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रायपुर में कचरा फेंकने पर ₹25,000 तक का चालान, 160 जगहों पर कैमरों की निगरानीछत्तीसगढ़
18 सित॰ 2026, 12:07 pm (1 दिन पहले)· 2

रायपुर में कचरा फेंकने पर ₹25,000 तक का चालान, 160 जगहों पर कैमरों की निगरानी

रायपुर नगर निगम 160 प्रमुख स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाएगा ताकि खुले में कचरा फेंकने वालों और वाहनों से गंदगी फैलाने वालों की पहचान हो सके। उल्लंघन पर ₹200 से ₹25,000 तक का चालान लगेगा, और फुटेज को 30 दिन तक सुरक्षित रखा जाएगा।

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में सार्वजनिक जगहों और सड़क किनारे कचरा फेंकने वालों के खिलाफ नगर निगम ने कैमरा आधारित कार्रवाई की तैयारी कर ली है। रायपुर नगर निगम शहर के 160 अहम स्थानों पर उन्नत तकनीक वाले सीसीटीवी कैमरे लगाएगा। इनकी मदद से पैदल कचरा फेंकने वालों और दो पहिया या चार पहिया वाहनों से गंदगी फैलाने वालों की पहचान तुरंत की जाएगी। नियम तोड़ने पर जुर्माना ₹200 से लेकर ₹25,000 तक हो सकता है।

160 स्थानों पर कड़ी निगरानी

कैमरे उन चौराहों और इलाकों में लगेंगे जहां लोग बार बार कचरा डंप करते हैं या सार्वजनिक स्थानों पर गंदगी की शिकायत रहती है। नवीन मार्केट, कालीबाड़ी चौक, रेलवे स्टेशन के आसपास, पंडरी, आमापारा, मौदहापारा और शास्त्री बाजार सहित कुल 160 प्रमुख पॉइंटों को चिह्नित किया गया है। इस व्यवस्था का मकसद सिर्फ कचरा देखना नहीं, बल्कि उल्लंघन करने वाले की पहचान कर चालानी कार्रवाई को मजबूत बनाना है।

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फुटेज से चालान तक का सिलसिला

यदि कोई व्यक्ति दो पहिया या चार पहिया वाहन से कचरा डंप करके निकल जाता है, तो कैमरा उसके नंबर को रिकॉर्ड करेगा। फिर आरटीओ से मिली जानकारी के आधार पर वाहन मालिक का पता लगाया जाएगा। फुटेज संबंधित जोन के स्वास्थ्य अधिकारी को भेजी जाएगी, जहां से चालानी कार्रवाई आगे बढ़ेगी। जुर्माने की राशि अपराध की गंभीरता के अनुसार ₹200 से ₹25,000 के बीच तय होगी।

बाजारों में दुकानें बंद होने के बाद नुक्कड़ों पर कचरा फेंके जाने की शिकायतें अक्सर आती हैं। पूछताछ में लोग कई बार मामला अस्वीकार कर देते हैं। अब सीसीटीवी रिकॉर्डिंग कानूनी सबूत के रूप में काम करेगी। सबूत के तौर पर रिकॉर्ड एक महीने, यानी 30 दिन, तक सुरक्षित रहेगा। इससे कार्रवाई के लिए पुख्ता सामग्री उपलब्ध रहेगी।

टेंडर और कंट्रोल रूम से रखरखाव

नगर निगम ने इस व्यवस्था को चलाने और उसका रखरखाव करने के लिए करीब ₹90 लाख का टेंडर निकाला है। ठेका मिलने वाली कंपनी आगामी तीन वर्षों में कैमरों का रखरखाव, तकनीकी खराबी दूर करना और डेटा रिचार्ज संभालेगी। फुटेज की लाइव निगरानी के लिए स्मार्ट सिटी के पुराने कार्यालय में एक खास कंट्रोल रूम तैयार किया जा रहा है।

कैमरे बदलेंगे और काम शुरू होगा

अपर आयुक्त विनोद पांडेय ने बताया कि टेंडर प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है और चुनी गई कंपनी को काम शुरू करने का आदेश मिल चुका है। अब क्षेत्र में कैमरे लगाने की कार्रवाई जल्द शुरू होगी। जिस जगह कैमरा लगने के बाद उल्लंघन रुक जाए, वहां का उपकरण शहर के किसी दूसरे समस्याग्रस्त स्थान पर शिफ्ट किया जाएगा। नगर निगम को उम्मीद है कि इससे शहर की स्वच्छता रैंकिंग बेहतर होगी और सफाई के बाद फिर उभरने वाले कचरा पॉइंटों से स्थायी राहत मिलेगी।

