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गोबी के रेगिस्तान में चीनी सेना ने परखी अपनी मिसाइल ताकत, अमेरिकी हथियारों के जवाब में युद्धाभ्यासचीन
22 सित॰ 2026, 3:22 pm (42 मिनट पहले)· 0

गोबी के रेगिस्तान में चीनी सेना ने परखी अपनी मिसाइल ताकत, अमेरिकी हथियारों के जवाब में युद्धाभ्यास

जापान में अमेरिकी टायफॉन मिसाइल प्रणाली की तैनाती के बीच चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी ने गोबी रेगिस्तान में एचक्यू-9 एयर डिफेंस सिस्टम के साथ व्यापक युद्धाभ्यास किया है।

पूर्वी एशिया के भू-राजनीतिक परिदृश्य में हथियारों की होड़ और सैन्य शक्ति प्रदर्शन का एक नया चरण सामने आया है। पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के ईस्टर्न थिएटर कमांड से जुड़ी वायुसेना टुकड़ी को अचानक हजारों किलोमीटर दूर उत्तर-पश्चिमी हिस्से में स्थित गोबी रेगिस्तान में उतार दिया गया। वहां पहुंचकर सैनिकों ने अपनी अत्याधुनिक एचक्यू-9 लंबी दूरी की वायु रक्षा मिसाइल प्रणालियों को तैनात कर विशेष सामरिक अभ्यास शुरू किया। इस युद्धाभ्यास का समय विशेष तौर पर संवेदनशील माना जा रहा है, क्योंकि जापान के द्वीप पर अमेरिकी टायफॉन मिसाइल प्रणाली की मौजूदगी को लेकर बीजिंग और मॉस्को दोनों ने तीखी नाराजगी जताई है।

जंगल से रेगिस्तान तक त्वरित सैन्य लामबंदी

चीनी थल और वायु बलों ने इस पूरे ऑपरेशन को अचानक मिले आदेश के तहत अंजाम दिया। बेस कैंप में मौजूद सैनिकों ने अपने विशाल ट्रकों और मिसाइल वाहक वाहनों को कम से कम समय में तैयार किया। इसके बाद पूरे सैन्य साजो-सामान को विशेष मालगाड़ियों में लादकर रेगिस्तानी मोर्चे की ओर रवाना कर दिया गया। नए भौगोलिक परिवेश में पहुंचते ही सैनिकों ने अपने पूरे जखीरे का रूप-रंग ही बदल डाला। तस्वीरों में देखा गया कि शुरुआत में वन क्षेत्रों के अनुकूल गहरे हरे और काले छलावरण वाले एचक्यू-9 लॉन्चरों को गोबी पहुंचते ही हल्के पीले रेगिस्तानी रंगों से रंग दिया गया ताकि वे स्थानीय इलाके में पूरी तरह घुल-मिल सकें।

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सैन्य विश्लेषक सोंग झोंगपिंग ने कहा, "अलग-अलग इलाकों में तेजी से ढलने की क्षमता अब आधुनिक सैन्य इकाइयों के लिए जरूरी है।" उनका यह भी मानना है कि किसी भी वास्तविक संघर्ष में अपने मुख्य हथियारों को दुश्मन की नजरों से छिपाकर सुरक्षित बनाए रखना बेहद निर्णायक साबित होता है।

ड्रोन हमलों और आपातकालीन बाधाओं का मुकाबला

गोबी की तपती रेत में हुआ यह अभ्यास केवल मिसाइलों को खड़ा करने या निशाना साधने तक सीमित नहीं था। इसके लिए कई जटिल और बहुआयामी युद्ध परिदृश्यों की रचना की गई थी। इसमें सैनिकों को अचानक हुए मानवरहित ड्रोन हमलों से निपटने, तकनीकी खराबी आने पर तेजी से समाधान ढूंढने और रास्ते में अचानक दिशा बदलकर नया मोर्चा संभालने जैसी कड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। विभिन्न तकनीकी शाखाओं और विशेष इकाइयों ने आपसी समन्वय बनाकर इन बाधाओं का तुरंत प्रत्युत्तर दिया। इस कवायद का प्राथमिक उद्देश्य सैनिकों की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता और विषम परिस्थितियों में संयुक्त रूप से अभियान चलाने की तैयारी को आंकना था।

तकनीकी विशिष्टताओं की बात करें तो एचक्यू-9 चीन का तीसरी पीढ़ी का स्वदेशी मिसाइल रक्षा कवच है, जो मध्यम से लेकर लंबी दूरी तक सुरक्षा प्रदान करता है। इसे बेहद खराब मौसम और दुश्मन द्वारा भारी इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के दौर में भी प्रभावी रहने के लिए तैयार किया गया है। चीनी रक्षा तंत्र का दावा है कि यह प्रणाली लड़ाकू विमानों, जासूसी व हमलावर ड्रोन और सटीक मार करने वाले निर्देशित बमों को हवा में ही ध्वस्त करने में पूरी तरह सक्षम है।

