राजस्थान के झुंझुनूं जिले में मानसिक रोगियों की देखभाल के नाम पर चल रहे एक निजी संस्थान से बेहद अमानवीय और घिनौना कृत्य सामने आया है। बगड़ थाना इलाके के आदर्श नगर प्रतापपुरा स्थित एक विमंदित गृह में उपचार की उम्मीद लेकर पहुंची 30 वर्षीय युवती को गंभीर यातनाओं का शिकार होना पड़ा। जिस जगह परिवार ने अपनी बेटी की सलामती और सुधार का भरोसा जताया था, वहीं उसके साथ दुष्कर्म, बेरहमी से मारपीट और बंधुआ मजदूरी जैसी क्रूर हरकतें की गईं। मामले का खुलासा तब हुआ जब परिजन युवती को वहां से वापस अपने घर लेकर आए और उसने अपने ऊपर बीते खौफनाक मंजर की जानकारी दी।
दाखिले के पहले दिन ही संचालक पर दुष्कर्म का आरोप
पीड़िता की मां ने स्थानीय बगड़ थाने में लिखित तहरीर देकर मां सेवा संस्थान विमंदित गृह के संचालक बनवारीलाल सैनी और उसकी पत्नी के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया है। परिजनों के अनुसार, 30 वर्षीय युवती पिछले कुछ समय से मानसिक अस्वस्थता का सामना कर रही थी। समुचित चिकित्सा और सुरक्षित माहौल की तलाश में परिवार ने उसे इस केयर होम में भर्ती कराया था। पीड़िता ने परिजनों को बताया कि जिस तारीख को उसे संस्थान में पहली बार छोड़ा गया था, उसी दिन संचालक बनवारीलाल सैनी ने उसके साथ जबरन दुराचार किया। इस कृत्य के बाद पीड़िता बुरी तरह सहम गई और संस्थान में लगातार भय के साए में रही।
सिर के बाल काटे, खेतों में जबरन करवाई गई मजदूरी
दुराचार के बाद भी युवती पर अमानवीय अत्याचारों का दौर नहीं थमा। परिजनों की शिकायत के मुताबिक, आरोपी संचालक और उसकी पत्नी ने मिलकर युवती के साथ कई मर्तबा लाठी-डंडों और थप्पड़ों से मारपीट की। आरोपियों ने क्रूरता की हद पार करते हुए जबरन उसके सिर के बाल पूरी तरह कटवा दिए। पीड़िता ने खुलासा किया कि इस केयर होम में रहने वाले मानसिक रूप से कमजोर महिला और पुरुष मरीजों को बंधक बनाकर उनसे आसपास के खेतों में कड़ा शारीरिक श्रम करवाया जाता था। सुबह से शाम तक खेतों में काम कराने के बावजूद मरीजों को भरपेट भोजन, पीने का साफ पानी अथवा चाय तक नहीं दी जाती थी। अन्य मरीजों के साथ भी रोज गाली-गलौज और मारपीट की जाती थी। इसके अलावा, संस्थान में काम करने वाली गीता नाम की रसोइया पर पीड़िता के कपड़े जला देने का भी गंभीर आरोप लगा है।
खाली स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर कराकर ब्लैकमेलिंग की साजिश
इस संस्थान में शारीरिक और मानसिक उत्पीड़न के साथ-साथ कानूनी रूप से फंसाने और धोखाधड़ी करने की साजिश भी रची गई थी। पीड़िता की मां ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि युवती के दाखिले और बाद में 28 सितंबर को उसे वापस ले जाते समय आरोपी संचालक ने चतुराई दिखाई। बनवारीलाल ने युवती के भाई से 100-100 रुपये के दो खाली बॉन्ड और स्टांप पेपरों पर जबरन दस्तखत करवाए और कागजात अपने पास रख लिए। पीड़िता के परिवार को गहरा डर सता रहा है कि आरोपी पक्ष अपनी करतूतों पर पर्दा डालने और शिकायत वापस लेने का दबाव बनाने के लिए इन खाली हस्ताक्षरित दस्तावेजों का दुरुपयोग कर सकता है।
पुलिस ने शुरू की जांच, संस्थान की स्थिति पर नजर
इस गंभीर मामले की सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद हो गया है। बगड़ थानाधिकारी सीआई मुकेश कुमार ने स्पष्ट किया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए संबंधित आरोपियों के खिलाफ विभिन्न गैर-जमानती और कठोर धाराओं में मामला पंजीबद्ध कर लिया गया है। पुलिस ने पीड़िता का नियमानुसार मेडिकल परीक्षण करवा लिया है। इसके साथ ही एक विशेष पुलिस टीम उक्त विमंदित गृह के पूरे परिसर, वहां मौजूद अन्य मरीजों की स्वास्थ्य स्थिति और संस्थान की गतिविधियों की गहनता से पड़ताल कर रही है ताकि अन्य पीड़ितों को भी न्याय दिलाया जा सके।



















