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महाराष्ट्र और गुजरात में 11 ठिकानों पर ईडी की बड़ी कार्रवाई, अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट और क्रिप्टो नेटवर्क पर कसा शिकंजाअपराध
30 अक्तू॰ 2026, 11:04 pm (2 घंटे पहले)· 0

महाराष्ट्र और गुजरात में 11 ठिकानों पर ईडी की बड़ी कार्रवाई, अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट और क्रिप्टो नेटवर्क पर कसा शिकंजा

प्रवर्तन निदेशालय ने नशीले पदार्थों की तस्करी से जुड़े धन शोधन मामले में मुंबई, नवी मुंबई, सूरत और भावनगर में छापेमारी की, जिसमें विदेशी मुद्रा और क्रिप्टो खातों के जरिए अवैध कमाई खपाने का खुलासा हुआ।

प्रवर्तन निदेशालय ने अंतरराष्ट्रीय नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार और उससे जुड़ी गैरकानूनी कमाई के खिलाफ दो राज्यों में एक साथ व्यापक तलाशी अभियान चलाया है। वित्तीय अपराधों की जांच करने वाली इस केंद्रीय एजेंसी ने महाराष्ट्र और गुजरात में कुल 11 विशिष्ट परिसरों पर दबिश दी। यह पूरी कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत की गई, जिसका मुख्य उद्देश्य सीमा पार फैले नशीले पदार्थों के एक बड़े सिंडिकेट के वित्तीय ढांचे को ध्वस्त करना और अवैध बिक्री से पैदा हुई काली कमाई के रास्तों की पहचान करना था।

दो राज्यों के चार प्रमुख शहरों में छापे

प्रवर्तन निदेशालय की मुंबई जोनल इकाई द्वारा इस तलाशी अभियान का समन्वय और संचालन बुधवार के दिन किया गया था। इस अभियान के तहत महाराष्ट्र के मुंबई और नवी मुंबई के कई ठिकानों को खंगाला गया, जबकि गुजरात में व्यापारिक केंद्र सूरत और भावनगर के परिसरों पर भी एक साथ छापेमारी की गई। जांच एजेंसी के अधिकारियों ने विशेष रूप से यह जानकारी भी साझा की है कि जिन परिसरों की तलाशी ली गई, उनमें कुछ क्रिप्टो करेंसी कारोबारियों के ठिकाने भी शामिल थे। इन विशिष्ट ठिकानों पर एजेंसी नशीले पदार्थों के अवैध लेन-देन और उससे जुड़े डिजिटल वित्तीय लेन-देन के गुप्त निशानों की तलाश कर रही थी।

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तलाशी की इस सघन प्रक्रिया के दौरान जांच दल ने मौके से कई महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य और अन्य संवेदनशील दस्तावेज अपने कब्जे में लिए हैं। केंद्रीय एजेंसी द्वारा जब्त की गई सामग्रियों में अत्याधुनिक स्मार्टफोन, लैपटॉप और आंतरिक स्टोरेज डिवाइस शामिल हैं। इसके अलावा वित्तीय जांच को पुख्ता करने के उद्देश्य से अधिकारियों ने कंपनियों के वाणिज्यिक बहीखाते, वित्तीय लेजर और विभिन्न निवेशों से जुड़े कागजात भी एकत्र किए हैं। इन सभी रिकॉर्ड्स की विस्तृत पड़ताल की जा रही है ताकि अवैध धन शोधन की प्रत्येक कड़ी को स्थापित किया जा सके।

नवीन और धीरज चिचकर पर गिरोह चलाने का आरोप

प्रवर्तन निदेशालय के अनुसार, इस पूरे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का संचालन मुख्य रूप से दो प्रमुख व्यक्तियों नवीन चिचकर और धीरज चिचकर द्वारा अपने अन्य साथियों की मदद से किया जा रहा था। जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि बुधवार को की गई छापेमारी इसी गिरोह की अवैध संपत्तियों की पहचान करने और नशीले पदार्थों की बिक्री से अर्जित धन को संभालने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले विभिन्न माध्यमों का पर्दाफाश करने की रणनीति का हिस्सा थी। यह संपूर्ण जांच सिंडिकेट के संगठनात्मक ढांचे के साथ-साथ उसकी अंतरराष्ट्रीय फंडिंग व्यवस्था पर पूरी तरह केंद्रित है।

