बस्तर संभागीय मुख्यालय जगदलपुर सहित पूरे जिले में बाढ़ के हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के असर से लगातार पांच दिनों तक भारी बारिश दर्ज की गई है। इसके साथ ही, पड़ोसी राज्य उड़ीसा के खातिगुड़ा डेम से भी भारी मात्रा में पानी छोड़ा गया है, जिससे इंद्रावती नदी और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बेहद तेजी से ऊपर उठ गया है। नदियों के इस उफान के चलते कई गांव, बस्तियां और निचले इलाके पूरी तरह से पानी में डूब गए हैं और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है।
प्रवीर और विजय वार्ड बने जलमग्न
जगदलपुर शहर के प्रवीर वार्ड, विजय वार्ड और महादेव घाट जैसे इलाकों में तेजी से पानी भर गया है। शुरुआती दौर में स्थानीय निवासियों को यह उम्मीद थी कि बाढ़ का यह पानी जल्द ही उतर जाएगा, जिसके चलते लोग अपने घरों के भीतर ही रुके रहे। हालांकि, इंद्रावती नदी का जलस्तर अचानक और अधिक बढ़ने से चारों तरफ पानी भर गया और लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गईं। राहत की बात यह रही कि बारिश थमने के बाद रविवार की शाम को जलस्तर में कुछ कमी आनी शुरू हुई है।
एमआई-17 हेलिकॉप्टर से चलाया गया रेस्क्यू
घरों में पानी तेजी से भरने के बाद बस्तर पुलिस प्रशासन, निगम प्रशासन, एसडीआरएफ और नगर सेना ने मिलकर युद्धस्तर पर बचाव अभियान शुरू किया। बाढ़ बचाव दल ने पिछले दो दिनों में कुल 817 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। वहीं, अंदरूनी और दुर्गम क्षेत्रों में फंसे 16 लोगों को भारतीय वायुसेना के एमआई-17 हेलिकॉप्टर की मदद से एयरलिफ्ट कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। विजय वार्ड के वार्ड पार्षद गौतम पाणिग्रही के अनुसार भी क्षेत्र के हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं और लगातार निगरानी रखी जा रही है।
42 राहत शिविरों में 4798 लोगों ने ली शरण
इस भीषण बाढ़ की वजह से कई लोगों के कच्चे-पक्के मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं और घरों में रखा जरूरी सामान तथा राशन पानी में बह गया है। जिला प्रशासन ने स्थिति से निपटने के लिए पूरे बस्तर जिले में कुल 42 राहत शिविर स्थापित किए हैं। इन शिविरों में कुल 4,798 बाढ़ प्रभावित लोगों ने शरण ले रखी है। इनमें से शहर के भीतर बनाए गए 7 राहत शिविरों में 1,808 लोग ठहरे हुए हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के 35 शिविरों में 2,990 लोग रह रहे हैं।
भोजन और चिकित्सा सुविधाओं का प्रबंध
प्रशासन की तरफ से इन सभी राहत शिविरों में महिलाओं, पुरुषों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों के लिए खाने-पीने और अन्य जरूरी बुनियादी सुविधाओं का पूरा इंतजाम किया गया है। इसके अलावा, शहर की तमाम सामाजिक संस्थाएं और जागरूक स्थानीय नागरिक भी खुलकर मदद के लिए आगे आए हैं। ये लोग शिविरों में पहुंचकर प्रभावितों को भोजन, नाश्ता, पेयजल, फल और बिस्किट वितरित कर रहे हैं, ताकि किसी को भी किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
प्रशासन की मुस्तैदी और आगे का खतरा
प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार जगदलपुर में फिलहाल बारिश का सिलसिला थम चुका है। हालांकि, इंद्रावती नदी का जलस्तर अभी भी ऊंचा बना हुआ है, जिसके कारण खतरा पूरी तरह टला नहीं है। अधिकारियों का मानना है कि पानी को पूरी तरह उतरने में अभी दो से तीन दिनों का वक्त और लग सकता है। गौर करने वाली बात यह है कि बस्तर में इससे पहले ठीक ऐसी ही भीषण बाढ़ वर्ष 2010 में आई थी। फिलहाल, किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में पूरी तरह मुस्तैद हैं।



