सवाल-जवाब

रायपुर में सीसीटीवी कैमरे कहां लगेंगे?
नगर निगम ने 160 प्रमुख स्थान चुने हैं। शास्त्री बाजार, मौदहापारा, आमापारा, पंडरी, रेलवे स्टेशन के आसपास, कालीबाड़ी चौक और नवीन मार्केट शामिल हैं।
कचरा फेंकने पर कितना जुर्माना लगेगा?
उल्लंघन की गंभीरता के अनुसार ₹200 से ₹25,000 तक का जुर्माना लगेगा।
वाहन से कचरा फेंकने वाले की पहचान कैसे होगी?
कैमरा गाड़ी का नंबर रिकॉर्ड करेगा और आरटीओ की जानकारी से मालिक का पता लगाया जाएगा।
फुटेज कितने समय तक सुरक्षित रहेगी?
रिकॉर्डिंग एक महीने, यानी 30 दिन, तक सुरक्षित रखी जाएगी।
चालानी कार्रवाई कौन आगे बढ़ाएगा?
संबंधित जोन के स्वास्थ्य अधिकारी को फुटेज भेजी जाएगी और वहीं से कार्रवाई होगी।
इस परियोजना के लिए कितना खर्च और कितनी अवधि तय है?
नगर निगम ने करीब ₹90 लाख का टेंडर जारी किया है। ठेका पाने वाली कंपनी अगले तीन वर्षों तक रखरखाव संभालेगी।
कैमरे लगने के बाद क्या होगा?
टेंडर प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है और चुनी गई कंपनी को काम का आदेश मिल चुका है। कैमरे जल्द लगाए जाएंगे।
यदि किसी जगह कचरा फेंकना बंद हो जाए तो?
वहां का कैमरा शहर के किसी दूसरे समस्याग्रस्त स्थान पर शिफ्ट किया जाएगा।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·1 दिन पहले

तकनीकी निगरानी और 30-दिवसीय डेटा संरक्षण का यह प्रयास नागरिक अनुशासन तथा स्थान-शुद्धता को बनाए रखने की दिशा में एक व्यावहारिक कदम है। खगोलीय या गणितीय व्यवस्था की भांति सार्वजनिक स्थानों में भी नियमबद्धता और निरंतरता आवश्यक होती है। 160 संवेदनशील स्थलों की पहचान और साक्ष्य आधारित डिजिटल कैटलॉगिंग से न केवल जवाबदेही तय होगी, बल्कि जन-व्यवहार में भी सुधार आएगा। यदि डेटा की समीक्षा और dynamic उपकरणों के स्थानांतरण की योजना धरातल पर सटीक रूप से लागू होती है, तो यह मॉडल शहरी स्वच्छता को स्थायी आधार दे सकता है।

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

सार्वजनिक स्वच्छता के लिए तकनीक और वित्तीय दंड का यह संयोजन नागरिक व्यवहार को बदलने में एक प्रभावी आर्थिक अंकुश की तरह काम करेगा। ₹90 लाख के रखरखाव अनुबंध के तहत कैमरों को आवश्यकतानुसार दूसरे स्थानों पर स्थानांतरित करने की रणनीति सार्वजनिक धन के सही उपयोग को दर्शाती है। यदि निगरानी और आरटीओ डेटा का यह एकीकरण पारदर्शी तरीके से चलता है, तो यह व्यवस्था भारत के अन्य उभरते शहरों के लिए स्मार्ट शहरी प्रशासन का एक टिकाऊ मॉडल बन सकती है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 दिन पहले

रविकेश की बात को आगे बढ़ाते हुए, प्रशासनिक और नीतिगत दृष्टिकोण से देखा जाए तो इस पहल की वास्तविक सफलता अंतर-विभागीय समन्वय पर निर्भर करेगी। आरटीओ डेटा बेस, ज़ोनल स्वास्थ्य अधिकारियों और कंट्रोल रूम का यह एकीकरण तभी प्रभावी साबित होगा जब साक्ष्य मिलने के बाद चालान जारी करने में देरी न हो। इसके साथ ही, स्वच्छता सुधरने पर कैमरों को दूसरे हॉटस्पॉट में स्थानांतरित करने का प्रावधान नीतिगत लचीलेपन का एक व्यावहारिक उदाहरण है। यदि यह व्यवस्था पारदर्शी और कानूनी रूप से मजबूत रहती है, तो यह स्थानीय निकायों में डिजिटल शासन और सार्वजनिक जवाबदेही का एक नया मानक बन सकती है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

शहरी स्वच्छता और नागरिक व्यवहार में सुधार के लिए तकनीक का यह इस्तेमाल एक व्यावहारिक पहल है। साक्ष्य-आधारित चालानी कार्रवाई से सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने वालों में डर पैदा होगा और अधिकारियों के पास मजबूत कानूनी सबूत रहेगा। हालांकि, इस नीति की सफलता केवल कैमरों पर निर्भर नहीं करेगी; जोनल स्वास्थ्य अधिकारियों द्वारा समय पर चालान भेजने, आरटीओ डेटा के सही मिलान और कंट्रोल रूम के सुचारू संचालन पर ही इसका वास्तविक असर दिखेगा। इसके अलावा, जिन स्थानों पर सुधार हो जाए वहां से कैमरों को दूसरे हॉटस्पॉट पर शिफ्ट करने की रणनीति सीमित संसाधनों का बेहतर प्रबंधन दर्शाती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

रोहन की बात को आगे बढ़ाते हुए कानून और प्रवर्तन के नजरिए से देखें तो सीसीटीवी फुटेज को साक्ष्य बनाना एक महत्वपूर्ण कदम है। लेकिन कानूनी प्रक्रिया को मजबूत रखने के लिए यह जरूरी है कि डिजिटल साक्ष्य की शृंखला (चेन ऑफ कस्टडी) पुख्ता रहे। आरटीओ डेटा के आधार पर चालान भेजते समय वास्तविक उल्लंघनकर्ता की पहचान और जवाबदेही तय करने में पारदर्शिता होनी चाहिए ताकि भविष्य में कानूनी अड़चनें न आएं। जोनल स्तर पर समयबद्ध कार्रवाई ही इस डिजिटल साक्ष्य का सही कानूनी उपयोग सुनिश्चित करेगी।

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