अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त करने और वहां की दिग्गज कंपनियों में व्यावहारिक अनुभव हासिल करने का सपना हर साल लाखों भारतीय छात्र देखते हैं। यदि आप F-1 स्टूडेंट वीजा पर अमेरिकी विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत हैं या वहां जाने की योजना बना रहे हैं, तो पाठ्यक्रम से जुड़े कार्य अनुभवों को समझने के लिए CPT यानी करिकुलम प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और OPT यानी ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग के प्रावधानों को बारीकी से जानना बेहद आवश्यक है। ये दोनों अमेरिकी आव्रजन नियमों के तहत विदेशी छात्रों को दिए जाने वाले कानूनी अधिकार हैं, जिनकी मदद से वे अपनी अकादमिक शिक्षा के साथ-साथ अमेरिका में रोजगार का अनुभव भी प्राप्त कर सकते हैं। नियमों की सही जानकारी न होने या किसी अनजाने उल्लंघन की वजह से छात्रों का वीजा स्टेटस भी खतरे में पड़ सकता है।
CPT और OPT की मूलभूत परिभाषाएं
व्यावहारिक दृष्टि से CPT और OPT दो अलग-अलग चरणों पर काम करने की अनुमति प्रदान करते हैं। CPT अनिवार्य रूप से पढ़ाई के दौरान की जाने वाली इंटर्नशिप या व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए तैयार किया गया है, जो छात्र के मुख्य अध्ययन विषय का एक अहम हिस्सा होता है। इसके विपरीत, OPT का उपयोग मुख्य रूप से डिग्री पूरी होने के बाद अमेरिका में अस्थायी नौकरी करने के लिए किया जाता है। संक्षेप में कहें तो CPT आपकी शैक्षणिक डिग्री के साथ-साथ चलने वाली इंटर्नशिप है, जबकि OPT पढ़ाई खत्म होने के उपरांत हासिल किया जाने वाला पेशेवर कार्य अनुभव है।
करिकुलम प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (CPT) की कार्यप्रणाली
CPT एक ऐसा वर्क ऑथराइजेशन है जो F-1 वीजा धारक छात्रों को उनकी डिग्री की पढ़ाई जारी रहने के दौरान ही काम करने की अनुमति देता है। इसके तहत किया जाने वाला कार्य या इंटर्नशिप सीधे तौर पर छात्र के मुख्य विषय यानी मेजर से संबंधित होना अनिवार्य है। साथ ही, यह प्रशिक्षण छात्र के पाठ्यक्रम या कोर्स वर्क का औपचारिक हिस्सा होना चाहिए। CPT को दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है: पार्ट-टाइम (जिसमें प्रति सप्ताह 20 घंटे तक काम करने की छूट मिलती है) और फुल-टाइम (जिसमें प्रति सप्ताह 20 घंटे से अधिक काम किया जा सकता है)। इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए छात्र को किसी बाहरी आव्रजन एजेंसी के चक्कर नहीं काटने पड़ते, बल्कि संबंधित विश्वविद्यालय के नामित स्कूल अधिकारी यानी DSO की आधिकारिक स्वीकृति ही पर्याप्त होती है।
ऑप्शनल प्रैक्टिकल ट्रेनिंग (OPT) का ढांचा
OPT छात्रों को अपनी डिग्री से संबंधित क्षेत्र में अमेरिका में काम करने का अवसर देता है। CPT से अलग, OPT का मुख्य रूप से इस्तेमाल पढ़ाई पूरी होने के बाद (Post-Completion OPT) किया जाता है। इसके तहत किसी भी विषय के छात्र को ग्रेजुएशन के बाद 12 महीने तक अमेरिका में रहकर नौकरी करने की अनुमति मिलती है। हालांकि, यदि कोई छात्र साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग या मैथमेटिक्स यानी STEM बैकग्राउंड से डिग्री पूरी करता है, तो उसे 24 महीने का अतिरिक्त एक्सटेंशन प्रदान किया जाता है। इस STEM विस्तार की मदद से ऐसे छात्र अमेरिका में कुल 3 साल यानी 36 महीने तक काम करने का कानूनी अधिकार प्राप्त कर लेते हैं।
CPT और OPT के बीच 4 महत्वपूर्ण अंतर
दोनों वर्क परमिट के बीच के बुनियादी अंतरों को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से समझा जा सकता है
- कार्य करने की समयावधि: CPT का लाभ केवल पढ़ाई जारी रहने के दौरान (ग्रेजुएशन से पहले) उठाया जा सकता है। वहीं, OPT का मुख्य इस्तेमाल डिग्री पूरी होने के उपरांत रोजगार हासिल करने के लिए किया जाता है।
- स्वीकृति और दस्तावेज प्रक्रिया: CPT की मंजूरी सीधे विश्वविद्यालय का अंतर्राष्ट्रीय छात्र कार्यालय (DSO) प्रदान करता है, जिसके लिए अलग से किसी सरकारी कार्ड की आवश्यकता नहीं होती। इसके उलट, OPT के लिए यूनाइटेड स्टेट्स सिटीजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज यानी USCIS में औपचारिक आवेदन जमा करना होता है, जिसके बाद बाकायदा EAD यानी एम्प्लॉयमेंट ऑथराइजेशन डॉक्यूमेंट कार्ड जारी किया जाता है।
- पाठ्यक्रम से जुड़ाव: CPT के लिए यह अनिवार्य शर्त है कि नौकरी या इंटर्नशिप छात्र के एकेडमिक करिकुलम या क्रेडिट आवर्स का हिस्सा हो। दूसरी ओर, OPT के लिए केवल यह जरूरी है कि रोजगार छात्र के अध्ययन क्षेत्र से जुड़ा हो; उसका कोर्स का सीधा हिस्सा होना आवश्यक नहीं है।
- 12 महीने का विशेष नियम: यदि कोई छात्र अपनी पढ़ाई के दौरान कुल मिलाकर 12 महीने या उससे अधिक समय तक 'फुल-टाइम CPT' कर लेता है, तो वह ग्रेजुएशन के बाद OPT का लाभ उठाने की पात्रता हमेशा के लिए खो देता है। इसलिए CPT के दिनों की गणना करते समय अत्यधिक सावधानी बरतना आवश्यक है।
अंतरराष्ट्रीय छात्रों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश
अमेरिका में पढ़ाई शुरू करते ही छात्रों को अपने विश्वविद्यालय के DSO से संपर्क करके CPT और OPT की शर्तों की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर लेनी चाहिए। यदि आप पढ़ाई के दौरान फुल-टाइम इंटर्नशिप चुनते हैं, तो यह सुनिश्चित करें कि उसकी कुल अवधि 12 महीने से कम रहे। उचित योजना और नियमों के पालन से छात्र इन दोनों अवसरों का अधिकतम लाभ उठाकर अपने करियर को मजबूत बना सकते हैं।



