धन शोधन के इस बड़े मामले की शुरुआत नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की मुंबई इकाई द्वारा स्वापक औषधि और मन प्रभावी पदार्थ अधिनियम के तहत दर्ज की गई एक शिकायत के बाद हुई थी। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने मुंबई और नवी मुंबई के इलाकों में छापेमारी करके नशीले पदार्थों की एक बड़ी खेप बरामद की थी, जिसमें उच्च गुणवत्ता वाला हाइड्रोपोनिक गांजा, कोकीन और भारी मात्रा में अघोषित नकदी जब्त हुई थी। उसी बरामदगी और प्राथमिक जांच के आधार पर बाद में प्रवर्तन निदेशालय ने वित्तीय धोखाधड़ी और मनी लॉन्ड्रिंग के तहत अपनी जांच शुरू की।

विदेशी नशीले पदार्थों की आपूर्ति और तस्करी

जांच अधिकारियों की मानें तो इस मामले में शामिल सभी आरोपी मादक पदार्थों की खुदरा और थोक बिक्री के एक बेहद सुव्यवस्थित और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से गहराई से जुड़े हुए थे। यह पूरा सिंडिकेट मुख्य रूप से कोकीन, हाइड्रोपोनिक भांग, एलएसडी और नशीले एडिबल्स की खरीद-बिक्री में संलिप्त था। जांच में यह तथ्य भी सामने आया है कि इन प्रतिबंधित मादक द्रव्यों की अधिकांश आपूर्ति भारत के बाहर स्थित विदेशी स्रोतों से की जाती थी, जिससे यह स्पष्ट होता है कि गिरोह के तार अंतरराष्ट्रीय सीमा पार आपूर्ति श्रृंखला और व्यापक वितरण तंत्र से बंधे थे।

प्रवर्तन निदेशालय ने इस सिंडिकेट द्वारा अवैध धन को मुख्य वित्तीय प्रणाली में शामिल करने के जटिल तौर-तरीकों का भी खुलासा किया है। मादक पदार्थों की बिक्री से प्राप्त होने वाली रकम मुख्य रूप से नकदी के रूप में ली जाती थी। इसके बाद इस काली कमाई को बैंकिंग और वित्तीय प्रणाली में विभिन्न परतों के जरिए जमा कराया जाता था, ताकि वह पूरी तरह वैध आय जैसी दिखने लगे। एजेंसी ने पाया कि इस अवैध नकदी को घुमाकर अमेरिकी डॉलर और थाई बहत जैसी विदेशी मुद्राओं में बदला जा रहा था।

वैध कारोबार और क्रिप्टो खातों में छिपाई जा रही थी कमाई

वित्तीय हेराफेरी के इस खेल में काली कमाई के एक हिस्से को कुछ चुनिंदा वैध और वास्तविक दिखने वाले व्यापारिक उपक्रमों में भी डाला जाता था, जिससे उस धन को साफ-सुथरा साबित किया जा सके। इसके समानांतर, क्रिप्टो करेंसी से जुड़े व्यापारियों के यहां की गई तलाशी के दौरान कई क्रिप्टो वॉलेट और डिजिटल संपत्तियों की जानकारी भी सामने आई। जांच एजेंसी का मानना है कि प्रथम दृष्टया यह संपूर्ण डिजिटल संपत्ति मादक पदार्थों की अवैध गतिविधियों से हुई अपराध की कमाई से सीधे तौर पर जुड़ी हुई है।

