बिलासपुर में सर्पदंश के मुआवजे के नाम पर सरकारी खजाने को ठगने का एक बड़ा रैकेट पकड़ में आया है, जिसमें आत्महत्या से जुड़ी पुरानी मौतों को सांप के काटने से हुई मौत बताकर लाखों रुपये की सहायता राशि निकाली गई. पुलिस ने तहसील कार्यालय और एसडीएम दफ्तर के कर्मचारियों समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया है और जांच में फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट व फर्जी दस्तावेजों के सहारे यह पूरा खेल रचे जाने की पुष्टि हुई है.
कैसे रचा गया यह पूरा फर्जीवाड़ा
जांच में सामने आया कि यह गिरोह बहुत सोच-समझकर काम कर रहा था. आरोपियों ने ऐसे पुराने मामले चुने, जिनमें मौत आत्महत्या से हुई थी. इसके बाद उन्होंने इन्हीं मामलों के मर्ग नंबर का इस्तेमाल करते हुए फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार करवाई, जिसमें दिखाया गया कि व्यक्ति की मौत सांप के डसने से हुई है. इन्हीं मनगढ़ंत कागजातों के आधार पर सरकार की तरफ से मिलने वाली 4 लाख रुपये की सहायता राशि स्वीकृत करा ली गई. सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस व्यक्ति के नाम पर यह सहायता राशि निकाली गई, जांच में उसका नाम और पता भी फर्जी निकला, यानी असल में कोई भी हकदार व्यक्ति इस पैसे तक पहुंचा ही नहीं.
पुलिस ने किन-किन को दबोचा
इस गिरोह में सिर्फ दफ्तर के बाबू ही शामिल नहीं थे, बल्कि पेशेवर लोग भी इसमें बराबर के भागीदार निकले. सरकंडा पुलिस ने इस मामले में सख्ती दिखाते हुए एसडीएम कार्यालय के बाबू नरेंद्र कौशिक को गिरफ्तार किया. इसके अलावा तहसील कार्यालय के दो बाबू हरिशंकर राठौर और गरीब बिंझवार को भी हिरासत में लिया गया. पुलिस ने इस रैकेट से जुड़ी एक महिला डॉक्टर प्रियंका सोनी और अधिवक्ता राजेंद्र कुमार चतुर्वेदी को भी गिरफ्तार किया है, जिससे यह साफ हो गया कि फर्जी पोस्टमार्टम से लेकर कागजी कार्रवाई तक हर स्तर पर मिलीभगत थी.
विधानसभा में उठा सवाल, तब खुली पोल
यह पूरा घोटाला तब सामने आया जब यह मामला विधानसभा तक पहुंच गया. बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला ने साल 2019 से 2023 के बीच बांटी गई मुआवजा राशि पर सवाल खड़े किए थे और तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में हुए इस संदिग्ध लेनदेन की जांच की मांग रखी थी. जैसे ही सरकार ने इस दिशा में जांच शुरू की, कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आने लगे. पता चला कि सामान्य मौतों के साथ-साथ कई संदिग्ध मौतों को भी सर्पदंश बताकर फाइलें तैयार की गई थीं, ताकि सरकारी सहायता राशि आसानी से निकाली जा सके.
अब तक 17 फर्जी मामलों का खुलासा
बिलासपुर एसएसपी रजनीश सिंह ने बताया कि अभी तक जिले में ऐसे 17 फर्जी सर्पदंश मामले सामने आ चुके हैं. ये सभी मामले सरकंडा, तोरवा, सिविल लाइन और बिल्हा थाना क्षेत्रों में दर्ज किए गए हैं. पुलिस के मुताबिक अभी यह सिर्फ जांच की शुरुआत है. फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनने से लेकर मुआवजा स्वीकृत होने और आखिर में भुगतान होने तक की पूरी चेन को खंगाला जा रहा है. पुलिस को आशंका है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, घोटाले की रकम और इसमें शामिल आरोपियों की संख्या, दोनों में और इजाफा हो सकता है.
कलेक्टर बोले, कोई भी बख्शा नहीं जाएगा
बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने इस मामले पर कहा कि सर्पदंश के मामलों में आरबीसी 6-4 नियम के तहत पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता दी जाती है, और आरोपियों ने इसी नियम की खामी का फायदा उठाते हुए फर्जी फाइलें पास करवाईं. उन्होंने साफ किया कि पुलिस इस पूरे रैकेट की एक-एक कड़ी को जोड़ने में जुटी है और जिस किसी की भी भूमिका इसमें सामने आएगी, उस पर सख्त कार्रवाई की जाएगी. फिलहाल तहसील कार्यालय के पुराने रिकॉर्ड्स को बारीकी से खंगाला जा रहा है और आने वाले दिनों में इस घोटाले से जुड़े कुछ और बड़े नाम बेनकाब होने की उम्मीद जताई जा रही है.




















