रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पादों की उपलब्धता बढ़ेगी और इनकी लागत आम उपभोक्ताओं के लिए किफायती होगी, खपत में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल सकता है। इसके बावजूद, फर्म का अनुमान है कि 2027 की अंतिम तिमाही में वैश्विक स्तर पर तेल की मांग किसी बड़े झटके के बिना रहने वाली संभावित स्थिति के मुकाबले 0.7 मिलियन बैरल प्रतिदिन कम रहेगी। इस स्थायी कमी के पीछे दुनिया भर में इलेक्ट्रिक वाहनों का तेजी से बढ़ता उपयोग और चीनी बाजार में पारंपरिक ईंधन खपत की आदतों में आ रहा संरचनात्मक बदलाव मुख्य रूप से जिम्मेदार है।



















