विश्व बैंक ने भारत के आर्थिक परिदृश्य पर अपना भरोसा जताते हुए वित्तीय वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए देश की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर का अनुमान बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया है। इससे पहले जारी किए गए अनुमान में इस दर के 6.6 प्रतिशत रहने की बात कही गई थी। संस्था की ओर से मंगलवार, 6 अक्टूबर को जारी दक्षिण एशिया आर्थिक अद्यतन (South Asia Economic Update) में यह सकारात्मक बदलाव वित्तीय वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के दौरान दर्ज की गई अप्रत्याशित मजबूती के आधार पर किया गया है।
मजबूत शुरुआत ने तय की बेहतर अनुमान की जमीन
अर्थव्यवस्था ने वित्तीय वर्ष 2026-27 की अप्रैल से जून तिमाही के दौरान 7.8 प्रतिशत की विकास दर हासिल की थी। इस जोरदार प्रदर्शन ने पूरे वर्ष के लिए आधार को काफी मजबूत बना दिया, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय संस्था को अपने पूर्व अनुमान में संशोधन करना पड़ा। इससे पहले वित्तीय वर्ष 2025-26 (FY26) में भारत की अर्थव्यवस्था के 7.8 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान लगाया गया था। यह आंकड़ा वित्तीय वर्ष 2024-25 में दर्ज 7.2 प्रतिशत की वृद्धि दर से काफी बेहतर था, और साथ ही अप्रैल में लगाए गए 7.6 प्रतिशत के पूर्व अनुमान से भी अधिक रहा।
आगामी वर्षों के लिए मध्यम अवधि का परिदृश्य
ताजा आर्थिक आकलन के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में आर्थिक विस्तार की रफ्तार थोड़ी सामान्य होकर 7.1 प्रतिशत पर आ सकती है। हालांकि, वित्तीय वर्ष 2027-28 (FY28) में इसमें फिर से हल्का सुधार देखने को मिलेगा और इसके 7.2 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान जताया गया है। यह रुझान दर्शाता है कि भले ही वैश्विक स्तर पर अनिश्चितताएं मौजूद हों, लेकिन घरेलू मोर्चे पर भारतीय अर्थव्यवस्था एक स्थिर और टिकाऊ वृद्धि पथ पर अग्रसर है।
औद्योगिक और सेवा क्षेत्र की मजबूती बनाम कृषि की चिंताएं
विकास की राह मजबूत दिखने के बावजूद कृषि क्षेत्र की स्थिति को अर्थव्यवस्था के सामने एक संभावित जोखिम के रूप में रेखांकित किया गया है। बैंक ने कहा, "औद्योगिक और सेवा गतिविधियों में मजबूती से कृषि में कमजोरी के कुछ असर की भरपाई होने की उम्मीद है। हालांकि, उम्मीद से बड़ा मानसून घाटा कृषि उत्पादन और ग्रामीण मांग को प्रभावित कर सकता है।" अगर वर्षा का वितरण असंतुलित रहता है, तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उपभोग पर इसका प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
ऊर्जा लागत, मुद्रास्फीति और चालू खाता संतुलन
वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की ऊंची कीमतों से जुड़े दबावों को लेकर बताया गया है कि सरकारी कदमों और मजबूत घरेलू मांग ने अब तक भारतीय बाजार को बड़े झटकों से सुरक्षित रखा है। इसके बावजूद, मुद्रास्फीति का स्तर वर्ष 2027 तक ऊंचा बने रहने की संभावना जताई गई है। यह स्थिति परिवारों के मासिक उपभोग खर्च और केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति के निर्णयों को प्रभावित करने में प्रमुख भूमिका निभाएगी। वहीं विदेशी व्यापार के मोर्चे पर स्थिति संतुलित रही है, जहां वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान भारत का चालू खाता घाटा (CAD) जीडीपी के मात्र 0.6 प्रतिशत तक सीमित रखने में सफलता मिली थी।
पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र में विस्तार की गति तेज
भारत के साथ ही पूरे दक्षिण एशियाई क्षेत्र के आर्थिक अनुमानों को भी ऊपर की ओर संशोधित किया गया है। वर्ष 2026 में दक्षिण एशिया की कुल वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पहले के 6.3 प्रतिशत के पूर्वानुमान से अधिक है। वर्ष 2027 के लिए इस क्षेत्र की विकास दर 6.7 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया गया है। इस तेज गति के साथ यह क्षेत्र वैश्विक स्तर पर सबसे तेजी से बढ़ते उभरते बाजार क्षेत्रों में अपनी अग्रणी स्थिति बनाए रखेगा।


















