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मणिपुर ने कचरा प्रबंधन और पहाड़ी शहरों को स्वच्छ बनाने के लिए दो बड़े अभियानों की शुरुआत कीमणिपुर
17 सित॰ 2026, 4:32 pm (4 घंटे पहले)· 2

मणिपुर ने कचरा प्रबंधन और पहाड़ी शहरों को स्वच्छ बनाने के लिए दो बड़े अभियानों की शुरुआत की

मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने राज्य में ठोस कचरा निपटान प्रणाली को सुधारने और पहाड़ी क्षेत्रों को स्वच्छ बनाने के लिए 'स्वच्छता ही सेवा' सहित दो अभियानों की शुरुआत की है।

मणिपुर के मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने गुरुवार को इंफाल में मुख्यमंत्री सचिवालय में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कचरा प्रबंधन और स्वच्छता प्रणालियों को बेहतर बनाने के उद्देश्य से दो प्रमुख अभियानों की शुरुआत की। 'स्वच्छता ही सेवा, 2026' और 'क्लीन हिमालयन हिल सिटीज इनिशिएटिव' नाम की इन पहलों का लक्ष्य पर्यावरण संरक्षण, बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण और राज्य भर में स्वच्छता प्रयासों में आम जनता की भागीदारी को बढ़ाना है।

सामुदायिक भागीदारी और व्यवहार में बदलाव पर जोर

इस कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने आम नागरिकों, शहरी स्थानीय निकायों (ULBs) और अन्य हितधारकों से इन अभियानों में सक्रिय रूप से शामिल होने की अपील की ताकि इन पहलों को सफल बनाया जा सके। मुख्यमंत्री ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर एक पोस्ट के जरिए बताया कि ये कार्यक्रम पूरे समाज को साथ लेकर चलने वाले दृष्टिकोण को बढ़ावा देंगे। इसका उद्देश्य लोगों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाना और वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन प्रथाओं को अपनाना है। यह रणनीति विशेष रूप से राज्य के पर्यावरण के प्रति संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्रों में ठोस कचरे और स्वच्छता से जुड़ी चुनौतियों का समाधान करने के लिए तैयार की गई है।

बुनियादी ढांचे की मजबूती और क्षमता निर्माण

मणिपुर अर्बन डेवलपमेंट एजेंसी (MUDA) के तहत शुरू की गई ये पहलें प्रशासनिक निकायों को हर संभव सहायता प्रदान करेंगी। ये कार्यक्रम चुनिंदा स्थानों पर कचरा प्रबंधन के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के साथ-साथ जागरूकता बढ़ाने और लोगों के दृष्टिकोण में बदलाव लाने वाली गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करेंगे। इसके अतिरिक्त, स्वच्छता और सामुदायिक विकास से जुड़े ULBs और अन्य हितधारकों को आवश्यक प्रशिक्षण और संस्थागत सहायता भी दी जाएगी। इससे राज्य में लंबे समय तक चलने वाले और सुरक्षित कचरा निपटान तंत्र को विकसित करने में मदद मिलेगी।

दोनों स्वच्छता अभियानों की विस्तृत रूपरेखा

अधिकारियों के अनुसार, 'स्वच्छता ही सेवा' अभियान 17 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर तक चलेगा। इस अभियान का मुख्य ध्यान कचरे के स्रोत पर ही उसके चार-तरफा वर्गीकरण यानी अलग-अलग करने पर होगा। इसके अलावा, ठोस कचरा प्रबंधन नियमों के प्रति जागरूकता फैलाने और कचरे से धन बनाने (वेस्ट-टू-वेल्थ) की प्रथाओं को बढ़ावा देने पर भी काम किया जाएगा।

दूसरी ओर, 100 दिनों तक चलने वाला क्लीन हिमालयन हिल सिटीज इनिशिएटिव मुख्य रूप से क्षमता निर्माण, व्यवहार परिवर्तन संचार (BCC), ऐतिहासिक एवं प्रतिष्ठित स्थलों के संरक्षण और कचरा प्रबंधन प्रणालियों को मजबूत करने पर केंद्रित रहेगा।

