पंजाब के मानसा में हुए बहुचर्चित परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड को लेकर कानूनी और प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है। अदालत ने इस मामले में गिरफ्तार किए गए सभी चार आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजने का अहम फैसला सुनाया है। वहीं दूसरी तरफ, मृतक के परिवार और संघर्ष समिति ने अपनी जिद पर अड़े रहते हुए साफ कर दिया है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं की जातीं, तब तक वे शव का पोस्टमॉर्टम नहीं होने देंगे। इस दोहरी स्थिति के कारण इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है और सबकी निगाहें अब प्रशासन और सरकार के अगले रुख पर टिकी हुई हैं।
अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई पेशी
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट राजिंदर नागपाल की अदालत में इस मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए चारों आरोपियों अश्वनी कुमार, नीलम रानी, विपन और लड्डी को अदालत में शारीरिक रूप से पेश करने के बजाय वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश किया गया। अदालत कक्ष में चली लंबी और गहन सुनवाई के बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने अपना फैसला सुनाते हुए चारों आरोपियों को आगामी 5 नवंबर तक के लिए न्यायिक हिरासत में भेजने का निर्देश दिया। इसके साथ ही कानूनी प्रक्रिया का एक चरण पूरा हो गया है, लेकिन मामले की अन्य उलझनें अभी भी यथावत बनी हुई हैं।
मांगें पूरी होने तक पोस्टमॉर्टम से साफ इंकार
एक तरफ जहां अदालती कार्रवाई आगे बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ मृतक के परिजनों का गुस्सा कम होने का नाम नहीं ले रहा है। परविंदर सिंह झोटा की पत्नी मनप्रीत कौर ने मीडिया और प्रशासन के सामने बेहद स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उनका परिवार अपनी मांगों पर पूरी तरह से कायम है। परिवार और एक्शन कमेटी का कहना है कि उन्होंने धरना और प्रदर्शन शुरू करने से ठीक पहले पंजाब सरकार के समक्ष कुछ प्रमुख मांगें रखी थीं। उनकी दो टूक मांग है कि सरकार सबसे पहले उन शर्तों और मांगों को आधिकारिक तौर पर स्वीकार करे। जब तक राज्य सरकार की ओर से ये मांगें पूरी नहीं की जातीं, तब तक वे किसी भी कीमत पर शव का पोस्टमॉर्टम नहीं होने देंगे। परिवार ने यह भी चेताया है कि मांगें माने जाने के बाद ही वे आगे की किसी प्रक्रिया पर विचार करेंगे।
13 अक्टूबर को मेडिकल स्टोर पर हुई थी वारदात
यह पूरा मामला 13 अक्टूबर का है, जब मानसा में दिनदहाड़े परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी गई थी। यह सनसनीखेज वारदात एक मेडिकल स्टोर के भीतर अंजाम दी गई थी। मृतक परविंदर सिंह झोटा इलाके में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार और उनकी खरीद-फरोख्त के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाने के लिए जाने जाते थे। उनकी इस प्रकार हत्या किए जाने के बाद से ही पूरे क्षेत्र में भारी आक्रोश व्याप्त है और मामला तूल पकड़ चुका है। इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड की गंभीरता को देखते हुए वर्तमान में इसकी जांच सीबीआई द्वारा की जा रही है। पुलिस और जांच एजेंसियों ने अब तक कुल चार आरोपियों को धर दबोचा है, जिन्हें अब अदालत के आदेश पर 5 नवंबर तक के लिए जेल भेज दिया गया है।
अमित शाह ने की थी पीड़ित परिवारों से मुलाकात
इस हत्याकांड और नशीले पदार्थों के खिलाफ मुहिम चलाने वाले अन्य कार्यकर्ताओं के मामलों के बीच एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम भी सामने आया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को पंजाब का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने गुरदासपुर, संगरूर और मानसा के उन तीन पीड़ित परिवारों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की, जिनके अपनों ने नशीले पदार्थों के खिलाफ आवाज उठाई थी और बदले में उन्हें अपनी जान गंवानी पड़ी थी। इन संवेदना भरी मुलाकातों के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री ने शोक संतप्त परिजनों के प्रति गहरी सहानुभूति प्रकट की और उन्हें हरसंभव न्याय दिलाने का ठोस भरोसा दिया। इसके साथ ही उन्होंने इन तीनों मामलों की जांच सीबीआई से कराने का वादा भी किया था, जिस पर अब अमल किया जा रहा है।



















