वेस्टइंडीज की क्रिकेट टीम ने शनिवार को तीसरे और अंतिम एकदिवसीय मुकाबले में रिकॉर्ड 352 रनों के विशाल लक्ष्य को हासिल कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की। इस शानदार मुकाबले के बाद वेस्टइंडीज के मुख्य कोच डैरेन सैमी ने अपनी टीम के जज्बे और निरंतरता की सराहना की। भारतीय टीम ने हालांकि तीन मैचों की यह एकदिवसीय श्रृंखला 2-1 से अपने नाम कर ली, लेकिन आखिरी मैच में मिली इस यादगार जीत ने मेहमान टीम को क्लीन स्वीप की शर्मिंदगी से बचा लिया और उनका मनोबल काफी बढ़ा दिया।
मैच खत्म होने के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में डैरेन सैमी ने इस बात पर जोर दिया कि मजबूत प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ यह मुकाबला उनकी टीम के लिए भविष्य के लिहाज से काफी फायदेमंद रहेगा। उन्होंने कहा कि भारतीय टीम विश्व स्तर पर बेहद मजबूत और शीर्ष दर्जे की टीम है, और उनके सामने खुद को साबित करना एक बड़ा इम्तिहान था। इस दौरे से वेस्टइंडीज को यह पुख्ता संकेत मिले हैं कि वे क्रिकेट जगत की सर्वश्रेष्ठ टीमों को कड़ी चुनौती देने का माद्दा रखते हैं।
शाई होप की कप्तानी पारी और असाधारण जुझारूपन
इस बड़े मुकाबले में वेस्टइंडीज की जीत के मुख्य सूत्रधार उनके कप्तान शाई होप रहे, जिन्होंने नाबाद 162 रनों की आतिशी शतकीय पारी खेलकर अपनी टीम को जीत की दहलीज के पार पहुंचाया। डैरेन सैमी ने कप्तान के इस बेमिसाल प्रदर्शन की दिल खोलकर तारीफ की। दिलचस्प बात यह रही कि शाई होप ने यह ऐतिहासिक पारी भारतीय पारी के पूरे 50 ओवर तक विकेटकीपिंग का जिम्मा संभालने के तुरंत बाद खेली।
कोच ने जानकारी दी कि नियमित विकेटकीपर ज्वेल एंड्रयू की अंगुली में कुछ समस्या और दर्द था, जिसके चलते कप्तान ने अतिरिक्त जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली। शाई होप मैदान पर लगातार 98.2 ओवर तक डटे रहे, जिसके कारण मैच के बाद वे काफी थक गए थे और उनकी जगह कोच सैमी को प्रेस कॉन्फ्रेंस में शामिल होना पड़ा। सैमी के अनुसार, आधी सदी से अधिक ओवरों तक कीपिंग ग्लव्स पहनने के बाद पैड बांधकर मैदान में उतरना और 352 रनों के दबाव भरे चेज में नाबाद 162 रन बनाना किसी असाधारण खिलाड़ी के बूते ही संभव है। कोच ने यह भी महसूस किया कि शाई होप ने वेस्टइंडीज क्रिकेट के प्रति जो समर्पण दिखाया है और जिस तरह से आगे बढ़कर नेतृत्व किया है, उसका उन्हें उतना श्रेय कभी नहीं मिला जिसके वे हकदार हैं।
गेंदबाजों का अनुशासित प्रदर्शन और रणनीतिक अनुशासन
डैरेन सैमी ने इस मुकाबले में अपनी टीम के गेंदबाजों के योगदान को भी रेखांकित किया। उन्होंने स्वीकार किया कि श्रृंखला के तीनों मैचों में गेंदबाजों पर जबरदस्त शारीरिक और रणनीतिक दबाव बना हुआ था, क्योंकि पिचों से तेज या स्पिन गेंदबाजों को कोई खास मदद नहीं मिल पा रही थी। इसके बावजूद गेंदबाजों ने योजना के अनुसार काम किया और सपाट ट्रैक पर भारतीय बल्लेबाजी क्रम को एक औसत स्कोर के आसपास रोक कर रखा।
कोच ने विशेष रूप से नई गेंद संभालने वाले जेडन सील्स, मैथ्यू फोर्ड और उनका साथ देने वाले अल्जारी जोसेफ की कसी हुई गेंदबाजी का उल्लेख किया। पावरप्ले के ओवरों में इन गेंदबाजों ने सही लाइन और लेंथ पर गेंद डालकर दबाव बनाया और लगातार विकेट चटकाने के अवसर पैदा किए। सैमी ने बताया कि अनुकूल परिस्थितियां न होने पर भी सटीक क्षेत्रों में गेंदबाजी करते रहने का अनुशासन ही अंत में टीम के काम आया, जिसने 352 के चुनौतीपूर्ण लक्ष्य को अंततः हासिल करने लायक बना दिया।



