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सवाल-जवाब

मणिपुर के मुख्यमंत्री द्वारा किन दो पहलों की शुरुआत की गई है?
मुख्यमंत्री वाई खेमचंद सिंह ने इंफाल में 'स्वच्छता ही सेवा, 2026' और 'क्लीन हिमालयन हिल सिटीज इनिशिएटिव' की शुरुआत की है।
'स्वच्छता ही सेवा' अभियान की अवधि क्या है?
यह अभियान 17 सितंबर से शुरू होकर 2 अक्टूबर तक चलेगा।
क्लीन हिमालयन हिल सिटीज इनिशिएटिव का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इस 100 दिवसीय कार्यक्रम का उद्देश्य क्षमता निर्माण, व्यवहार परिवर्तन संचार, ऐतिहासिक स्थलों का संरक्षण और कचरा प्रबंधन प्रणालियों को मजबूत करना है।
'स्वच्छता ही सेवा' अभियान के तहत कचरे के निपटान के लिए क्या खास कदम उठाए जाएंगे?
इस अभियान के तहत कचरे को उसके स्रोत पर ही चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटने और कचरे से कंचन (वेस्ट-टू-वेल्थ) बनाने की प्रथाओं को बढ़ावा दिया जाएगा।
मणिपुर में इन स्वच्छता कार्यक्रमों का संचालन कौन सी एजेंसी कर रही है?
इन पहलों का संचालन मणिपुर अर्बन डेवलपमेंट एजेंसी (MUDA) और स्थानीय शहरी निकायों द्वारा किया जा रहा है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·1 घंटे पहले

मणिपुर सरकार द्वारा शुरू की गई ये स्वच्छता पहलें न केवल पारिस्थितिकी संतुलन के लिए आवश्यक हैं, बल्कि दीर्घकालिक आर्थिक और निवेश दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण हैं। पहाड़ी शहरों में वैज्ञानिक कचरा प्रबंधन और 'वेस्ट-टू-वेल्थ' मॉडल के तहत बुनियादी ढांचे के आधुनिकीकरण से स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए अवसर पैदा होंगे। हालांकि, इस पूरे प्रशासनिक और सामुदायिक ढांचे की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि म्यूनिसिपल इकाइयों को मिलने वाला वित्तीय और संस्थागत समर्थन ज़मीन पर कितनी प्रभावी ढंग से लागू होता है, जिससे क्षेत्र में पर्यटन और सतत विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।

Priya Sharma@priya-sharma·1 घंटे पहले

रविकेश जी के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, इस पहल का सांस्कृतिक और पर्यटन पक्ष अत्यंत महत्वपूर्ण है। पहाड़ी क्षेत्रों और ऐतिहासिक स्थलों के संरक्षण का यह अभियान पर्यावरण को बचाने के साथ-साथ पर्यटकों के लिए भी एक स्वच्छ और आकर्षक वातावरण तैयार करेगा। जब समुदाय व्यवहार परिवर्तन संचार (बीसीसी) के जरिए अपनी रोज़मर्रा की आदतों में बदलाव लाएंगे, तभी यह 'होल ऑफ सोसाइटी' दृष्टिकोण ज़मीन पर सफल होगा। इसके अलावा, स्रोत पर ही कचरे का चार-तरफा वर्गीकरण नागरिकों को आधुनिक और जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करेगा, जो लंबे समय में राज्य के सतत विकास और सांस्कृतिक गौरव को बनाए रखने में मील का पत्थर साबित होगा।

Rohan Verma@rohan-verma·3 घंटे पहले

पहाड़ी और संवेदनशील क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन के लिए इस तरह की नीतियां सराहनीय कदम हैं, लेकिन इनका वास्तविक असर ज़मीनी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा। 'वेस्ट-टू-वेल्थ' और स्रोत पर कचरा अलग करने का लक्ष्य तब तक पूरा नहीं हो सकता जब तक स्थानीय निकायों को तकनीकी और वित्तीय रूप से लगातार मजबूत न किया जाए। 100 दिनों के अभियान के बाद भी इन व्यवस्थाओं की निरंतरता बनाए रखना और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में कचरा प्रसंस्करण संयंत्रों का सुचारू संचालन ही इसकी असली सफलता तय करेगा।

Arjun Mehta@arjun-mehta·3 घंटे पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, नीतिगत और शासन की दृष्टि से यह कदम पूर्वोत्तर के पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों में सतत शहरी विकास की ओर एक महत्वपूर्ण पहल है। हालांकि, किसी भी अल्पकालिक अभियान का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करता है कि उसे स्थायी नीतिगत ढांचे और अंतर-विभागीय समन्वय से कितना जोड़ा जाता है। यदि शहरी स्थानीय निकायों को केवल निर्देश देने के स्थान पर संस्थागत अधिकार और बजटीय सहायता प्रदान नहीं की गई, तो 100 दिनों के बाद इस व्यवस्था को बनाए रखना कठिन होगा। सरकार को इसे महज एक अभियान न मानकर दीर्घकालिक प्रशासनिक जवाबदेही के रूप में लागू करना चाहिए।

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