सुनीता देवी के गांव में मान पत्ते से हो रही बंपर कमाई, जानिए 4 फीट लंबे पौधे के बाजार भाव98,719 आवेदनों के बाद हिमाचल प्रदेश में कांस्टेबल पदों पर भर्ती की तारीख बढ़ाने से इनकार, 15 सितंबर है आखिरी मौकाएससीओ की तस्वीर से पीएम मोदी को हटाने पर भड़के एकनाथ शिंदे, पाकिस्तान को दी सख्त चेतावनीचीन बैडमिंटन मास्टर्स में किदांबी श्रीकांत की धमाकेदार शुरुआत, लक्ष्य सेन पहले ही दौर में बाहरम्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर्स को AI वेल्थ प्लेटफॉर्म देने के लिए एमएफ यूटिलिटीज और माइडासएक्स में करारदिल्ली में पुराने कमर्शियल वाहनों को बदलने के लिए परिवर्तन योजना मंजूर, 10 साल टैक्स छूट और 2.56 लाख तक इंसेंटिव का मिला विकल्पबिहार से कर्नाटक की दैनिक कनेक्टिविटी आसान, दानापुर-बेंगलुरू स्पेशल बनी रेगुलर ट्रेनबिश्केक में एससीओ मंच से शी जिनपिंग ने सुरक्षा को बताया शीर्ष प्राथमिकता, शिनजियांग और उइगर नीति पर फिर गहराया वैश्विक ध्यानमानसून में घूमने के लिए बेहतरीन है दशम जलप्रपात, घने जंगलों का सुहाना सफर और कम सीढ़ियों की आसानीआगरा में मेट्रो निर्माण के बाद एमजी रोड पर खुला रास्ता, 5 नए स्टेशनों के साथ ट्रैफिक से मिलेगी राहत
सरगुजा में सितंबर की खेती से ज्यादा कमाई के लिए कृषि सलाहकार की खास टिप्सछत्तीसगढ़
2 सित॰ 2026, 12:58 pm (51 मिनट पहले)· 3

सरगुजा में सितंबर की खेती से ज्यादा कमाई के लिए कृषि सलाहकार की खास टिप्स

छत्तीसगढ़ के सरगुजा में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सितंबर के दौरान लौकी, तोरई, टमाटर और अगेती सेम जैसी सब्जियों की खेती कर मुनाफा बढ़ाने की सलाह दी है।

सरगुजा जिले के काश्तकारों के पास इस महीने कृषि उपज से अपनी कमाई बढ़ाने का एक शानदार अवसर है। कृषि क्षेत्र के जानकारों ने मानसून के इस दौर में बेलदार फसलों तथा अन्य प्रमुख सब्जियों के रोपण की सलाह दी है। सितंबर में व्यवस्थित योजना बनाकर की गई बागवानी न केवल उत्पादन लागत घटाती है, बल्कि बाजार में शुरुआती आपूर्ति के कारण किसानों की जेब भी भारी कर सकती है।

तैयारी के अंतिम चरण में खड़ी फसलें

क्षेत्र के खेतों में फिलहाल कई तरह के साग-सब्जियों के पौधे परिपक्वता की ओर बढ़ रहे हैं। बैंगन, सेम और हरी मिर्च की पैदावार जल्द ही कटाई के लिए तैयार होने वाली है। वहीं दूसरी तरफ, काश्तकार टमाटर की फसल को सहेजने और उसे बाजार लायक बनाने की कोशिशों में जुटे हैं। जानकारों का कहना है कि टमाटर की पूर्ण पैदावार हासिल होने में अभी कुछ और दिनों का वक्त लग सकता है।

ये भी पढ़ें

अगेती सेम की खेती से बढ़िया दाम का गणित

विशेषज्ञों के अनुसार, सेम की अगेती किस्म उगाना उत्पादकों के लिए आर्थिक दृष्टि से बेहद लाभदायक साबित होता है। जब मौसम की शुरुआत में बाजार के भीतर ताजी सब्जियों की आवक कम होती है, तब मांग काफी ऊंची बनी रहती है। ऐसे समय में मंडी तक पहुंचने वाली सेम की उपज को व्यापारी ऊंचे भावों पर खरीदते हैं। समय से पहले फसल तैयार करके बेचने से काश्तकारों के कुल राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की जाती है।