एजेंसी के अधिकारियों ने यह भी बताया कि इस मामले से जुड़े संदिग्ध व्यक्तियों द्वारा भारत से बाहर बैठकर कई विदेशी क्रिप्टो ट्रेडिंग खातों का संचालन किया जा रहा था। वर्तमान में जांच अधिकारी इन सभी क्रिप्टो विवरणों की गहराई से जांच कर रहे हैं ताकि उनसे जुड़े अन्य खातों की पहचान की जा सके और उनके पुराने लेन-देन के पूरे इतिहास का विश्लेषण किया जा सके। प्रवर्तन निदेशालय ने स्पष्ट किया है कि उसका अंतिम उद्देश्य अपराध से अर्जित इस पूरी संपत्ति को जब्त करना और सुरक्षित करना है, तथा इस पूरे मामले में आगे की कानूनी जांच निरंतर जारी है।

सवाल-जवाब

प्रवर्तन निदेशालय ने किन राज्यों और शहरों में छापेमारी की?
प्रवर्तन निदेशालय ने महाराष्ट्र के मुंबई व नवी मुंबई तथा गुजरात के सूरत और भावनगर में कुल 11 परिसरों पर छापेमारी की।
इस तलाशी अभियान का मुख्य उद्देश्य क्या था?
इसका उद्देश्य एक अंतरराष्ट्रीय नशीले पदार्थों के सिंडिकेट को खत्म करना और ड्रग बिक्री से अर्जित अपराध की कमाई के वित्तीय रास्तों का पता लगाना था।
इस अंतरराष्ट्रीय ड्रग सिंडिकेट का संचालन कौन कर रहा था?
एजेंसी के अनुसार इस सिंडिकेट का संचालन मुख्य रूप से नवीन चिचकर और धीरज चिचकर अपने अन्य सहयोगियों के साथ मिलकर कर रहे थे।
छापेमारी के दौरान जांच दल ने क्या-क्या बरामद किया?
अधिकारियों ने हाई-एंड स्मार्टफोन, लैपटॉप, स्टोरेज डिवाइस के साथ-साथ व्यावसायिक बहीखाते, लेजर और निवेश से जुड़े दस्तावेज जब्त किए हैं।
नशीले पदार्थों की अवैध कमाई को किन माध्यमों से खपाया जा रहा था?
काली कमाई को अमेरिकी डॉलर व थाई बहत में बदला जा रहा था, वैध कारोबार में निवेश किया जा रहा था और विदेशी क्रिप्टो ट्रेडिंग खातों में जमा किया जा रहा था।
प्रवर्तन निदेशालय की यह जांच किस मूल मामले पर आधारित है?
यह जांच नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, मुंबई द्वारा हाइड्रोपोनिक गांजा, कोकीन और नकदी की जब्ती के बाद एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज मामले पर आधारित है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·26 मिनट पहले

सूरत और मुंबई में ड्रग्स और क्रिप्टो के चक्कर में ईडी की रेड देखकर वो फिल्म याद आ गई जिसमें अंडरवर्ल्ड के हवाला और ड्रग्स वाले सीन होते हैं। रील लाइफ और रियल लाइफ अब एक जैसे ही लगने लगे हैं, बस यहाँ विलेन कोई फिल्मी सितारा नहीं बल्कि असली अपराधी हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·43 मिनट पहले

ड्रग्स के धंधे में अब क्रिप्टो और हवाला का खेल तेजी से बढ़ रहा है। एजेंसी ने सही जगह हाथ डाला है, वरना ये लोग सारा पैसा डिजिटल वॉलेट में छुपाकर आराम से घूमते रहते।

Amit Patel@amit-patel·43 मिनट पहले

रविकेश, आपकी बात सही है। पर क्या ईडी के पास इन क्रिप्टो वॉलेट्स को ट्रेस करने के लिए अभी उतनी तकनीकी क्षमता है?

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

क्रिप्टो और ड्रग्स का यह गठजोड़ खतरनाक है। ईडी की यह कार्रवाई सिंडिकेट की कमर तोड़ देगी।

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

करन भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। पिछले साल जब मैं लखनऊ के एक पुराने मोहल्ले में था, तब एक स्थानीय लड़के को ऐसी ही लत में बर्बाद होते देखा था, पूरा परिवार बिखर गया।

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