छत्तीसगढ़ के कृषि क्षेत्र में इन दिनों किसानों की मुश्किलें बढ़ती हुई नजर आ रही हैं। बालोद जिले के विभिन्न गांवों में उगाई जा रही गन्ने की फसलों पर रस चूसने वाले कीटों ने हमला बोल दिया है। कृषि विज्ञान केंद्र बालोद के प्रमुख वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. के.आर. साहू ने इस स्थिति को लेकर किसानों को आगाह किया है कि खेतों में ब्लैक फ्लाई यानी काला चींटा और पायरिला कीट भारी मात्रा में सक्रिय हो गए हैं। अगर समय रहते इनकी रोकथाम के लिए आवश्यक कदम नहीं उठाए गए, तो गन्ने की पैदावार और पौधों की लंबाई पर इसका बुरा असर पड़ सकता है।
काले धब्बों और पत्तियों के पीलेपन से पहचानें खतरा
डॉ. साहू के विश्लेषण के अनुसार, जब खेतों में ब्लैक फ्लाई का हमला होता है, तो गन्ने की पत्तियों के ऊपर काले रंग के निशान उभरने लगते हैं। ये कीट पौधे की पत्तियों से सारा रस खींच लेते हैं, जिसके परिणामस्वरूप पत्तियों के किनारे पीले पड़ने शुरू हो जाते हैं। यदि संक्रमण का स्तर बढ़ जाए, तो पत्तियां पूरी तरह सूख जाती हैं और गन्ने के पौधों का विकास थम जाता है।
आम चींटी और ब्लैक फ्लाई में अंतर
कृषि विज्ञान केंद्र के दल द्वारा जब खेतों का मुआयना किया गया, तो एक बड़ी गलतफहमी सामने आई। कई किसान इस घातक कीट को साधारण चींटी मानकर नजरअंदाज कर रहे हैं। वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि सामान्य चींटियां आकार में बड़ी और गहरे काले रंग की होती हैं, जबकि यह कीट छोटे आकार का, हल्के भूरे रंग का और बहुत तेजी से हरकत करने वाला होता है।
पायरिला कीट और प्राकृतिक दुश्मनों का संरक्षण
गन्ने की फसल को नुकसान पहुँचाने वाले पायरिला कीट को लेकर भी विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत बताई गई है। वैज्ञानिकों ने निर्देश दिए हैं कि पायरिला के शरीर पर दिखने वाली सफेद फंगस जैसी जाली को किसी भी स्थिति में नष्ट न किया जाए। यह जाली प्राकृतिक तरीके से कीट नियंत्रण में सहायक होती है। इसके अलावा, खेत के भीतर मौजूद मित्र कीटों की रक्षा करना भी फसल की सेहत के लिए अनिवार्य है।
कीटनाशकों के छिड़काव के लिए जरूरी निर्देश
रस चूसने वाले इन कीटों पर लगाम कसने के लिए डॉ. साहू ने थायोमेथॉक्साम आधारित दवा के प्रयोग का सुझाव दिया है। किसानों को निर्देशित किया गया है कि वे एक ग्राम दवा को प्रति लीटर पानी में अच्छी तरह घोलकर खेतों में छिड़काव करें। गन्ना अगर बड़ा और घना हो चुका है, तो ऐसी स्थिति में पावर स्प्रेयर या आधुनिक ड्रोन तकनीक का उपयोग किया जा सकता है। हालांकि, ड्रोन से छिड़काव करते वक्त फसल की मोटाई और कवरेज का विशेष ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
इसके अतिरिक्त, बाजार में उपलब्धता को ध्यान में रखते हुए पैरॉक्सीफाम 10.8% EC और बिफेंथ्रिन 10% EC का इस्तेमाल करने से पूर्व किसानों को स्थानीय कृषि विशेषज्ञों से सलाह लेनी चाहिए। विशेषज्ञों ने यह भी सलाह दी है कि किसी भी कीटनाशक रसायन का प्रयोग हमेशा पंजीकृत लेबल पर दी गई फसल, कीट के प्रकार और निश्चित मात्रा के अनुसार ही किया जाना चाहिए।



















