छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई देखने को मिली है। खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने फॉर्च्यून मैदा और जैन चुस्की चाय के विशिष्ट बैच को मानव उपभोग के लिए असुरक्षित करार देते हुए उनकी बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। प्रयोगशाला परीक्षण के दौरान इन दोनों खाद्य पदार्थों में कीटनाशक के अवशेष स्वीकार्य सीमा से कहीं अधिक पाए गए, जिसके चलते जनस्वास्थ्य के मद्देनजर यह कड़ा कदम उठाया गया है। विभाग ने व्यापारियों और वितरकों को प्रभावित माल की बिक्री फौरन रोकने और पूरे स्टॉक को अलग करने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।
बाजार से सारा प्रभावित स्टॉक वापस खींचने के निर्देश
प्रशासन ने आपूर्ति श्रृंखला में शामिल सभी खुदरा और थोक व्यापारियों को निर्देश दिया है कि वे प्रभावित दोनों उत्पादों को अपनी दुकानों के रैक से तत्काल हटा दें। खाद्य विभाग के निर्देशों के तहत बाजार में पहुंच चुके इस पूरे माल को वापस मंगवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। जिन विशिष्ट लॉट पर यह कार्रवाई की गई है, उनमें फॉर्च्यून मैदा का बैच नंबर FAMD55O059A और जैन चुस्की चाय का बैच नंबर CH 653 175 शामिल हैं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जब तक यह संदेहास्पद माल पूरी तरह बाजार से हट नहीं जाता, तब तक निगरानी दल सक्रिय रहेगा।
फॉर्च्यून मैदा में निर्धारित सीमा से ज्यादा मिला क्लोरपाइरीफॉस
जांच के दायरे में आए फॉर्च्यून मैदा का उत्पादन मेसर्स अनिरुद्ध फूड लिमिटेड द्वारा किया गया है, जिसकी निर्माण इकाई उत्तर प्रदेश में चंदौली तहसील के करवत गांव, पोस्ट दांडी में स्थित है। इस उत्पाद का बैच नंबर FAMD55O059A दर्ज है, जिसके निर्माण की तारीख 28 फरवरी 2026 और इस्तेमाल की अंतिम तारीख 27 अगस्त 2026 निर्धारित थी। भोपाल स्थित काली-लैब्स प्राइवेट लिमिटेड की 24 जुलाई 2026 की परीक्षण रिपोर्ट सामने आने के बाद यह मामला उजागर हुआ। प्रयोगशाला विश्लेषण में पाया गया कि इस बैच में क्लोरपाइरीफॉस की मात्रा 0.014 पीपीएम थी, जबकि खाद्य सुरक्षा नियमों के तहत इसकी अधिकतम अनुमेय सीमा 0.01 पीपीएम तय है। मानक से अधिक कीटनाशक अवशेष मिलने के आधार पर इस खेप को नियमों के तहत असुरक्षित श्रेणी में डाला गया।
जैन चुस्की चाय में तय सीमा से अठारह गुना पाया गया एसीटामिप्रिड
कार्रवाई का दूसरा बड़ा मामला जैन चुस्की चाय से जुड़ा है, जिसके बैच नंबर CH 653 175 के नमूनों में खतरनाक स्तर पर रासायनिक कीटनाशक पाया गया। इस उत्पाद का निर्माण और विपणन रायपुर के अमलीडीह स्थित आकृति विहार की फर्म मेसर्स जैन ट्रेडर्स द्वारा किया जाता है। कोलकाता की एक प्रयोगशाला द्वारा 30 जुलाई 2026 को जारी की गई जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। रिपोर्ट के मुताबिक इस चाय में एसीटामिप्रिड की सांद्रता 0.18 पीपीएम दर्ज की गई, जबकि खाद्य सुरक्षा मानकों के तहत इसकी तय सीमा केवल 0.01 पीपीएम है। इस तरह उत्पाद में इस कीटनाशक की मात्रा निर्धारित सीमा से 18 गुना अधिक पाई गई, जिसके बाद खाद्य एवं औषधि प्रशासन ने इसे तत्काल प्रभाव से असुरक्षित घोषित कर दिया।



















