ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट टीम के आक्रामक ऑलराउंडर ग्लेन मैक्सवेल ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से अचानक संन्यास लेने का फैसला कर खेल जगत को हैरान कर दिया है। मैक्सवेल ने सोमवार देर रात अपने इस बड़े फैसले की औपचारिक जानकारी दी। हालांकि अंतरराष्ट्रीय मंच से विदा लेने के बावजूद वह दुनिया भर की अलग-अलग लीग प्रतियोगिताओं में खेलते हुए नजर आ सकते हैं। अपने पूरे करियर में कई मैच जिताऊ पारियां खेलने वाले इस धाकड़ बल्लेबाज के संन्यास लेते ही क्रिकेट प्रशंसकों की जुबान पर साल 2023 के वनडे विश्व कप की वह ऐतिहासिक पारी फिर से ताजा हो गई, जिसने हारी हुई बाजी को अविश्वसनीय जीत में बदल दिया था।
साल 2025 में खेला था अंतिम वनडे, टी20 में लगातार थे सक्रिय
ग्लेन मैक्सवेल के करियर के हालिया सफर पर नजर डालें तो उन्होंने साल 2025 में ही अपना आखिरी वनडे इंटरनेशनल मुकाबला खेला था। इसके बाद वह वनडे प्रारूप से दूर रहे, लेकिन टी20 इंटरनेशनल क्रिकेट में लगातार अपनी राष्ट्रीय टीम के लिए मैदान पर उतरते रहे। इतना ही नहीं, मैक्सवेल ने इसी साल आयोजित हुए आईसीसी टी20 विश्व कप में भी अपनी टीम की तरफ से भागीदारी की थी। आखिरकार सोमवार देर रात उन्होंने तीनों ही अंतरराष्ट्रीय प्रारूपों को पूरी तरह अलविदा कहने का मन बना लिया। अब वह अपने देश की राष्ट्रीय जर्सी में दोबारा मैदान पर दिखाई नहीं देंगे, हालांकि लीग क्रिकेट के जरिए उनका बल्ला आगे भी घूमता रहने की उम्मीद है।
वानखेड़े में जब 91 रन पर गिर गए थे ऑस्ट्रेलिया के सात विकेट
आईसीसी वनडे विश्व कप 2023 के दौरान मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में ऑस्ट्रेलिया और अफगानिस्तान की टीमें आमने-सामने थीं। इस मुकाबले में अफगानिस्तान ने पहले बल्लेबाजी का न्योता पाकर शानदार खेल दिखाया और स्कोरबोर्ड पर 291 रनों का मजबूत स्कोर खड़ा किया। जवाब में 292 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी ऑस्ट्रेलियाई टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। सलामी बल्लेबाज ट्रेविस हेड बिना खाता खोले शून्य पर पवेलियन लौट गए। इसके बाद डेविड वार्नर 18 रन और मिचेल मार्श 24 रन बनाकर आउट हो गए। मध्यक्रम में मार्नस लाबुशेन और जोश इंग्लिस भी क्रीज पर ज्यादा देर नहीं टिक सके और ऑस्ट्रेलियाई टीम गहरे दबाव में आ गई।
नंबर छह पर आकर मैक्सवेल ने पलट दी पूरी बाजी
जब ग्लेन मैक्सवेल नंबर छह पर बल्लेबाजी करने क्रीज पर पहुंचे, तब शायद किसी को यह अंदाजा नहीं था कि वानखेड़े की पिच पर विश्व क्रिकेट का सबसे बड़ा करिश्मा होने वाला है। एक छोर से नियमित अंतराल पर विकेट गिरते रहे और देखते ही देखते ऑस्ट्रेलिया का स्कोर महज 91 रन पर सात विकेट हो गया। टीम की हार लगभग तय नजर आ रही थी, लेकिन मैक्सवेल ने क्रीज पर टिककर अकेले दम पर जवाबी हमला शुरू किया। उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और मैदान के चारों तरफ आक्रामक अंदाज में चौकों और छक्कों की बरसात कर दी। कप्तान पैट कमिंस दूसरे छोर पर खूंटा गाड़कर खड़े रहे और मैक्सवेल को पूरा स्ट्राइक देते रहे।
128 गेंदों में 201 रन की नाबाद सुनामी और कमिंस का धैर्य
मैक्सवेल ने इस ऐतिहासिक मुकाबले में केवल 128 गेंदों का सामना करते हुए नाबाद 201 रनों की तूफानी पारी खेली। उनकी इस आक्रामक पारी में 21 चौके और 10 गगनचुंबी छक्के शामिल रहे। दूसरे छोर पर खड़े ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पैट कमिंस ने 68 गेंदें खेलकर केवल 12 रन बनाए, लेकिन उन्होंने अपना विकेट बचाए रखकर मैक्सवेल को पूरा मौका दिया। इस करिश्माई साझेदारी के दम पर ऑस्ट्रेलिया ने 46.5 ओवर में 293 रन बनाकर मैच अपने नाम कर लिया था। विश्व कप इतिहास की सबसे अनोखी पारियों में शुमार यह मैच मैक्सवेल की जुझारू क्षमता का सबसे बड़ा प्रमाण बन गया, जिसकी चमक उनके संन्यास के बाद भी क्रिकेट प्रेमियों के दिलों में हमेशा बरकरार रहेगी।



















