महाराष्ट्र के जलगांव तालुका अंतर्गत भोकर स्थित स्टेट बैंक की शाखा में दिनदहाड़े हथियारबंद बदमाशों ने धावा बोलकर सनसनी फैला दी। हथियारों से लैस हमलावरों ने बैंक कर्मियों को बंधक बनाकर वहां से नकदी और आभूषणों से भरे बैग लूटे और फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही सक्रिय हुई पुलिस ने घेराबंदी करते हुए मुख्य सरगना बर्खास्त पुलिस सब-इंस्पेक्टर शंकर जासक और गजानन पवार सहित कुल चार आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। पकड़े गए आरोपियों के पास से लगभग 15 लाख रुपये नकद और सोने से भरे बैग बरामद किए गए हैं। इस पूरी वारदात में एक पूर्व पुलिस अधिकारी के मुख्य योजनाकार के रूप में सामने आने से कानून व्यवस्था से जुड़े महकमे में भी हड़कंप मच गया है।
जेल की सलाखों के पीछे रची गई थी पूरी साजिश
जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, वे किसी सुनियोजित अपराध गाथा जैसे हैं। वारदात की पटकथा जलगांव सेंट्रल जेल की चारदीवारी के भीतर लिखी गई थी। मुख्य आरोपी शंकर जासक पहले से ही बैंक डकैती के गंभीर मामले में सलाखों के पीछे बंद था। वहीं दूसरा मुख्य आरोपी गजानन राजेंद्र पवार भी हत्या के एक संगीन मामले में उसी जेल में बंद था। दोनों की मुलाकात जेल में हुई और वहीं दोनों के बीच जान-पहचान बढ़ी। जेल में सजा काटने के दौरान ही दोनों ने बाहर निकलकर एक नया गिरोह बनाने और किसी बड़ी बैंक शाखा को निशाना बनाने का पूरा खाका तैयार किया।
जेल से रिहाई के कुछ ही हफ्तों के भीतर इस योजना को जमीन पर उतार दिया गया। शंकर जासक लगभग दो से तीन महीने पहले ही अदालत से जमानत पाकर जेल से बाहर आया था। दूसरी ओर गजानन पवार भी लगभग डेढ़ महीने पहले जमानत पर छूटा था। जेल से बाहर आते ही दोनों ने पुराने संपर्कों को जोड़ा, दो अन्य साथियों को गिरोह में शामिल किया और रेकी पूरी करने के बाद भोकर स्थित स्टेट बैंक की शाखा को लूटने का फैसला कर लिया।
आरोपियों का पुराना आपराधिक इतिहास
इस सनसनीखेज वारदात का सूत्रधार शंकर जासक पहले भी इसी तरह के बड़े अपराध को अंजाम दे चुका है। वर्ष 2023 में जलगांव शहर के शनिपेठ पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में आने वाली स्टेट बैंक शाखा में उसने अपने साले की मदद से लगभग 3.17 करोड़ रुपये की बहुत बड़ी डकैती डाली थी। उस वारदात के उजागर होने के बाद उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था और वह जेल भेज दिया गया था।
वहीं उसका साथी गजानन राजेंद्र पवार वर्ष 2024 में चालिसगांव शहर के नजदीक हुए एक हत्याकांड का मुख्य आरोपी रहा है। अनैतिक संबंधों के विवाद में अपनी प्रेमिका के पति की जान लेने के आरोप में उसे गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। दोनों ही आरोपी गंभीर अपराधों के मामलों में जेल में बंद थे और जमानत का लाभ मिलते ही उन्होंने फिर से संगठित होकर अपराध का रास्ता चुन लिया।
गनपॉइंट पर 16 लॉकर खुलवाए और 45 मिनट तक की लूटपाट
योजना के मुताबिक चारों बदमाश हथियारों से लैस होकर भोकर की स्टेट बैंक शाखा में दाखिल हुए। आरोपियों के पास छर्रे वाली पिस्तौल थी। बैंक के भीतर कदम रखते ही उन्होंने पिस्तौल तानकर बैंक मैनेजर और कैशियर को डराया-धमकाया। हथियार के बल पर दोनों अधिकारियों को बंधक बना लिया गया और उनके सिर पर पिस्तौल रखकर कुल 16 लॉकरों को जबरन खुलवाया गया।
लॉकरों में रखे सोने के आभूषणों और उपलब्ध नकदी को बदमाशों ने अपने साथ लाए गए पांच से छह बैगों में तेजी से भरना शुरू किया। आरोपी लगभग 40 से 45 मिनट तक बैंक परिसर के भीतर मौजूद रहे और पूरी इत्मीनान से लूटपाट करते रहे। बैग पूरी तरह भरने के बाद चारों आरोपी मौके से भाग निकले।
ग्रामीणों का पीछा और खेत से हुई गिरफ्तारी
डकैती को अंजाम देने के बाद शंकर जासक और गजानन पवार धरणगांव की दिशा में भागे। हालांकि वारदात की भनक लगते ही भोकर गांव के स्थानीय नागरिकों ने साहस दिखाते हुए उनका पीछा करना शुरू कर दिया। इसी बीच जिले के पूरे पुलिस तंत्र को वायरलेस पर अलर्ट जारी कर नाकाबंदी के निर्देश दिए गए। ग्रामीणों को पीछे आता देख और पुलिस की घेराबंदी से घबराकर आरोपियों ने चावलखेड़ा के पास अपने पास मौजूद चार बैग सड़क किनारे झाड़ियों में फेंक दिए और खेतों की ओर भाग गए।
चावलखेड़ा के निकट सड़क किनारे लावारिस बैग पड़े होने की सूचना मिलते ही पुलिस इंस्पेक्टर उमाकांत गायकवाड़ अपनी टीम के साथ तुरंत मौके पर पहुंचे। पुलिस दल ने ग्रामीणों से बदमाशों के भागने की दिशा की सटीक जानकारी जुटाई और आसपास के खेतों में सघन तलाशी अभियान शुरू किया। आखिरकार एक खेत में छिपे शंकर जासक और गजानन पवार को पुलिस ने घेराबंदी करके दबोच लिया।
नकदी बरामदगी और बाकी साथियों की जांच जारी
पुलिस ने शंकर जासक और गजानन पवार के अलावा उनके दो अन्य साथियों को भी गिरफ्तार कर लिया है। पकड़े गए आरोपियों के पास से करीब 15 लाख रुपये नकद और सोने से भरे बैग बरामद किए जा चुके हैं। पूछताछ में दोनों मुख्य आरोपियों ने जेल में हुई पहली मुलाकात से लेकर बैंक में डकैती डालने तक के पूरे घटनाक्रम का खुलासा कर दिया है।
जांच अधिकारी अब इस बात की पड़ताल कर रहे हैं कि साथ पकड़े गए बाकी दो आरोपियों का पुराना इतिहास क्या है और वे इस गिरोह में किस प्रकार शामिल हुए। इसके साथ ही बैंक से वास्तव में कुल कितनी राशि की नकदी और कितना सोना गायब हुआ है, इसका पूरा ऑडिट कराया जा रहा है। जमानत पर छूटते ही दिनदहाड़े बैंक डकैती जैसी बड़ी वारदात को अंजाम दिए जाने से पूरा इलाका सकते में है।























