छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में एक किसान ने राष्ट्र सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों के प्रति कृतज्ञता जताने का अनूठा रास्ता चुना है। किसान लोकेंद्र साहू ने अपनी ही कृषि भूमि का एक हिस्सा देश के नाम समर्पित करते हुए वहां एक अनूठा शहीद स्मारक तैयार किया है। उनका मानना है कि सरहद पर जान न्योछावर करने वाले सैनिकों का कर्ज देशवासी कभी पूरी तरह नहीं चुका सकते, लेकिन अपनी जमीन पर उनकी यादें संजोकर वे एक नागरिक के तौर पर अपनी श्रद्धा व्यक्त करने की कोशिश कर रहे हैं।
कारगिल से लेकर पुलवामा तक के अमर बलिदानियों की प्रतिमाएं
सड़क के किनारे स्थित इस खेत में स्थापित मूर्तियों में भारतीय सेना और सुरक्षा बलों के विभिन्न ऐतिहासिक अभियानों में शहीद हुए जवानों को स्थान दिया गया है। इस स्मारक में वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध, 26/11 के मुंबई आतंकी हमले, विषम मौसम वाली सियाचिन ग्लेशियर की चौकी, पुलवामा आत्मघाती हमले और अन्य आतंकी मुठभेड़ों में वीरगति पाने वाले 18 शूरवीरों की प्रतिमाएं लगाई गई हैं। मुख्य मार्ग से गुजरने वाले ग्रामीण, राहगीर और विशेषकर युवा अक्सर यहां ठहरकर इन प्रतिमाओं को नमन करते हैं। लोकेंद्र साहू का स्पष्ट मकसद नई पीढ़ी के दिलों में देशभक्ति और सुरक्षा बलों के प्रति गहरा आदर जगाना है।
औपचारिक अनावरण के लिए जारी हैं प्रशासनिक और खेल जगत के प्रयास
तमाम मूर्तियां पूरी तरह बनकर तैयार हो चुकी हैं, हालांकि स्मारक का विधिवत उद्घाटन होना अभी शेष है। लोकेंद्र साहू ने इसके अनावरण के लिए राज्य के मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और केंद्रीय मंत्री से पत्राचार करने के साथ ही व्यक्तिगत तौर पर मिलकर समय मांगा था, लेकिन फिलहाल प्रशासनिक स्तर से तारीख तय नहीं हो सकी है। स्वयं पूर्व में क्रिकेट खेल चुके लोकेंद्र की इच्छा है कि इस पुनीत कार्य का उद्घाटन किसी बड़े क्रिकेटर के हाथों संपन्न हो।
इसी सिलसिले में उन्होंने वर्ष 2024 में सचिन तेंदुलकर से मुलाकात की थी। इसके बाद 14 सितंबर 2026 को वे भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सूर्यकुमार यादव के आवास पर पहुंचे, जहां उन्होंने क्रिकेटर को उनकी एक आदमकद प्रतिमा भेंट की और बालोद आकर शहीद प्रतिमाओं का अनावरण करने का औपचारिक न्योता दिया।
एक एकड़ खेत में एक हजार प्रतिमाएं लगाने का बड़ा संकल्प
लोकेंद्र साहू का यह अभियान महज 18 मूर्तियों तक रुकने वाला नहीं है। उन्होंने अपनी पूरी एक एकड़ उपजाऊ भूमि को राष्ट्र के अमर सपूतों के नाम करने की योजना बनाई है। उनका दीर्घकालिक लक्ष्य इस भूखंड पर देश भर के करीब एक हजार अमर शहीदों की प्रतिमाएं स्थापित करने का है, ताकि यह स्थल भावी पीढ़ियों के लिए राष्ट्रीय स्वाभिमान, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान की एक जीवंत प्रेरणास्थली बन सके।



