पारंपरिक सीमाओं से परे सैन्य गतिशीलता

इस युद्धाभ्यास ने रणनीतिक विश्लेषकों का ध्यान इसलिए भी खींचा है क्योंकि इसमें शामिल टुकड़ी ईस्टर्न थिएटर कमांड की है। सामान्य तौर पर इस कमांड की मुख्य जिम्मेदारी देश के पूर्वी समुद्री तटों और ताइवान जलडमरूमध्य की निगरानी तक सीमित मानी जाती है। इसके बावजूद पूर्वी मोर्चे की इस यूनिट को देश के दूसरे छोर पर स्थित शुष्क रेगिस्तान में भेजना एक व्यापक सैन्य गतिशीलता का संकेत देता है। विश्लेषक सोंग झोंगपिंग के अनुसार, आधुनिक युद्ध किसी एक संकीर्ण इलाके या सीमा तक सीमित नहीं रह सकते, इसलिए अलग-अलग थिएटर कमांडों के बीच सैनिकों और भारी तोपखाने की तेज आवाजाही बेहद आवश्यक हो चुकी है।

टायफॉन की तैनाती और बीजिंग की कड़ी आपत्ति

इस पूरे शक्ति प्रदर्शन की पृष्ठभूमि जापान के क्यूशू द्वीप पर अमेरिकी सेना द्वारा टायफॉन मिसाइल सिस्टम के उतारे जाने से जुड़ी है। सितंबर के महीने में अमेरिकी और जापानी सैनिक 'ईस्टर्न शील्ड-26' नाम से एक संयुक्त सैन्य ड्रिल चला रहे हैं, जिसमें इस मिसाइल प्रणाली का प्रशिक्षण भी शामिल है। इसके जवाब में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने 21 सितंबर को स्पष्ट किया कि बीजिंग ने टोक्यो को औपचारिक राजनयिक पत्र भेजकर अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया है। इस तैनाती पर रूस की ओर से भी गंभीर एतराज जताया जा चुका है।

चीन का स्पष्ट मत है कि टायफॉन कोई रक्षात्मक हथियार नहीं बल्कि एक रणनीतिक आक्रामक हथियार है। जापानी जमीन पर इसके आने से क्षेत्रीय शांति भंग होने, सैन्य टकराव भड़कने और एशिया में हथियारों की अंधी दौड़ शुरू होने की पूरी संभावना है। इसी चिंता के आधार पर बीजिंग ने जापान से अपनी मौजूदा सैन्य प्राथमिकताओं और नीतियों की नए सिरे से समीक्षा करने की अपील की है।

सवाल-जवाब

चीन ने गोबी रेगिस्तान में किस मिसाइल प्रणाली का युद्धाभ्यास किया?
चीनी सेना ने गोबी के रेगिस्तान में अपने तीसरी पीढ़ी के लंबी दूरी के एयर डिफेंस सिस्टम एचक्यू-9 के साथ युद्धाभ्यास किया।
चीनी मिसाइल सिस्टम के रंग में क्या बदलाव किया गया?
शुरुआत में हरे और काले रंग वाले जंगल छलावरण वाले एचक्यू-9 लॉन्चरों को रेगिस्तान पहुंचकर पीले रंग में रंगा गया ताकि वे रेत में छिप सकें।
इस अभ्यास में चीनी सेना की किस कमांड की यूनिट शामिल थी?
इस अभ्यास में पीपुल्स लिबरेशन आर्मी के ईस्टर्न थिएटर कमांड की एयरफोर्स यूनिट शामिल थी, जो सामान्य तौर पर पूर्वी तटों की सुरक्षा देखती है।
चीन और रूस ने किस अमेरिकी हथियार प्रणाली की तैनाती पर आपत्ति जताई है?
चीन और रूस दोनों ने जापान के क्यूशू द्वीप पर अमेरिकी टायफॉन मिसाइल प्रणाली की तैनाती पर कड़ा राजनयिक विरोध दर्ज कराया है।
जापान में इस समय अमेरिका के साथ कौन सा संयुक्त सैन्य अभ्यास चल रहा है?
जापान में सितंबर के दौरान अमेरिकी और जापानी सेनाओं के बीच 'ईस्टर्न शील्ड-26' नाम से संयुक्त सैन्य अभ्यास चल रहा है।
चीन के विदेश मंत्रालय ने जापान के समक्ष अपना विरोध कब दर्ज कराया?
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन के अनुसार, बीजिंग ने 21 सितंबर को जापान को राजनयिक नोट भेजकर अपना विरोध जताया।
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