साउथ चीन सागर के रणनीतिक जलक्षेत्र में एक बार फिर गंभीर तनाव पैदा हो गया है, जब चीनी कोस्ट गार्ड के एक विशालकाय पोत ने फिलीपींस सरकार की एक असैन्य नौका को जोरदार टक्कर मार दी। यह टक्कर उस समय हुई जब फिलीपींस का जहाज अपने स्थानीय मछुआरों के लिए मानवीय सहायता और ईंधन पहुंचाने के नियमित अभियान पर निकला हुआ था। समंदर के बीच हुई इस हिंसक भिड़ंत में फिलीपींस के जहाज की लोहे की सुरक्षा ग्रिल और डेक के हिस्से बुरी तरह टूटकर बिखर गए। हादसे के बाद दोनों पक्षों की ओर से कड़े बयान जारी किए गए हैं, जिसमें बीजिंग अपनी गलती स्वीकार करने के स्थान पर उल्टे मनीला पर ही समुद्री कायदों की अनदेखी का आरोप मढ़ रहा है।
सबीना शोल के पास घटी घटना का पूरा ब्योरा
यह अप्रिय वाकया शुक्रवार की सुबह लगभग 11:13 बजे दर्ज किया गया। फिलीपींस के ब्यूरो ऑफ फिशरीज एंड एक्वाटिक रिसोर्सेज का जहाज 'बीआरपी दातु मागत सलामत' समंदर में आवश्यक सहायता मिशन का संचालन कर रहा था। यह पोत पलावन प्रांत की समुद्री सीमा से लगभग 54 समुद्री मील की दूरी पर तैनात था, जहां स्थानीय फिलीपीनी मछुआरे अपनी दैनिक आजीविका के लिए मछली पकड़ने में जुटे थे। फिलीपींस का यह जहाज उन मछुआरों को डीजल और रोजमर्रा के जरूरी सामान वितरित करने जा रहा था ताकि वे बिना किसी संकट के खुले समंदर में काम जारी रख सकें।
उसी दौरान चीन के कोस्ट गार्ड का एक विशालकाय जहाज अचानक तेज गति से फिलीपींस की नाव की दिशा में बढ़ने लगा। चीनी पोत ने बेहद खतरनाक तरीके से आक्रामक पैंतरेबाजी शुरू की और देखते ही देखते फिलीपींस की नाव के बेहद नजदीक आ पहुंचा। फिलीपींस के नाविक संभल पाते, उससे पहले ही विशाल चीनी जहाज ने फिलीपींस की छोटी सरकारी नाव के साइड में जोरदार टक्कर मार दी।
टकराव के दौरान मची चीख-पुकार और पोत को पहुंचा नुकसान
फिलीपींस कोस्ट गार्ड द्वारा साझा किए गए दृश्य सामग्री में साफ देखा जा सकता है कि संकट की उस घड़ी में नाव पर मौजूद चालक दल बेहद घबरा गया था। टक्कर से चंद क्षण पहले ही जहाज पर सवार क्रू मेंबर्स चेतावनी भरे लहजे में एक-दूसरे को सतर्क करते हुए चिल्ला रहे थे कि सभी लोग जोरदार टक्कर झेलने के लिए खुद को संभाल लें।
टक्कर का प्रभाव इतना घातक और तीव्र था कि फिलीपींस के जहाज के बाहरी ढांचे को गहरा आघात पहुंचा। नाव की मजबूत लोहे की ग्रिल मुड़कर पूरी तरह अलग हो गईं, धातु के सहारे उखड़ गए और जहाज के मुख्य डेक पर मलबा चारों तरफ फैल गया। यद्यपि जहाज को गंभीर भौतिक क्षति हुई है, किंतु राहत की बात यह रही कि उस पर सवार किसी भी कर्मचारी अथवा नाविक को गंभीर शारीरिक चोट नहीं आई, जिससे एक भीषण जनहानि का संकट टल गया।
घटना को लेकर दोनों देशों के परस्पर विरोधी दावे
इस ताजा समुद्री टकराव के तत्काल बाद मनीला और बीजिंग के राजनयिक गलियारों में तीखी जुबानी जंग शुरू हो गई है। फिलीपींस कोस्ट गार्ड ने आधिकारिक बयान जारी करते हुए सीधे तौर पर चीन पर हमलावर रुख अपनाने का आरोप लगाया है। फिलीपींस का कहना है कि उनकी सरकारी नाव पूरी तरह से असैन्य थी और केवल निर्दोष मछुआरों की मानवीय सहायता के लिए समंदर में मौजूद थी। फिलीपींस के अधिकारियों का स्पष्ट आरोप है कि चीनी पोत ने जानबूझकर आक्रामकता दिखाते हुए उनकी नाव को निशाना बनाया और उसे टक्कर मारी।
इसके विपरीत, चीन के कोस्ट गार्ड ने सबीना शोल के समीप हुई इस मुठभेड़ पर अपनी सफाई पेश करते हुए पूरी घटना का ठीकरा फिलीपींस पर फोड़ दिया है। चीनी प्रशासन का दावा है कि उनके सुरक्षाकर्मियों द्वारा की गई कार्रवाई पूरी तरह कानून सम्मत और नियमों के दायरे में थी। चीन का कहना है कि फिलीपींस की नाव ने उनकी बारंबार दी गई रेडियो चेतावनियों को नजरअंदाज किया था। चीनी पक्ष के अनुसार, फिलीपीनी नाव ने अचानक अपनी गति बढ़ाई और चीनी पोत के मार्ग में आड़े आने का प्रयास किया, जिसके चलते यह टकराव अपरिहार्य हो गया।
