पंजाब के जालंधर शहर की एक साधारण रिहायशी गली में की गई त्वरित पुलिस कार्रवाई ने एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय घोटाले का पर्दाफाश कर दिया है। पंजाब पुलिस ने 65 वर्षीय मंजीत सिंह बेदी को हिरासत में लिया है, जो अमेरिकी केंद्रीय जांच एजेंसी एफबीआई की मोस्ट वांटेड सूची में शामिल था। आरोपी पर अमेरिकी सरकार की महत्वाकांक्षी सामाजिक कल्याण योजना में करीब 6 लाख डॉलर (भारतीय मुद्रा में लगभग 5 करोड़ रुपये से अधिक) की धोखाधड़ी करने का संगीन आरोप है। अमेरिका से फरार होकर कनाडा के रास्ते भारत पहुंचे बेदी की धरपकड़ पर एफबीआई ने 1.50 लाख डॉलर यानी करीब 1.40 करोड़ रुपये का भारी-भरकम इनाम घोषित किया था। इस नाटकीय गिरफ्तारी के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह इनामी राशि पंजाब पुलिस को मिलेगी या फिर इसका हकदार कोई गुप्त सूचना देने वाला मुखबिर होगा।
टैकोमा ग्रॉसरी स्टोर से लेकर 6 लाख डॉलर के SNAP घोटाले की पूरी कहानी
मंजीत सिंह बेदी वर्ष 2019 में भारत से अमेरिका गया था, जहां उसके दो बेटे पहले से रह रहे थे। वॉशिंगटन राज्य के टैकोमा शहर में उसने एक एशियन ग्रॉसरी स्टोर चलाना शुरू किया। अमेरिकी जांच एजेंसियों के अनुसार, मार्च 2024 से जून 2025 के बीच बेदी ने अमेरिकी सरकार के सप्लीमेंटल न्यूट्रिशन असिस्टेंस प्रोग्राम (SNAP) का गलत इस्तेमाल कर बड़ा घोटाला किया। यह योजना गरीब और जरूरतमंद परिवारों को खाद्य सामग्री खरीदने के लिए इलेक्ट्रॉनिक लाभ हस्तांतरण (EBT) कार्ड के जरिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है।
पुलिस और एफबीआई की जांच रिपोर्ट्स के अनुसार, बेदी अपने स्टोर पर आने वाले EBT कार्डधारकों के कार्ड स्वाइप करता था। वह सरकारी कोष से पूरी रकम वसूलता था, लेकिन कार्डधारक को उसका लगभग आधा हिस्सा ही नकद देता था और बाकी की रकम खुद हड़प लेता था। इस तरह अवैध तरीके से उसने अमेरिकी करदाताओं के 6 लाख डॉलर से अधिक राशि का गबन कर लिया। जब अमेरिकी न्याय विभाग को इस फर्जीवाड़े की भनक लगी, तो बेदी के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसा गया। उसे अदालत में पेश होने का समन भेजा गया, अपना पासपोर्ट जमा करने का आदेश दिया गया और वॉशिंगटन राज्य न छोड़ने के निर्देश दिए गए। हालांकि, अप्रैल 2026 में बेदी चोरी-छिपे सीमा पार कर कनाडा पहुंचा और वहां से भारत भाग आया। इसके बाद 21 मई 2026 को अमेरिकी संघीय अदालत ने उसके खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया।
जालंधर के रामामंडी केस से कैसे जुड़ा एफबीआई के मोस्ट वांटेड का सुराग
3 सितंबर 2026 को एफबीआई ने मंजीत सिंह बेदी को अपने सबसे प्रमुख भगोड़े जालसाजों की सूची में शामिल करते हुए 1.50 लाख डॉलर के इनाम की घोषणा की। दूसरी ओर, पंजाब में बेदी का सामना स्थानीय पुलिस से हुआ। पंजाब के पुलिस महानिदेशक गौरव यादव और जालंधर के पुलिस आयुक्त सतिंदर सिंह ने इस महत्वपूर्ण सफलता की पुष्टि की। अधिकारियों ने बताया कि बेदी का नाम जालंधर के रामामंडी पुलिस स्टेशन में दर्ज ट्रैवल फ्रॉड (यात्रा धोखाधड़ी) से जुड़े एक स्थानीय मामले की जांच के दौरान सामने आया था।
स्थानीय केस की तफ्तीश करते हुए जब पंजाब पुलिस ने बेदी के बैकग्राउंड और पहचान पत्रों का सत्यापन किया, तो उसकी अंतरराष्ट्रीय आपराधिक पृष्ठभूमि उजागर हुई। इसके बाद जालंधर पुलिस की टीम ने उसकी लोकेशन और पहचान की पुष्टि करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया। वर्तमान में पुलिस उसके अंतरराष्ट्रीय यात्रा दस्तावेजों, बैंक खातों के लेनदेन और भारत में उसकी मदद करने वाले सहयोगियों के नेटवर्क की बारीकी से जांच कर रही है।
1.40 करोड़ रुपये का एफबीआई इनाम: किसे और कैसे मिलेगा भुगतान?
बेदी की गिरफ्तारी के बाद 1.40 करोड़ रुपये (1.50 लाख डॉलर) के इनाम को लेकर कानूनी और प्रशासनिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। एफबीआई के नियमों के अनुसार, इनाम की राशि स्वतः किसी भी पुलिस विभाग को केवल आरोपी को पकड़ने भर से नहीं मिल जाती। अमेरिकी इनामी तंत्र यह देखता है कि किस विशिष्ट सूचना या कार्रवाई के कारण भगोड़े की सटीक लोकेशन का पता चला और उसकी गिरफ्तारी संभव हो सकी।
यदि पंजाब पुलिस की जांच टीम ने अपनी आंतरिक खुफिया जानकारी, तकनीकी सर्विलांस और स्थानीय सूत्रों के दम पर बेदी को स्वतंत्र रूप से खोज निकाला है, तो पंजाब पुलिस आधिकारिक तौर पर इस इनाम का दावा कर सकती है। वहीं, अगर किसी नागरिक या मुखबिर ने एफबीआई या पंजाब पुलिस को बेदी के जालंधर में छिपे होने की सटीक गुप्त सूचना दी थी, तो अमेरिकी एजेंसियां उस व्यक्ति को इनामी राशि देने पर विचार करेंगी। एफबीआई की सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि 1.40 करोड़ रुपये की राशि किसे हस्तांतरित की जाएगी।



















