पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य टकराव के बीच बीजिंग ने अपनी आर्थिक रणनीति को नई धार दी है. भू-सामरिक तनाव के माहौल में जहां कई देश सतर्क रुख अपना रहे हैं, वहीं चीनी नेतृत्व इसे अपने व्यावसायिक प्रभाव को विस्तृत करने के एक सुनहरे मौके के रूप में देख रहा है. वर्षों से तेहरान के साथ घनिष्ठ आर्थिक रिश्ते बनाए रखने वाले चीन ने अब अरब मुल्कों की तरफ भी अपनी वित्तीय उपस्थिति तेजी से बढ़ाई है. दोनों पक्षों के बीच चल रही तनातनी में संतुलन साधते हुए चीनी वित्तीय संस्थानों ने एलएनजी के दुनिया के सबसे प्रमुख उत्पादक राष्ट्र कतर को एक बहुत बड़ा वित्तीय संबल मुहैया कराया है.
कतरएनर्जी को मिला 3 अरब डॉलर का ऋण
कतर की प्रमुख सरकारी हाइड्रोकार्बन फर्म कतरएनर्जी को चीनी बैंकिंग क्षेत्र की ओर से 3 अरब डॉलर, यानी भारतीय मुद्रा में लगभग 28 हजार करोड़ रुपये की विशाल वित्तीय मदद सौंपी गई है. इस ऋण समझौते का समय बेहद अहम है, क्योंकि यह कदम ऐसे दौर में उठाया गया है जब चीन के पुराने रणनीतिक साझीदार ईरान का अरब राष्ट्रों और अमेरिका के साथ व्यापक युद्ध चल रहा है. इस भू-राजनीतिक उथल-पुथल की परवाह किए बिना चीन ने अपने ऊर्जा हितों को साधने के लिए अरब देशों में पूंजी निवेश को नई गति दी है.
ऋण की शर्तें और भागीदार चीनी बैंक
इस बड़े वित्तीय सौदे को अंतिम रूप देने में चीन के शीर्ष सरकारी वित्तीय संस्थानों का गठजोड़ शामिल रहा है. इनमें बैंक ऑफ चाइना, इंडस्ट्रियल एंड कॉमर्शियल बैंक ऑफ चाइना, एग्रीकल्चर बैंक ऑफ चाइना तथा चाइना कंस्ट्रक्शन बैंक ने मिलकर यह धनराशि उपलब्ध कराई है. तय व्यवस्था के अनुसार, इस पूरे कर्ज की चुकौती अवधि 5 वर्ष निर्धारित की गई है. वहीं ब्याज दरों का ढांचा अंतरराष्ट्रीय ओवरनाइट फाइनेंसिंग रेट के आधार पर तय किया गया है, जिसमें बेंचमार्क दर की तुलना में लगभग 0.50 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज लागू होगा.



