अरब सागर में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई हालिया घटना
साउथ चीन सागर में घटी यह घटना दर्शाती है कि वैश्विक समुद्री मार्गों पर नौसैनिक जहाजों की भिड़ंत का जोखिम किस कदर बढ़ता जा रहा है। ठीक इसी प्रकार का तनावपूर्ण नजारा कुछ ही दिन पूर्व अरब सागर में भी देखने को मिला था, जहां भारत और पाकिस्तान के युद्धपोत आमने-सामने आ गए थे।
मंगलवार की शाम अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र के निकट पाकिस्तान की नौसेना का पोत 'पीएनएस हुनैन' भारतीय नौसेना के एक अग्रिम युद्धपोत से टकरा गया था। उस भिड़ंत में पाकिस्तानी नौसेना के जहाज के अग्रिम हिस्से पर बहुत गहरा गड्ढा बन गया था, जिसके चलते पाकिस्तानी पोत को अपनी यात्रा बीच में ही रोककर तत्काल मरम्मत हेतु कराची बंदरगाह की ओर रुख करना पड़ा। वहीं दूसरी ओर, भारतीय युद्धपोत पूरी तरह अक्षुण्ण रहा और उसे कोई उल्लेखनीय क्षति नहीं पहुंची। भारतीय नौसेना के पोत ने ओमान की खाड़ी से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के अपने पूर्व निर्धारित अभियान को बिना रुके जारी रखा। घटना के तुरंत बाद नई दिल्ली ने पाकिस्तान की इस गैर-जिम्मेदाराना हरकत पर इस्लामाबाद के समक्ष कड़ा राजनयिक विरोध दर्ज कराया।
साउथ चीन सागर में पूर्व में हुए हिंसक आमने-सामने
फिलीपींस और चीन के बीच सबीना शोल पर हुआ यह नया विवाद कोई पहली घटना नहीं है। इस विवादित जलक्षेत्र में दोनों देशों के बीच पहले भी कई बार खतरनाक झड़पें हो चुकी हैं। इससे पूर्व जुलाई के महीने में भी ऐसी ही गंभीर स्थिति उत्पन्न हुई थी, जब चीनी सुरक्षा बलों ने फिलीपींस के जहाजों को खदेड़ने के लिए बेहद आक्रामक हथकंडे अपनाए थे।
जुलाई में मसीह-स्केमबोरो शोल के पास चीनी पोतों ने फिलीपींस के सरकारी जहाजों पर भारी दबाव वाली पानी की तोपों यानी वाटर कैनन से हमला किया था, जिससे जहाजों के उपकरण खराब हो गए थे। इसके अतिरिक्त सेकंड थॉमस शोल के निकट एक अन्य झड़प में चीनी कर्मियों ने फिलीपींस के नौसैनिकों पर लकड़ी के डंडों से प्रहार किया था, जिसमें फिलीपींस नौसेना के एक जवान के सिर पर गंभीर चोट आई थी।
जलक्षेत्र पर प्रभुत्व की जंग और गहराता अंतरराष्ट्रीय संकट
चाहे अरब सागर का व्यस्त समुद्री गलियारा हो या फिर प्राकृतिक संसाधनों से संपन्न साउथ चीन सागर, विशाल जहाजों का इस तरह खतरनाक ढंग से एक-दूसरे के आमने-सामने आना वैश्विक सुरक्षा के लिए चिंताजनक विषय है। चीन संपूर्ण साउथ चीन सागर पर अपने ऐतिहासिक प्रभुत्व का दावा करता है, जबकि फिलीपींस, वियतनाम और मलेशिया जैसे तटीय देश इस विस्तारवादी नीति का कड़ा विरोध करते आए हैं।
जब भी कोई पड़ोसी देश अपने विशेष आर्थिक क्षेत्र में रहने वाले मछुआरों को सुरक्षा या राहत सामग्री पहुंचाने का प्रयास करता है, तो चीनी कोस्ट गार्ड और नौसैनिक बल उन्हें बलपूर्वक रोकने की कोशिश करते हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों के विश्लेषकों का स्पष्ट मत है कि खुले समुद्र में असैन्य या सरकारी जहाजों को जानबूझकर टक्कर मारना और आक्रामक पैंतरेबाजी करना अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का खुला उल्लंघन है। यदि इन उकसावे वाली गतिविधियों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो यह क्षेत्रीय तनाव किसी भी समय व्यापक सैन्य संघर्ष का रूप धारण कर सकता है।



















