छत्तीसगढ़ में सड़क, रेल पटरी और गांव तक पहुंचने वाली कनेक्टिविटी की रफ्तार 2014 के बाद के वर्षों में पहले के मुकाबले काफी तेज हो गई है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि सड़क, रेल, ग्रामीण सड़क और इंटरनेट, हर मोर्चे पर पिछले एक दशक में निर्माण और निवेश दोनों ने रफ्तार पकड़ी है।
अप्रैल 2014 से अब तक राज्य में 3,389 किलोमीटर से ज्यादा लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग बनाए जा चुके हैं। भारतमाला परियोजना के तहत छत्तीसगढ़ को 471 किलोमीटर हाईवे प्रोजेक्ट्स आवंटित हुए हैं, जिनमें से 291 किलोमीटर का निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। ये परियोजनाएं राज्य से गुजरने वाले बड़े सड़क गलियारों को चौड़ा और मजबूत बनाने की कोशिश का हिस्सा हैं।
रेल लाइन बिछाने की रफ्तार करीब 17 गुना बढ़ी
सबसे बड़ा उछाल रेलवे के आंकड़ों में नजर आता है। 2009 से 2014 के बीच छत्तीसगढ़ में हर साल औसतन सिर्फ 6.4 किलोमीटर नई पटरी बिछाई जाती थी। वहीं 2014 से 2026 के बीच यह सालाना औसत बढ़कर 109 किलोमीटर से ज्यादा हो गया, यानी करीब 17 गुना की छलांग। इन दोनों अवधियों के बीच का यह फासला बताता है कि 2014 के बाद रेल निर्माण की गतिविधियों ने कितनी तेजी पकड़ी। इसी 2014-2026 अवधि में राज्य में कुल मिलाकर 1,311 किलोमीटर नई रेल लाइन चालू की जा चुकी है।
रेलवे के लिए मिलने वाला सालाना बजट भी उसी अनुपात में बढ़ा है। 2009-14 के दौरान छत्तीसगढ़ के लिए औसत वार्षिक आवंटन करीब 311 करोड़ रुपये था, जो 2026-27 में बढ़कर करीब 7,470 करोड़ रुपये तक जा पहुंचा है। इसके अलावा मार्च 2023 में राज्य के पूरे ब्रॉडगेज नेटवर्क का बिजलीकरण भी पूरा कर लिया गया, यानी अब इन रूटों पर ट्रेनें बिजली से चलती हैं, डीजल इंजन पर निर्भरता खत्म हो गई है।
गांव-गांव तक पहुंचीं सड़कें, हजारों बस्तियां जुड़ीं
हाईवे और रेल के अलावा गांव की सड़कों पर भी काफी काम हुआ है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत छत्तीसगढ़ में अब तक 44,828 किलोमीटर ग्रामीण सड़कें पूरी हो चुकी हैं, जिससे 10,691 बस्तियों को सड़क कनेक्टिविटी मिल पाई है। मकसद यह है कि दूरदराज की बस्तियों को नजदीकी कस्बों और बाजारों तक हर मौसम में आने-जाने लायक पक्का रास्ता मिल सके।
अब गांव डिजिटल हाईवे से भी जुड़ रहे हैं
छत्तीसगढ़ में कनेक्टिविटी की कहानी अब सिर्फ सड़क और पटरी तक सीमित नहीं रह गई है। भारतनेट योजना के जरिए गांवों को इंटरनेट से जोड़ने का काम भी तेज हुआ है। अगस्त 2026 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक छत्तीसगढ़ की 11,682 ग्राम पंचायतों को संशोधित भारतनेट योजना के तहत कवर करने की योजना है, जबकि 8,328 गांवों में मांग आधारित यानी जरूरत पड़ने पर इंटरनेट कनेक्शन देने का प्रावधान रखा गया है। यह प्रावधान इसलिए रखा गया है ताकि मुख्य भारतनेट रोलआउट से बाहर रह गए गांव भी बाद में कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकें।
कुल मिलाकर, पिछले एक दशक में छत्तीसगढ़ की कनेक्टिविटी सिर्फ किलोमीटर के आंकड़ों में नहीं बदली है। बल्कि गांव से कस्बे, कस्बे से राजधानी और राज्य से देश के बड़े आर्थिक केंद्रों तक पहुंचना पहले के मुकाबले कहीं आसान हो गया है।





















