कनाडा के टोरंटो शहर में 1997 में खेला गया सहारा कप भारत-पाकिस्तान क्रिकेट प्रतिद्वंद्विता का एक ऐसा यादगार अध्याय बन गया, जिसे आज 'सौरव गांगुली बनाम पाकिस्तान' के नाम से याद किया जाता है। 'प्रिंस ऑफ कोलकाता' और भारत के भावी कप्तान के रूप में उभर रहे गांगुली ने इस टूर्नामेंट में बल्ले और गेंद दोनों से ऐसा विस्फोटक ऑलराउंड प्रदर्शन किया कि पाकिस्तान की मजबूत टीम के पास उनका कोई जवाब नहीं था। यह महज एक सीरीज जीत नहीं थी, यह एक महानायक के क्रिकेट इतिहास में अमर होने की कहानी थी।
पाकिस्तानी गेंदबाजों की धज्जियां उड़ाई बल्ले से
पांच मैचों की इस वनडे सीरीज में पाकिस्तान ने अपनी सबसे घातक गेंदबाजी तिकड़ी उतारी थी। वसीम अकरम, वकार युनिस, सकलैन मुश्ताक और अकीब जावेद जैसे विश्व स्तरीय गेंदबाजों से सजे पाकिस्तानी आक्रमण के सामने कोई भी बल्लेबाज आसानी से नहीं टिकता, लेकिन गांगुली के लिए यह दबाव एक सुनहरे मौके में बदल गया। उन्होंने इन सभी दिग्गजों को पस्त करते हुए सीरीज में सबसे ज्यादा 222 रन बनाए। ऑफ-साइड में उनके ट्रेडमार्क शॉट्स और ऊंचे छक्कों ने टोरंटो में मौजूद दर्शकों का दिल जीत लिया। सीरीज के हर मैच में वह भारतीय पारी की असली धुरी साबित हुए और पाकिस्तानी गेंदबाज उन्हें रोकने का कोई रास्ता नहीं खोज पाए।
गेंदबाजी में भी बरपाया कहर
1997 के सहारा कप में गांगुली का सबसे बड़ा चौंकाने वाला पहलू उनकी मध्यम तेज गेंदबाजी रही। टोरंटो की हरी और सीम गेंदबाजों के लिए मददगार पिचों पर उन्होंने स्विंग और सीम का जबरदस्त इस्तेमाल किया। मुख्यतः एक टॉप-ऑर्डर बल्लेबाज के रूप में जाने जाने वाले गांगुली ने इस सीरीज में टीम के सभी विशेषज्ञ गेंदबाजों को पीछे छोड़ते हुए सबसे ज्यादा 15 विकेट अपने नाम किए। सीरीज के तीसरे मैच में तो उन्होंने महज 16 रन देकर 5 विकेट झटके, जो उस वक्त उनका व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन था। पाकिस्तानी बल्लेबाज उनकी स्विंग होती गेंदों को समझ ही नहीं पा रहे थे और एक के बाद एक अपना विकेट गंवाते रहे।
चार मैच, चार मैन ऑफ द मैच, एक अजेय विश्व रिकॉर्ड
गांगुली का इस सीरीज में वर्चस्व इस कदर था कि उन्होंने एक ऐसा विश्व रिकॉर्ड बना दिया जिसे आज तक कोई नहीं तोड़ पाया है। पांच मैचों की सीरीज में उन्होंने लगातार 4 मैचों में मैन ऑफ द मैच का खिताब अपने नाम किया। क्रिकेट के इतिहास में यह एक ऐसी उपलब्धि है जो किसी और के नाम नहीं। उनके इस बेमिसाल ऑलराउंड प्रदर्शन की बदौलत भारत ने पाकिस्तान को सीरीज में 4-1 से करारी शिकस्त दी। सीरीज का पर्दा उठने के बाद मैन ऑफ द सीरीज का पुरस्कार भी स्वाभाविक रूप से उन्हीं को मिला, क्योंकि इस सम्मान के लिए दूसरा कोई दावेदार था ही नहीं।
दादा की वह सीरीज जिसे इतिहास याद रखेगा
1997 का सहारा कप भारतीय क्रिकेट इतिहास में एक अहम टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस टूर्नामेंट ने पूरी दुनिया को दिखाया कि सौरव गांगुली सिर्फ एक बेहतरीन बल्लेबाज नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर मैच की पूरी दिशा बदल देने वाले एक महान ऑलराउंडर हैं। आज भी इस सीरीज को 'सौरव गांगुली बनाम पाकिस्तान' के नाम से इसलिए याद किया जाता है, क्योंकि उस मैदान पर पाकिस्तान की हार भारत की टीम से नहीं, बल्कि अकेले 'दादा' के अदम्य हौसले और जबरदस्त क्रिकेट प्रतिभा से हुई थी।