बरसात के मौसम में बेल वाली सब्जियों का बल

वर्षाकाल के दौरान लता या बेल के सहारे फैलने वाली फसलों का चुनाव बेहद कारगर माना जाता है। लौकी, तोरई, नेनुआ और बरबट्टी जैसी बेलदार फसलें अत्यधिक नमी वाले मौसम का मुकाबला करने में सक्षम होती हैं। यदि इन फसलों को अनुकूल वातावरण और सही सहारा मिले, तो इनका प्रति एकड़ उत्पादन बहुत शानदार निकलकर आता है। इसी वजह से कृषि विशेषज्ञ सितंबर में इनकी बुवाई को प्राथमिकता देने की सिफारिश करते हैं।

मौसम और बाजार चक्र के समन्वय से लाभ

कृषि सलाहकार संजय यादव के मुताबिक, मौसम के मिजाज और बाजार की जरूरत को ध्यान में रखकर की गई खेती ही असली मुनाफा देती है। खेतों में सही समय पर बीजारोपण, नियमित सिंचाई-पोषण और कीट प्रबंधन से पैदावार की गुणवत्ता बनी रहती है। यदि किसान वर्षा को चुनौती मानने के बजाय फसल चक्र में बदलाव करें, तो यह मौसम उनके लिए अतिरिक्त आमदनी का सबसे बड़ा माध्यम बन सकता है।

सवाल-जवाब

सितंबर में सरगुजा के किसानों को किन सब्जियों की खेती की सलाह दी गई है?
विशेषज्ञों ने लौकी, तोरई, नेनुआ, मिर्च, बरबट्टी, टमाटर, अर्ली सेम और बैंगन की खेती करने की सलाह दी है।
बारिश के मौसम में बेल वाली सब्जियों को प्राथमिकता क्यों दी जाती है?
लौकी, तोरई और बरबट्टी जैसी बेलदार फसलें अत्यधिक बारिश और नमी का बेहतर सामना कर सकती हैं और अच्छी पैदावार देती हैं।
अगेती सेम की फसल लगाने से किसानों को क्या फायदा होता है?
अगेती सेम बाजार में समय से पहले पहुंचती है, जिससे सीमित आपूर्ति के कारण किसानों को फसल का बेहतरीन भाव मिलता है।
वर्तमान में खेतों में कौन सी फसलें तैयार होने के करीब हैं?
बैंगन, सेम और मिर्च की फसलें तैयार होने के करीब हैं, जबकि टमाटर की फसल पूरी तरह तैयार होने में थोड़ा समय लेगी।
बारिश के मौसम में खेती की लागत कैसे कम होती है?
मानसून के पानी से सिंचाई का खर्च बचता है और सही फसल चयन से कम लागत में अधिक पैदावार हासिल की जा सकती है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·11 मिनट पहले

छत्तीसगढ़ के सरगुजा में कृषि विशेषज्ञों की यह सलाह अन्नदाताओं को बाजार की मांग और मानसून के बीच बेहतर तालमेल बिठाने का अवसर देती है। सितंबर के दौरान बेलदार और अगेती सब्जियों का रोपण उत्पादन लागत को नियंत्रित रखने के साथ-साथ शुरुआती आवक का लाभ दिला सकता है। यह रणनीतिक दृष्टिकोण किसानों की आय बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·11 मिनट पहले

अपराध और कानून-व्यवस्था के इतर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और कृषि सुरक्षा सीधे तौर पर सार्वजनिक सुरक्षा से जुड़ी होती है। जब किसान मौसम के चक्र और बाजार की मांग को समझकर अगेती और बेलदार फसलों की व्यवस्थित योजना बनाते हैं, तो इससे उनकी आय सुरक्षित होती है और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक स्थिरता आती है। यह वित्तीय सुरक्षा कृषि समुदायों में असंतोष और संकट को रोकने में भी बड़ी भूमिका निभाती है.

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR